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खामेनेई के अंतिम संस्कार की तारीख तय, मुहर्रम के बाद दफन

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, तेहरान

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा अपडेट आया है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए ईरान सरकार ने स्थिति साफ की है। खामेनेई स्मारक समिति ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अंतिम संस्कार का समय घोषित किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार पूर्व सर्वोच्च नेता का दफन और श्रद्धांजलि सभा मुहर्रम के शुरुआती दस दिनों के बाद आयोजित होगी। यानी आशूरा की समाप्ति के बाद ही विदाई समारोह संपन्न किया जाएगा।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी है। मेहर न्यूज के मुताबिक स्मारक समिति के मुख्यालय ने मंगलवार को अपना दूसरा आधिकारिक बयान जारी किया। इस नए बयान में अयातुल्ला खामेनेई और उनके परिवार के दिवंगत सदस्यों के अंतिम संस्कार को लेकर चल रही तैयारियों का जिक्र है। प्रशासन ने साफ किया है कि इस ऐतिहासिक विदाई कार्यक्रम को बेहद गरिमापूर्ण और बड़े पैमाने पर आयोजित करने के लिए हर स्तर पर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।

अफवाहों पर लगाम लगाने की कोशिश

अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद से ही देश और दुनिया के मीडिया में अंतिम संस्कार को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे थे। घरेलू स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक अलग-अलग तारीखें बताई जा रही थीं। इन अपुष्ट खबरों के कारण आम जनता और विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भारी भ्रम की स्थिति बन गई थी। समिति ने अपने नए बयान में इन सभी अटकलों और फर्जी रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज किया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के प्रसारित की जा रही खबरों का कोई कानूनी या वास्तविक आधार नहीं है। ऐसी भ्रामक सूचनाएं लोगों को गुमराह कर रही हैं।

समिति के अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया और विदेशी चैनलों पर चल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार खुद सही समय पर पूरी योजना साझा करेगी ताकि अंतिम दर्शन के इच्छुक लोगों को कोई परेशानी न हो।

मुहर्रम और आशूरा के बाद क्यों होगा अंतिम संस्कार?

अयातुल्ला अली खामेनेई अपने पूरे जीवनकाल में इमाम हुसैन की याद में होने वाले शोक समारोहों से गहरे जुड़े रहे। वे हर साल मुहर्रम के महीने में आयोजित होने वाली मजलिसों और अजादारी को विशेष महत्व देते थे। इसी ऐतिहासिक और धार्मिक प्रतिबद्धता का सम्मान करते हुए समिति ने यह बड़ा फैसला लिया है। समिति का मानना है कि मुहर्रम के शुरुआती दस दिन इस्लाम में बेहद पवित्र और शोक के दिन होते हैं। इस दौरान पूरी दुनिया के शिया मुस्लिम इमाम हुसैन की शहादत का गम मनाते हैं।

यही वजह है कि खामेनेई का अंतिम संस्कार और दफन कार्यक्रम आशूरा के बाद रखने का फैसला हुआ। आशूरा मुहर्रम महीने का दसवां दिन होता है जो इस बार जून के आखिरी हफ्ते में आने की उम्मीद है। इस निर्णय से यह सुनिश्चित होगा कि देश का आम नागरिक मुहर्रम की पारंपरिक अजादारी भी पूरी कर सके और अपने नेता की अंतिम यात्रा में भी शामिल हो सके।

भव्य आयोजन की विशाल तैयारियां

ईरान का प्रशासन इस अंतिम संस्कार को इतिहास का सबसे बड़ा जमावड़ा बनाने की तैयारी में जुटा है। देश के विभिन्न जन संगठन, नगर निगम और सुरक्षा एजेंसियां आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रही हैं। शोक संतप्त परिवारों और बाहर से आने वाले करोड़ों लोगों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। तेहरान के स्थानीय प्रशासन के सूत्रों की मानें तो इस विदाई कार्यक्रम में करीब दो करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

इस विशाल भीड़ को संभालने के लिए यातायात रूट, ठहरने के स्थान और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। कार्यक्रम की सटीक तारीख और विस्तृत रूट मैप आने वाले दिनों में समिति के मुख्यालय द्वारा सीधे जारी किया जाएगा। तेहरान के साथ-साथ कोम और मशहद जैसे पवित्र शहरों में भी शोक सभाओं की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

कैसे हुई थी यह ऐतिहासिक घटना?

इस पूरी स्थिति की पृष्ठभूमि 28 फरवरी की उस सैन्य कार्रवाई से जुड़ी है जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। इसी साल 28 फरवरी को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर एक बड़ा और रणनीतिक संयुक्त हवाई हमला किया था। इस हमले का मुख्य निशाना अयातुल्ला अली खामेनेई का आधिकारिक निवास स्थान था।

इस भीषण हमले में ईरान की इस्लामी क्रांति के मार्गदर्शक अयातुल्ला अली खामेनेई की मौके पर ही मौत हो गई थी। उनके साथ उनके परिवार के कई करीबी सदस्य और ईरान के कुछ बेहद उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारी भी मारे गए थे। इस हमले के बाद से ही मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। ईरान ने इस घटना को एक बड़ी राष्ट्रीय क्षति और शहादत का दर्जा दिया है। तभी से पूरे देश में शोक का माहौल है और नए नेतृत्व के तहत व्यवस्था को संभाला जा रहा है।

पाकिस्तान और लेबनान के सैन्य नेतृत्व की मुलाकात

अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार की घोषणा के बीच ही क्षेत्र में बड़ी कूटनीतिक और सैन्य हलचल भी देखने को मिल रही है। पाकिस्तान और लेबनान के सेना प्रमुखों के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई है। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के सैन्य कप्तानों ने आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया है।

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिकी-इजरायली आक्रामकता के बीच इस बैठक को बेहद खास माना जा रहा है। लेबनान और पाकिस्तान के रक्षा सहयोग में यह बदलाव आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। दोनों पक्षों ने सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटने और खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को बेहतर बनाने पर सहमति जताई है।

सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक स्थिति

अयातुल्ला खामेनेई के जाने के बाद ईरान के भीतर सत्ता संतुलन और सुरक्षा को लेकर भी कड़े कदम उठाए गए हैं। नए सर्वोच्च नेता के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों ने देश की सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी है। अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी संभावित बाहरी हस्तक्षेप या अप्रिय घटना को रोकने के लिए रेवोल्यूशनरी गार्ड्स को अलर्ट पर रखा गया है।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि विदेशी मेहमानों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों के आगमन के लिए एक विशेष प्रोटोकॉल टीम बनाई गई है। यह टीम हवाई अड्डों से लेकर कार्यक्रम स्थल तक सुरक्षा और परिवहन का पूरा जिम्मा संभालेगी। ईरान सरकार का लक्ष्य है कि इस संकट की घड़ी में भी वह पूरी दुनिया को अपनी प्रशासनिक ताकत और एकजुटता का संदेश दे सके।

समिति के प्रवक्ता ने अंत में कहा कि आने वाले एक-दो दिनों में सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद मीडिया के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी। जनता से अनुरोध है कि वे केवल सरकारी रेडियो, टेलीविजन और आधिकारिक समाचार एजेंसियों जैसे मेहर न्यूज या इरना पर आने वाली सूचनाओं को ही सही मानें। किसी भी अन्य माध्यम से प्राप्त दावों पर भरोसा करके अपनी यात्रा की योजना न बनाएं। विदाई का यह ऐतिहासिक कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण और धार्मिक मर्यादा के तहत संपन्न कराया जाएगा।

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