भारत-पाकिस्तान के बीच कोलंबो में सीक्रेट बातचीत, क्या सुधरेंगे रिश्ते?
नौशाद अख्तर
वैश्विक राजनीति के समीकरण बहुत तेजी से बदल रहे हैं। ईरान अब अमेरिका, चीन और रूस के बाद चौथी बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश में है। वह 56 इस्लामिक देशों को एक साथ लाकर एक नया वैश्विक संगठन बनाने की तैयारी भी कर रहा है। इन तमाम रणनीतिक बदलावों के बीच पाकिस्तान का महत्व एक बार फिर बढ़ गया है। इसी माहौल के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पिछले बारह वर्षों से कट्टर दुश्मनी झेल रहे दो पड़ोसी देश भारत और पाकिस्तान एक बार फिर पर्दे के पीछे से दोस्ती का रास्ता तलाश रहे हैं।
इस पूरी कूटनीति में दोनों देशों का कोई आधिकारिक सरकारी चेहरा सामने नहीं आया है। इसके बावजूद दोनों तरफ की सरकारों में गहरा दखल रखने वाले राजनेता और पूर्व नौकरशाह इस सिलसिले को आगे बढ़ा रहे हैं। ये लोग ऑपरेशन ‘ट्रैक वन’ और ‘ट्रैक टू’ के माध्यम से दोनों देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बातचीत का मुख्य एजेंडा आतंकवाद और सिंधु नदी के जल बंटवारे जैसे गंभीर मुद्दों को सुलझाना है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच विवाद की यही दो सबसे बड़ी वजहें रही हैं।
पिछले बारह वर्षों के दौरान दोनों देशों के रिश्ते सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। दोनों देश एक-दूसरे पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाते रहे हैं। भारत ने वैश्विक मंचों पर कई बार सबूत पेश किए हैं। भारत का दावा है कि कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में हुए आतंकी हमलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ था। इन सबूतों के आधार पर भारत अपने मित्र देशों की मदद से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में सफल रहा था। इसी नीति के तहत भारत ने ईरान के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को पीछे छोड़ते हुए इजरायल के साथ करीबी रिश्ते बढ़ाए थे।
पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बड़ा आतंकवादी हमला हुआ था। इस हमले में 26 बेगुनाह नागरिकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी कैंपों और लॉन्चपैड को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इस सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। राजनयिक संबंध पूरी तरह ठप हो गए। सिर्फ दोनों देशों के मिलिट्री ऑपरेशन्स के डायरेक्टर जनरल के बीच हॉटलाइन ही काम कर रही थी।
इसके बाद ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने दुनिया के सारे समीकरण बदल दिए। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इजरायल की खुफिया और सैन्य शक्ति के दावों की पोल खोल दी। इसके साथ ही खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए। इस संकट के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद से ईरान के साथ समझौता कराया। इस कूटनीतिक सफलता के बाद वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की छवि और उसका रणनीतिक महत्व अचानक बढ़ गया।
मुस्लिम देश अब तक अमेरिका और इजरायल को अपनी सुरक्षा की गारंटी मानते थे। अब वे एक अलग संगठन बनाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस बदलते दौर में रूस और चीन भी ईरान के बेहद करीब आ चुके हैं। इस बदली हुई वैश्विक स्थिति में भारत को भी अपनी विदेश नीति और क्षेत्रीय भूमिका पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत महसूस हो रही है। अगर इस नाजुक मोड़ पर भारत और पाकिस्तान के संबंध सुधरते हैं, तो दोनों देशों को व्यापारिक स्तर पर बहुत बड़ा फायदा होगा।
संबंध बेहतर होने से सीमा पार की आतंकवादी गतिविधियां भी रुक सकती हैं। पाकिस्तान अक्सर बलूचिस्तान में चल रहे देशविरोधी आंदोलनों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराता है। दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने से इस मुद्दे का समाधान भी संभव हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ठीक दो महीने बाद यानी पिछले साल जुलाई में ही दोनों देशों के बीच पहली बैकचैनल बैठक लंदन में हुई थी। यह बैठक भी इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज ने ही आयोजित की थी।
