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पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के साधारण घर को देख दुनिया हैरान

नौशाद अख्तर/ तेहरान

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद देश में एक सप्ताह का आधिकारिक शोक कार्यक्रम चल रहा है। इस समय ईरान की राजधानी तेहरान में दुनिया भर से आए लोगों और मीडिया के लिए सबसे बड़ा कौतूहल का विषय अली खामेनेई का पुराना आवास बना हुआ है। तेहरान पहुंचने वाले हर शख्स की यही ख्वाहिश है कि वह जल्द से जल्द उस साधारण से मकान को करीब से देखे जहां कई दशकों तक ईरान पर राज करने वाला और दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार को नियंत्रित करने वाला शक्तिशाली नेता रहा करता था। वहां पहुंचने वाले लोग इस पल को यादगार बनाने के लिए लगातार वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर परिसा नाम की एक यूजर ने इस पुराने आवास की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह ईरान के मशहद में सैयद अली खामेनेई का घर था। एक ऐसा शख्स जिसने दुनिया के सबसे ज्यादा तेल वाले देशों में से एक की दशकों तक सेवा की। उनका घर देखिए कितना साधारण था। क्या आज दुनिया में कोई ऐसा नेता है जो इतनी बड़ी ताकत होने के बाद भी इतनी सादगी से रहता हो।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल और महबूबा मुफ्ती ने किया दौरा

भारत से ईरान गए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल में शामिल जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी अली खामेनेई के इस बेहद छोटे और पुराने आवास को देखने पहुंचीं। उन्होंने अपनी इस यात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया है जो काफी चर्चा में है। उनके अलावा भारत से गए कई हिंदू संतों ने भी इस आवास का दौरा किया। एक गेरुआधारी संत ने वहां से अपना वीडियो साझा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया में ऐसा कोई दूसरा नेता नहीं है जो इतने सालों तक सर्वोच्च सत्ता में रहने के बाद भी ऐसी साधारण जिंदगी जीता हो।

ईरान में उमड़े अवाम के इस अपार जनसैलाब को देखकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बयान जारी करना पड़ा। ट्रंप ने कहा कि ईरान की सड़कों पर उमड़ी यह भीड़ देखकर यकीन करना मुश्किल है कि लोग खामेनेई को इतना ज्यादा पसंद करते थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने माना कि वे समझ रहे थे कि खामेनेई की मौत पर ईरानी जनता खुशियां मनाएगी लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

तेहरान की सड़कों पर न्याय और बदले की मांग

विदेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेहरान के जम्हूरी इलाके में स्थित खामेनेई के आवास के बाहर हर रात हजारों समर्थक जमा हो रहे हैं। ये लोग अपने उस नेता के लिए आंसू बहा रहे हैं जिसे वे अपने पिता से भी ज्यादा प्यार करते थे। इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में अली खामेनेई का निधन हो गया था। इस हमले के तीन महीने बाद भी उनके कट्टर समर्थक ईरान के इस्लामी शासन की रक्षा करने का संकल्प ले रहे हैं।

शहीद कशवरदूस्त स्ट्रीट पर आयोजित एक शोक सभा में शामिल तैंतीस वर्षीय ज़ैनब ने कहा कि खामेनेई हमारे पिता की तरह थे। हम उनके खून को बेकार नहीं जाने दे सकते और हम सिर्फ बदला चाहते हैं। ट्रंप हमारे लिए फैसला करने वाले कौन होते हैं। हम एक आजाद देश हैं और उन्हें पूरी दुनिया पर दादागिरी करने का कोई हक नहीं है। ज़ैनब ने आगे कहा कि अमेरिका और इजरायल ने हमला करके हमें और ज्यादा मजबूत बना दिया है। वे नहीं जानते कि उनका पाला किस देश से पड़ा है। उन्हें लगा था कि हमारे नेता को मारकर वे आजादी की आवाज दबा देंगे लेकिन इस शहादत ने इस क्रांति को वैश्विक बना दिया है।

