ट्रंप का बड़ा बयान, मेरे बिना इजराइल नहीं बचता
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G7 Summit 2026 में ट्रंप ने नेतन्याहू को दी नसीहत, बेरूत हमले पर जताई नाराजगी
एवियन, फ्रांस।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल और लेबनान को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका और उनकी सरकार का समर्थन न होता तो आज इजराइल का अस्तित्व नहीं होता।
ट्रंप ने दावा किया कि उनके बिना इजराइल बहुत पहले ही खत्म हो चुका होता। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हमेशा इजराइल का साथ दिया है, लेकिन मौजूदा हालात में इजराइली नेतृत्व को ज्यादा जिम्मेदारी दिखाने की जरूरत है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक संभावित समझौते पर बातचीत चल रही है और स्विट्जरलैंड में समझौते पर हस्ताक्षर की तैयारी हो रही है।
बेरूत हमले पर ट्रंप की नाराजगी
जी7 सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने हाल ही में बेरूत में हुए इजराइली हवाई हमले पर खुलकर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि समझौते की घोषणा से कुछ घंटे पहले लेबनान की राजधानी पर हमला करना उचित नहीं था। उनके अनुसार इस तरह की कार्रवाई शांति प्रयासों को कमजोर कर सकती है।
ट्रंप ने कहा कि किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए पूरी इमारत गिरा देना सही तरीका नहीं है। उन इमारतों में रहने वाले सभी लोग हिजबुल्लाह से जुड़े नहीं होते।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि युद्ध बहुत लंबा खिंच चुका है और अब बहुत ज्यादा लोग मारे जा रहे हैं।
नेतन्याहू को दी सार्वजनिक सलाह
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों को अच्छा बताया, लेकिन साथ ही उन्हें चेतावनी भी दी।
ट्रंप ने कहा कि उनकी नेतन्याहू से अच्छी दोस्ती है, लेकिन लेबनान के मामले में उन्हें ज्यादा जिम्मेदार रवैया अपनाना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक मंच से इजराइल की इतनी खुली आलोचना करना असामान्य माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह संकेत हो सकता है कि वाशिंगटन अब क्षेत्रीय संघर्षों को सीमित करने के लिए तेल अवीव पर दबाव बढ़ा रहा है।
सीरिया को लेकर भी दिया सुझाव
ट्रंप ने बातचीत के दौरान एक और चौंकाने वाली बात कही। उन्होंने कहा कि उन्होंने इजराइल को सलाह दी थी कि हिजबुल्लाह से निपटने का काम सीरिया को करने दिया जाए।
उनका कहना था कि अगर किसी संगठन के खिलाफ कार्रवाई में बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे जा रहे हों तो रणनीति बदलने की जरूरत होती है।
ट्रंप ने कहा कि अगर इजराइल बिना नागरिकों को नुकसान पहुंचाए यह काम नहीं कर सकता तो सीरिया यह जिम्मेदारी संभाल सकता है।
इस बयान को लेकर पश्चिम एशिया में नई चर्चा शुरू हो गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच नई वार्ता
इसी बीच अमेरिका और ईरान ने घोषणा की है कि दोनों देश 19 जून से स्विट्जरलैंड में औपचारिक वार्ता शुरू करेंगे।
यह वार्ता 60 दिनों तक चल सकती है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि बातचीत का उद्देश्य स्थायी समझौते तक पहुंचना है।
वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया से पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने की कोशिश की जाएगी।
समझौते पर नया विवाद
हालांकि संभावित समझौते को लेकर दोनों पक्षों की व्याख्या अलग अलग दिखाई दे रही है।
ईरान का कहना है कि युद्ध को पूरी तरह समाप्त मानने के लिए इजराइल को दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटानी होगी।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि जब तक कब्जे वाले क्षेत्रों से इजराइली सेना वापस नहीं जाती तब तक संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर अमेरिका और इजराइल इस शर्त को समझौते का हिस्सा नहीं मानते।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू पहले ही कह चुके हैं कि इजराइली सेना जरूरत पड़ने तक लेबनान में मौजूद रहेगी।
यही मुद्दा आने वाले दिनों में बातचीत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
ईरान की चेतावनी
दक्षिणी लेबनान में हालिया हमलों के बाद ईरान ने इजराइल को कड़ी चेतावनी दी है।
ईरानी सैन्य कमान ने कहा है कि यदि लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो इजराइल को कड़े जवाब का सामना करना पड़ सकता है।
ईरान का दावा है कि संघर्ष विराम की घोषणा के बाद भी इजराइल ने कई बार समझौते का उल्लंघन किया है।
इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की उम्मीद
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द पूरी तरह खुल जाएगा।
उन्होंने कहा कि तेल से भरे जहाज फिर से सामान्य रूप से आवाजाही शुरू कर चुके हैं।
इस खबर का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दिया।
ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज मार्ग स्थायी रूप से खुला रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।
जी7 में मोदी ने भी जताई चिंता
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जी7 सम्मेलन में होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री व्यापार पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और कई भारतीय नागरिकों की जान भी गई है।
मोदी ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि दुनिया के मौजूदा संकटों का समाधान केवल संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही संभव है।
आगे क्या होगा
अब दुनिया की नजर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका और ईरान वार्ता पर टिकी हुई है।
यदि समझौता सफल रहता है तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है।
लेकिन लेबनान, हिजबुल्लाह और इजराइली सैन्य मौजूदगी जैसे मुद्दे अभी भी बड़े अवरोध बने हुए हैं।
ट्रंप के हालिया बयान ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका शांति समझौते को प्राथमिकता देना चाहता है। वहीं इजराइल और ईरान के बीच अविश्वास अब भी कायम है।
आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्षेत्र युद्ध से बाहर निकलता है या फिर एक नए टकराव की ओर बढ़ता है।