अब इस सिलसिले की सबसे नई और महत्वपूर्ण कड़ी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से सामने आई है। कोलंबो के हिल्टन होटल में आईआईएसएस के सालाना ‘साउथ एशिया डायलॉग’ के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने करीब डेढ़ दिन तक गोपनीय चर्चा की। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने इस बातचीत को ‘ट्रैक 1.5’ डिप्लोमेसी करार दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस चर्चा में पूर्व अधिकारियों और राजनेताओं के साथ-साथ दोनों तरफ के मौजूदा सरकारी अधिकारी भी शामिल थे। हालांकि ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने इसे ‘ट्रैक 2’ संवाद बताया है, जिसमें केवल पूर्व अधिकारी शामिल होते हैं।
इस गुप्त बैठक में शामिल चेहरों की बात करें तो भारतीय प्रतिनिधिमंडल में बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव शामिल थे। उनके साथ भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और यूके में भारत की पूर्व राजदूत रुचि घनश्याम भी मौजूद थीं। पाकिस्तानी पक्ष की तरफ से विदेश मंत्रालय के मौजूदा महानिदेशक सज्जाद हैदर खान ने हिस्सा लिया। उनके साथ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की वरिष्ठ नेता शेरी रहमान और आईएसआई में काम कर चुके रिटायर्ड मेजर जनरल इसफंदियार अली खान पटौदी शामिल थे।
इस बैठक की संवेदनशीलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिकी असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एस. पॉल कपूर भी इस दौरान कोलंबो में मौजूद थे। वे कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोजित एक विशेष डिनर में भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के साथ शामिल हुए। हालांकि बैठक की संवेदनशील प्रकृति के कारण दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है।
श्रीलंकाई मीडिया ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच कोलंबो में उच्च स्तरीय बातचीत हुई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संकट के समय दोनों देशों के बीच कम्युनिकेशन सिस्टम को मजबूत करना था, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के सैन्य तनाव को बढ़ने से रोका जा सके। बैठक में शामिल एक पूर्व राजनयिक के अनुसार, कुछ भारतीय प्रतिनिधि बातचीत को आगे बढ़ाने के पक्ष में दिखे। हालांकि उनका यह भी मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अभी किसी औपचारिक कूटनीतिक प्रक्रिया को शुरू करने की जल्दबाजी में नहीं है।
भारत के भीतर भी रणनीतिक विशेषज्ञों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विचारकों के बीच यह राय बन रही है कि पाकिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग करने की नीति अब बहुत प्रभावी नहीं रह गई है। पिछले एक साल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों ने पाकिस्तान की भौगोलिक और रणनीतिक अहमियत को दोबारा साबित किया है। ऐसे में नई दिल्ली को इस्लामाबाद के प्रति अपने पुराने नजरिए की समीक्षा करनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और खेती पूरी तरह सिंधु नदी के पानी पर निर्भर है। भारत द्वारा सिंधु जल समझौते की समीक्षा की चेतावनी के बाद पाकिस्तान पर भी बातचीत की मेज पर आने का भारी दबाव है।
हालांकि पाकिस्तानी सूत्रों ने इस कोलंबो बैठक को किसी औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत का हिस्सा मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि इस तरह के बहुपक्षीय सुरक्षा सम्मेलनों में दोनों देशों के अधिकारी अक्सर शामिल होते रहते हैं। पाकिस्तानी सूत्रों का आरोप है कि मोदी सरकार से जुड़े मीडिया संस्थान इस खबर को जानबूझकर हवा दे रहे हैं ताकि यह दिखाया जा सके कि भारत बातचीत के लिए उत्सुक है। पाकिस्तान के मौजूदा नेतृत्व का रुख साफ है कि अगर भारत बराबरी और आपसी सम्मान के आधार पर शांति चाहता है, तो पाकिस्तान हमेशा तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
FAQs
प्रश्न: क्या भारत और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक बातचीत शुरू हो गई है?
उत्तर: नहीं। अभी तक दोनों सरकारों ने किसी आधिकारिक वार्ता की पुष्टि नहीं की है।
प्रश्न: ट्रैक वन प्वाइंट फाइव वार्ता क्या होती है?
उत्तर: इसमें मौजूदा सरकारी अधिकारियों के साथ पूर्व अधिकारी और विशेषज्ञ भी शामिल होते हैं।
प्रश्न: कोलंबो बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
उत्तर: आतंकवाद, जल बंटवारा, संकट के समय संवाद और भविष्य की बातचीत पर चर्चा हुई।
प्रश्न: क्या इससे दोनों देशों के रिश्ते सुधर सकते हैं?
उत्तर: विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल शुरुआती संपर्क है। भविष्य का फैसला दोनों सरकारों की राजनीतिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।

