कर्नाटक के छात्रों को MANUU पत्रकारिता पाठ्यक्रम में बड़ी राहत
Table of Contents
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, हैदराबाद
पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले कर्नाटक के छात्रों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले कर्नाटक के विद्यार्थियों को फीस की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। कर्नाटक उर्दू अकादमी ने ऐसा फैसला लिया है जिससे सैकड़ों छात्रों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
कर्नाटक उर्दू अकादमी ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 से मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता और जनसंचार के पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले कर्नाटक के पात्र छात्रों की पूरी फीस वापस की जाएगी। इस फैसले को उच्च शिक्षा और उर्दू पत्रकारिता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
किन छात्रों को मिलेगा लाभ
मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एहतेशाम अहमद खान के अनुसार यह सुविधा उन छात्रों को मिलेगी जो कर्नाटक राज्य से संबंध रखते हैं और विश्वविद्यालय में बीए जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन ऑनर्स अथवा रिसर्च और एमए जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में प्रवेश लेंगे।
यह योजना शैक्षणिक सत्र 2026 27 से लागू होगी। इसका मतलब है कि आगामी सत्र से प्रवेश लेने वाले छात्रों को इस सहायता का लाभ मिल सकेगा।
पत्रकारिता शिक्षा को मिलेगा नया प्रोत्साहन
देश में मीडिया और पत्रकारिता का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। डिजिटल मीडिया, ऑनलाइन पत्रकारिता, डेटा जर्नलिज्म और मल्टीमीडिया रिपोर्टिंग जैसे नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद आर्थिक कारणों से कई प्रतिभाशाली छात्र पत्रकारिता की पढ़ाई नहीं कर पाते।
कर्नाटक उर्दू अकादमी का यह फैसला ऐसे छात्रों के लिए राहत लेकर आया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फीस प्रतिपूर्ति की यह व्यवस्था विद्यार्थियों को आर्थिक बोझ से मुक्त करेगी और वे पूरी एकाग्रता के साथ अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकेंगे।
क्या है फीस प्रतिपूर्ति योजना
फीस प्रतिपूर्ति योजना के तहत पात्र छात्रों द्वारा जमा की गई फीस उन्हें वापस दी जाएगी। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों को बड़ा सहारा मिलेगा।
उच्च शिक्षा के बढ़ते खर्च के दौर में यह पहल उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है जिनके लिए विश्वविद्यालय की फीस जुटाना चुनौती बन जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब आर्थिक बाधाएं कम होती हैं तो छात्रों की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ती है। इसका सकारात्मक असर समाज और शिक्षा दोनों पर पड़ता है।
MANUU क्यों है खास
मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी देश की प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में गिनी जाती है। उर्दू माध्यम और बहुभाषी शिक्षा के लिए यह संस्थान विशेष पहचान रखता है।
विश्वविद्यालय का जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग लंबे समय से मीडिया क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित और सक्षम पेशेवर तैयार कर रहा है। यहां से पढ़कर निकले छात्र देश के विभिन्न समाचार पत्रों, टीवी चैनलों, डिजिटल मीडिया संस्थानों और जनसंपर्क संगठनों में कार्य कर रहे हैं।
यही वजह है कि पत्रकारिता में करियर बनाने वाले छात्रों के बीच इस विश्वविद्यालय की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
उर्दू पत्रकारिता को मिलेगा बल
उर्दू पत्रकारिता का इतिहास काफी समृद्ध रहा है। देश की आजादी की लड़ाई से लेकर सामाजिक जागरूकता तक उर्दू प्रेस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आज डिजिटल युग में उर्दू मीडिया नए दौर में प्रवेश कर रहा है। ऐसे समय में पत्रकारिता की पढ़ाई को बढ़ावा देने वाली योजनाएं विशेष महत्व रखती हैं।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि कर्नाटक उर्दू अकादमी का यह फैसला उर्दू पत्रकारिता को नई ऊर्जा देगा। इससे अधिक छात्र इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित होंगे।
छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत
कई परिवार अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं लेकिन आर्थिक सीमाएं रास्ते में आ जाती हैं। फीस, रहने का खर्च और अन्य शैक्षणिक जरूरतें मिलकर बड़ी चुनौती बन जाती हैं।
ऐसे में फीस प्रतिपूर्ति जैसी योजनाएं छात्रों का मनोबल बढ़ाती हैं। इससे परिवारों को आर्थिक राहत मिलती है और छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे खुलते हैं।
हैदराबाद और कर्नाटक के कई शिक्षा विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह कदम सामाजिक और शैक्षणिक प्रगति को मजबूत करेगा।
विभागाध्यक्ष ने जताया आभार
जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एहतेशाम अहमद खान ने इस फैसले पर खुशी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह सहायता कर्नाटक के छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
उन्होंने कर्नाटक उर्दू अकादमी का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस पहल से पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में अधिक प्रतिभाशाली छात्र आगे आएंगे।
उन्होंने विशेष रूप से कर्नाटक उर्दू अकादमी के पूर्व रजिस्ट्रार डॉक्टर मजहरुद्दीन खान और बेंगलुरु के वरिष्ठ पत्रकार आजम शाहिद के प्रयासों की सराहना की। उनके सहयोग और पहल से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का रास्ता आसान हुआ।
क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय
आज के दौर में शिक्षा और रोजगार के बीच सीधा संबंध है। पत्रकारिता जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों में आर्थिक सहायता मिलने से छात्रों को बेहतर अवसर मिलते हैं।
यह फैसला केवल फीस प्रतिपूर्ति तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक सशक्तिकरण, शिक्षा के विस्तार और युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की योजनाएं लागू हों तो उच्च शिक्षा में भागीदारी और बढ़ सकती है।
छात्रों के लिए सुनहरा अवसर
कर्नाटक के वे छात्र जो पत्रकारिता, मास कम्युनिकेशन, डिजिटल मीडिया, न्यू मीडिया, रिपोर्टिंग, एंकरिंग या मीडिया रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह अवसर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फीस की चिंता कम होने से छात्र अपने करियर और कौशल विकास पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
शिक्षा जगत का मानना है कि यह पहल आने वाले वर्षों में पत्रकारिता क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को सामने लाने में मदद करेगी।
उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को अवसर प्रदान करने की दिशा में कर्नाटक उर्दू अकादमी का यह कदम एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे न केवल छात्रों को लाभ मिलेगा बल्कि पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी।

