मदीना में मिला उमर के दौर का दुर्लभ शिलालेख
नौशाद अख्तर
सऊदी अरब के मदीना क्षेत्र से सामने आई एक पुरातात्विक खोज ने इतिहासकारों और इस्लामी विरासत के शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अल महद इलाके में हुए व्यापक सर्वेक्षण के दौरान एक ऐसा प्राचीन शिलालेख मिला है, जिसे शुरुआती इस्लामी दौर के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्यों में गिना जा रहा है। इस शिलालेख में इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर इब्न अल खत्ताब का उल्लेख है और साथ ही पैगंबर मुहम्मद ﷺ को अल्लाह का रसूल बताया गया है।
सऊदी हेरिटेज कमीशन ने इस खोज की आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा कि यह शिलालेख उन 1774 पुरातात्विक अवशेषों में शामिल है, जो मदीना प्रांत के अल महद गवर्नरेट में चलाए गए सर्वेक्षण अभियान के दौरान मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज इस्लामी इतिहास, अरब सभ्यता और शुरुआती इस्लामी राज्य की संरचना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
مراسل العربية في المدينة المنورة @AlFuraidi يزور موقع النقش النادر لثاني الخلفاء الراشدين عمر بن الخطاب.. وهيئة التراث: الموقع يضم مزارعا تاريخية وتنتشر فيه الكثير من الكتابات الإسلامية pic.twitter.com/mNQOtsWPNx
— العربية (@AlArabiya) June 12, 2026
शिलालेख पर उकेरे गए शब्दों ने शोधकर्ताओं की उत्सुकता और बढ़ा दी है। इसमें लिखा है कि अल्लाह इस दुनिया और आखिरत में उमर इब्न अल खत्ताब का संरक्षक है और अल्लाह के सिवा कोई दूसरा ईश्वर नहीं है। इसके साथ ही यह भी अंकित है कि मुहम्मद ﷺ अल्लाह के पैगंबर हैं। इतिहासकारों के अनुसार यह पाठ शुरुआती इस्लामी आस्था और उस दौर की धार्मिक अभिव्यक्ति का जीवंत प्रमाण माना जा सकता है।
सबसे खास बात यह है कि यह शिलालेख हिजाजी लिपि में लिखा गया है। हिजाजी स्क्रिप्ट को अरबी भाषा की सबसे पुरानी इस्लामी लिपियों में से एक माना जाता है। इस लिपि में लिखे गए दस्तावेज और शिलालेख बहुत कम संख्या में उपलब्ध हैं। इसलिए यह खोज केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि भाषाई और सांस्कृतिक अध्ययन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सर्वेक्षण के दौरान केवल यही शिलालेख नहीं मिला। सऊदी हेरिटेज कमीशन के अनुसार टीमों ने 173 नए और पहले से अज्ञात पुरातात्विक स्थलों की पहचान की है। इसके अलावा 1259 रॉक आर्ट चित्र, 461 इस्लामी शिलालेख, थमुद भाषा के 34 शिलालेख, 11 पत्थर संरचनाएं, तीन प्राचीन महलनुमा ढांचे, कारवां मार्गों से जुड़े दो ऐतिहासिक मील के पत्थर और चार पुराने कुएं भी खोजे गए हैं।
🇸🇦 A remarkable archaeological discovery by the Saudi Heritage Commission has revealed a rare early Islamic inscription reading:
— Saudi Expatriates (@saudiexpat) June 12, 2026
"Allah is the guardian of Umar ibn al-Khattab in this world and the Hereafter, and there is no god but Allah. Muhammad ﷺ is the Messenger of Allah."… pic.twitter.com/kxo45EEs9G
विशेषज्ञों का कहना है कि अल महद क्षेत्र सदियों से व्यापारिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहां से गुजरने वाले कारवां मार्ग अरब प्रायद्वीप के विभिन्न हिस्सों को जोड़ते थे। ऐसे में यहां मिले शिलालेख और संरचनाएं उस दौर के सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकती हैं।
उमर इब्न अल खत्ताब इस्लामी इतिहास की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में गिने जाते हैं। उन्होंने 634 से 644 ईस्वी तक मुस्लिम समुदाय का नेतृत्व किया। उनके शासनकाल में इस्लामी राज्य का तेजी से विस्तार हुआ और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत आधार मिला। यही कारण है कि उनके नाम से जुड़ा कोई भी प्राचीन दस्तावेज या शिलालेख इतिहासकारों के लिए विशेष महत्व रखता है।
इस नई खोज को शुरुआती इस्लामी सभ्यता के दस्तावेजी प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है। पुरातत्वविदों का मानना है कि इससे इस्लाम के प्रारंभिक वर्षों, धार्मिक मान्यताओं और उस दौर की लेखन परंपराओं पर नई रोशनी पड़ेगी। साथ ही यह खोज सऊदी अरब की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
मदीना के पास मिला यह दुर्लभ शिलालेख केवल पत्थर पर लिखे कुछ शब्द नहीं हैं। यह सातवीं सदी के इतिहास की एक जीवित झलक है। एक ऐसी झलक जो इस्लामी सभ्यता की जड़ों और उसके शुरुआती विकास को समझने में आने वाली पीढ़ियों की मदद करेगी।

FAQ
मदीना में मिला शिलालेख किससे जुड़ा है?
यह शिलालेख इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर इब्न अल खत्ताब और पैगंबर मुहम्मद ﷺ के उल्लेख से जुड़ा है।
शिलालेख कहां मिला?
यह खोज सऊदी अरब के मदीना क्षेत्र के अल महद गवर्नरेट में हुई है।
हिजाजी लिपि क्या है?
हिजाजी स्क्रिप्ट अरबी भाषा की सबसे पुरानी इस्लामी लिपियों में से एक मानी जाती है।
इस खोज का महत्व क्या है?
यह शुरुआती इस्लामी इतिहास, धार्मिक परंपराओं और अरब सभ्यता के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करती है।
सर्वेक्षण में और क्या मिला?
रॉक आर्ट चित्र, इस्लामी शिलालेख, थमुद भाषा के लेख, प्राचीन संरचनाएं, कुएं और कारवां मार्गों से जुड़े अवशेष भी मिले हैं।


