पीओके में इंटरनेट बंद, एक्शन कमेटी का long march शुरू
Table of Contents
मुस्लिम नाउ ब्यूरो
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। सड़कों पर भारी पुलिस और सुरक्षा बल तैनात हैं। इसके बावजूद प्रतिबंधित घोषित की जा चुकी जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने अपने घोषित लॉन्ग मार्च की शुरुआत कर दी है। विभिन्न जिलों से हजारों लोग राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक उथल पुथल के केंद्र में ला दिया है।
पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 11 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सुरक्षा कर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई इलाकों में इंटरनेट सेवा निलंबित कर रखी है और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन
जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी लंबे समय से पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों को लेकर विरोध कर रही है। संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और इस मुद्दे पर जनता की राय को महत्व दिया जाना चाहिए।
हालांकि सरकार का कहना है कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत किसी भी बदलाव का अधिकार केवल निर्वाचित विधानसभा को है। इसी मुद्दे पर सरकार और एक्शन कमेटी के बीच गतिरोध बढ़ता गया।
31 मई को मुजफ्फराबाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।

कई जिलों से निकले प्रदर्शनकारी
मंगलवार सुबह भिंबर, कोटली, मीरपुर और नीलम सहित कई जिलों से प्रदर्शनकारियों के काफिले मुजफ्फराबाद की ओर रवाना हुए।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कुछ स्थानों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। कोटली क्षेत्र से हिंसा और घायल होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि सरकारी स्तर पर तत्काल पुष्टि नहीं की गई।
इंटरनेट बंद होने की वजह से विभिन्न काफिलों की सटीक स्थिति की जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है।
मुजफ्फराबाद में सन्नाटा
राजधानी मुजफ्फराबाद में धारा 144 लागू है। शहर में बाजार बंद हैं। सड़कें लगभग खाली दिखाई दे रही हैं।
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की गाड़ियां लगातार गश्त कर रही हैं। कई संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। हालांकि बड़े स्तर की हिंसा की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

रावलाकोट में तनाव के बाद शांति
पिछले सप्ताह रावलाकोट में हुई हिंसक झड़पों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। छह और सात जून की रात सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भिड़ंत में कई लोगों की जान चली गई थी।
लेकिन लॉन्ग मार्च के पहले दिन रावलाकोट अपेक्षाकृत शांत दिखाई दिया। शहर में पूर्ण बंद जैसा माहौल रहा। दुकानें बंद रहीं और लोग घरों में ही रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल की घटनाओं के बाद लोगों में भय और अनिश्चितता का माहौल है।
नेताओं की गिरफ्तारी पर इनाम
इस बीच पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के गृह विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है।
सरकार ने एक्शन कमेटी के चार प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी में मदद करने वालों के लिए एक एक करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की है।
इन नेताओं में शोकत नवाज मीर, उमर नजीर कश्मीरी, ख्वाजा मेहरान अरशद और सरदार अमान खान शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।
शोकत नवाज मीर पर देशद्रोह का मामला
मंगलवार को एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। मुजफ्फराबाद के सिटी थाने में एक्शन कमेटी के नेता शोकत नवाज मीर के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कर लिया गया।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार उन पर भाषणों, लेखों और सोशल मीडिया गतिविधियों के माध्यम से लोगों को भड़काने का आरोप लगाया गया है।
मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं और संबंधित एजेंसियां आगे की कार्रवाई में जुटी हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
विवाद के केंद्र में मौजूद शरणार्थी सीटों के मुद्दे पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विस्तृत राय में कहा कि संविधान में किसी भी प्रकार का संशोधन दबाव के आधार पर नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का निर्णय केवल विधानसभा के माध्यम से और व्यापक सहमति के बाद ही संभव है।
इस टिप्पणी को सरकार ने अपने पक्ष के समर्थन के रूप में पेश किया है जबकि प्रदर्शनकारी इसे पर्याप्त नहीं मानते।
प्रधानमंत्री के रुख में नरमी
कश्मीर के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर के रुख में भी हाल के दिनों में बदलाव देखने को मिला है।
पहले उन्होंने एक्शन कमेटी पर लगाए गए प्रतिबंध का समर्थन किया था। लेकिन बाद में उन्होंने प्रदर्शनकारियों को अपने ही लोग बताते हुए बातचीत की अपील की।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोग देशद्रोही नहीं हैं। वे केवल निराश हैं और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि यदि प्रदर्शनकारी बातचीत के लिए तैयार हों तो सरकार संवाद प्रक्रिया को दोबारा शुरू कर सकती है।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी हालात पर चिंता व्यक्त की है।
संगठन ने इंटरनेट बंदी, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और बल प्रयोग की घटनाओं पर सवाल उठाए हैं।
एमनेस्टी का कहना है कि क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति लगातार खराब हो रही है और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।
विदेशों में भी विरोध प्रदर्शन
रावलाकोट और अन्य क्षेत्रों में हुई घटनाओं के बाद ब्रिटेन और कनाडा में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी विरोध प्रदर्शन किए हैं।
लंदन में पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन आयोजित किया गया। कनाडा में भी लोगों ने रैलियां निकालकर चिंता व्यक्त की।
हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन बयानों और विरोध प्रदर्शनों को खारिज करते हुए कहा कि बाहरी लोगों को देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
आगे क्या होगा
इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और एक्शन कमेटी के बीच बातचीत दोबारा शुरू होगी या हालात और बिगड़ेंगे।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संवाद की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो तनाव और बढ़ सकता है। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक रास्ते ही इस संकट का स्थायी समाधान दे सकते हैं।
फिलहाल मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहे काफिलों और प्रशासन की अगली रणनीति पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है। आने वाले दिन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की राजनीति और सामाजिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
इनपुट: उर्दू न्यूज