सूने मंच पर रखी पोती की तस्वीर बढ़ा रही है गम

हर रात तेहरान के कोने-कोने से लोग इस परिसर में श्रद्धांजलि देने आते हैं। वहां बने एक मंच पर खामेनेई की एक खाली कुर्सी रखी गई है। उस कुर्सी के पास उनकी चौदह महीने की पोती जहरा की एक बड़ी तस्वीर लगी है। जहरा भी अपने दादा के साथ उसी हवाई हमले में मारी गई थी। मंच के सामने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं। लाउडस्पीकर से गूंजती प्रार्थनाओं के बीच लोग फूट-फूटकर रो रहे हैं।

वहां मौजूद बयालीस वर्षीय अली नाम के एक नागरिक ने बताया कि हमने केवल अपना नेता नहीं खोया है बल्कि हमने पूरे इस्लामी समाज के पिता को खो दिया है। उनका जाना हमारे लिए एक बहुत बड़ी त्रासदी है। यह अमेरिका और इजरायल द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा और क्रूर अपराध है।

खामेनेई की कूटनीतिक विरासत और आर्थिक चुनौतियां

आयतुल्ला अली खामेनेई एक बेहद गंभीर धार्मिक विद्वान और कुशल राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने साल उन्नीस सौ उन्यासी की इस्लामी क्रांति के दस साल बाद अपने गुरु आयतुल्ला रुहोल्लाह खमैनी के निधन के बाद सत्ता संभाली थी। लगभग सैंतीस वर्षों तक उन्होंने ईरान की कूटनीति और राजनीति को एक नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में ईरान ने चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की। उन्होंने देश के परमाणु कार्यक्रम को तेज किया और पूरे मध्य पूर्व में सैन्य सहयोगियों का एक मजबूत नेटवर्क खड़ा किया। यही वजह है कि वे अपनी जनता के लिए एक महानायक थे जबकि पश्चिमी देशों की नजरों में वे एक बड़े खलनायक बने रहे।

हालांकि उनके जीवन के अंतिम वर्षों में ईरान को भारी आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ा। देश में महंगाई दर लगभग सत्तर फीसदी तक पहुंच गई और स्थानीय मुद्रा के मूल्य में भारी गिरावट आई। साल दो हजार बाईस के सामाजिक आंदोलनों के बाद से देश के भीतर आंतरिक तनाव भी बढ़ा था। तेहरान के अर्थशास्त्री सईद लैलाज का मानना है कि इस राजनीतिक व्यवस्था में बड़े सुधारों की जरूरत है। लेकिन वे यह भी चेतावनी देते हैं कि यह बदलाव किसी बाहरी देश के हस्तक्षेप से नहीं होना चाहिए। अमेरिका और इजरायल द्वारा थोपे गए इस युद्ध के बाद पूरी ईरानी जनता अपनी सरकार के पीछे मजबूती से खड़ी हो गई है।

युवा पीढ़ी की बदलती सोच और देश का भविष्य

तेहरान के कुछ इलाकों में युवा पीढ़ी की सोच सरकार के दावों से अलग भी दिखाई देती है। शहर के आधुनिक कैफे और बाजारों में रहने वाले कुछ युवा देश की मौजूदा व्यवस्था से पूरी तरह खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आंतरिक पाबंदियों के कारण देश के व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इंटरनेट सेवाओं के बंद होने से कई नए स्टार्टअप और बिजनेस ठप हो गए हैं। इसी वजह से कई युवा डॉक्टर, इंजीनियर और कलाकार अब दूसरे देशों में पलायन करना चाहते हैं।

दक्षिणी तेहरान के कामकाजी इलाकों में आर्थिक तंगी का असर और भी गहरा है। आम लोगों का कहना है कि युद्ध शुरू होने से पहले ही जरूरी खाद्य वस्तुएं जैसे मांस और मछली उनकी थाली से गायब होने लगी थीं। अब हालात इतने मुश्किल हो गए हैं कि लोग सिर्फ दैनिक उपभोग के सामान ही खरीद पा रहे हैं।

ईरान के एक नए युग की शुरुआत की उम्मीद

इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। मोजतबा खामेनेई पूर्व नेता अली खामेनेई के बेटे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में उनके घायल होने का दावा किया गया था। लेकिन उनके लिखित बयान लगातार जारी हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई शांति समझौता होता है तो ईरान में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है। हालांकि देश की युवा पीढ़ी अभी भी अपने भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है लेकिन वे आने वाली नस्लों के लिए एक बेहतर समाज बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। ईरान समाचार और मुस्लिम समाचार के जानकार इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।