नाहन की जगन्नाथ रथयात्रा में मुस्लिम समुदाय ने दिया आपसी सौहार्द का संदेश
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, चंडीगढ़
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित नाहन शहर हाल ही में सांप्रदायिक सौहार्द का एक अनोखा गवाह बना। यहां उत्तर भारत के सबसे प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर से भव्य रथयात्रा निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में हर वर्ग और धर्म के लोगों ने हिस्सा लिया। मुस्लिम समाज के लोगों ने जगह-जगह रथयात्रा का स्वागत किया। उन्होंने श्रद्धालुओं पर फूल बरसाए और उनके लिए ठंडा पानी और प्रसाद बांटा।
कुछ समय पहले तक राज्य में मंदिर और मस्जिद को लेकर कई तरह की अफवाहें और तनाव देखने को मिल रहे थे। नाहन से सामने आई इन तस्वीरों ने उन तमाम आशंकाओं को दूर कर दिया है। यह साबित हो गया है कि जनता के दिलों में बसा आपसी प्रेम और भाईचारा किसी भी विवाद से बहुत बड़ा है।
नाहन जगन्नाथ रथयात्रा: सद्भाव का मुख्य मार्ग
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│ श्री जगन्नाथ मंदिर (बड़ा चौक) │
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│ ऐतिहासिक चौगान मैदान │
│ (भगवान जगन्नाथ रथ पर आरूढ़ हुए) │
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│ जामा मस्जिद व कच्चा टैंक मार्ग │
│ (मुस्लिम व सिख समाज द्वारा पुष्प वर्षा एवं स्वागत) │
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│ श्री रघुनाथ मंदिर │
│ (यात्रा का पड़ाव) │
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नाहन में जगन्नाथ रथयात्रा का इतिहास
नाहन शहर में जगन्नाथ मंदिर लगभग 350 साल से भी अधिक पुराना है। रियासत काल से ही यहां पर भगवान जगन्नाथ की पूजा की परंपरा रही है। पहले यह आयोजन छोटे स्तर पर होता था। वर्ष 2009 से स्थानीय युवाओं ने इसे पुरी की तर्ज पर बड़े पैमाने पर आयोजित करना शुरू किया।
हर साल आषाढ़ महीने में यह रथयात्रा निकाली जाती है। बड़ा चौक स्थित मंदिर से भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र के विग्रहों को पालकी में लाया जाता है। चौगान मैदान में इन विग्रहों को विशाल रथ पर विराजमान किया जाता है। इसके बाद हजारों भक्त रथ की रस्सी खींचकर पुण्य कमाते हैं।
| प्रमुख तथ्य | विवरण |
| आयोजन का स्थान | नाहन, सिरमौर (हिमाचल प्रदेश) |
| मंदिर की प्राचीनता | 350 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा |
| वार्षिक आयोजन स्वरूप | वर्ष 2009 से वृहद स्तर पर आयोजन जारी |
| विशेषता | हिंदू, मुस्लिम और सिख समाज की साझी सहभागिता |
मुस्लिम समाज की ऐतिहासिक पहल
जब भगवान जगन्नाथ का रथ नाहन की सड़कों से गुजर रहा था, तब कच्चा टैंक और जामा मस्जिद के पास एक अलग ही नजारा था। मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने रथयात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया।
मुस्लिम समुदाय के युवकों ने श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी, शरबत और ताजे फलों के स्टॉल लगाए। उन्होंने रथ पर विराजमान भगवान के दर्शन किए और फूल बरसाए। कई स्थानों पर मुस्लिम युवाओं ने हिंदू भाइयों के साथ मिलकर रथ की रस्सी भी खींची। उन्होंने जय जगन्नाथ के नारे लगाए और सौहार्द का संदेश दिया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नाहन में यह परंपरा नई नहीं है। रियासत काल से ही यहां सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के पर्वों में शामिल होते रहे हैं। ईद हो या दिवाली या फिर रथयात्रा, शहर के निवासी हमेशा साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं।
इस्लाम और सभी धर्मों का सम्मान
इस्लाम धर्म की मूल शिक्षाओं में भी अन्य धर्मों और उनके अनुयायियों के प्रति सम्मान का भाव सिखाया जाता है। पवित्र कुरान में स्पष्ट निर्देश है कि जो लोग आपके साथ धर्म के आधार पर युद्ध नहीं करते, उनके साथ न्याय और भलाई का व्यवहार किया जाना चाहिए।
पवित्र ग्रन्थ की सूरह अल मुमतहिना (60:8) में लिखा गया है कि अल्लाह तुम्हें उन लोगों के साथ उपकार और न्याय करने से नहीं रोकता जो तुमसे धर्म के मामले में नहीं लड़े। नाहन के मुस्लिम समाज ने इसी भावना का परिचय दिया है। उनका कहना है कि अपने धर्म का पालन करते हुए दूसरों के आस्था स्थलों और त्योहारों का आदर करना ही सच्चा मानवीय धर्म है।
सोशल मीडिया पर मिला व्यापक समर्थन
नाहन की इस रथयात्रा के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से साझा की जा रही हैं। इंटरनेट पर लोग इस पहल की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।
देशभर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे भारतीय संस्कृति की असली ताकत बताया है। अनेक लोगों का मानना है कि इस तरह के आयोजन से समाज में कटुता खत्म होती है। जब आम लोग एक-दूसरे के खुशियों के पलों में सहभागी बनते हैं, तो नफरत फैलाने वाले तत्वों के मंसूबे अपने आप नाकाम हो जाते हैं।
धार्मिक सौहार्द से ही मजबूत होगा देश
आज के समय में जब कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर तनाव पैदा हो जाता है, तब नाहन जैसी मिसालें रोशनी की किरण की तरह काम करती हैं। इस आयोजन ने यह साबित किया है कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब की जड़ें बहुत गहरी हैं।
हिमाचल प्रदेश का नाहन शहर आज पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है। यहां के लोगों ने यह दिखा दिया है कि अलग-अलग मान्यताओं के बावजूद हम सब एक ही समाज का हिस्सा हैं। अगर सभी क्षेत्रों में इसी तरह की समझदारी और सम्मान का भाव कायम रहे, तो देश में शांति और उन्नति का माहौल हमेशा बना रहेगा।
भगवान जगन्नाथ और मुस्लिम समाज से जुड़े ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक प्रसंगों की अधिक जानकारी के लिए यह वीडियो देखें: एक मुसलमान जिसके लिए हर बार क्यों रुकती है जगन्नाथ रथयात्रा?
यह वीडियो जगन्नाथ परंपरा में गैर-हिंदू एवं मुस्लिम भक्तों के ऐतिहासिक जुड़ाव तथा आस्था से जुड़ी कथाओं को विस्तार से समझाता है, जो लेख में वर्णित धार्मिक सौहार्द के विषय को गहराई प्रदान करता है।

