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ईरान पर बदले ट्रंप के सुर, बोले समझौते की राह में तेजी

न्यूयॉर्क।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ बैठक में कहा कि ईरान के साथ समझौते की दिशा में “काफी momentum” है। इससे पहले अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने ईरानी प्रतिनिधियों के साथ करीब तीन घंटे बातचीत की थी। ट्रंप ने बैठक को सकारात्मक बताया, हालांकि किसी समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

ट्रंप ने यह बात ऐसे समय कही है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के साथ साथ बातचीत की कोशिश भी चल रही है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कूटनीतिक संपर्क बढ़े हैं। कतर और दूसरे क्षेत्रीय देश दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी न्यूयॉर्क में अमेरिकी पक्ष से बातचीत के संपर्क में रहे।

ट्रंप की बैठक में सऊदी अरब, कतर, जॉर्डन, तुर्किये और सीरिया के शीर्ष प्रतिनिधि मौजूद थे। मिस्र के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। अमेरिकी विदेश मंत्री और वित्त मंत्री भी वहां मौजूद रहे। इस बैठक का मुख्य विषय पश्चिम एशिया की सुरक्षा और ईरान के साथ जारी टकराव को लेकर आगे का रास्ता था। बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के ये सहयोगी एक सुरक्षित और समृद्ध मध्य पूर्व के लिए काम कर रहे हैं।

ईरान के साथ बातचीत में क्या हुआ

ट्रंप के अनुसार, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने मंगलवार को ईरानी पक्ष से बातचीत की। ट्रंप ने कहा कि दोनों अमेरिकी प्रतिनिधियों का ईरान में सम्मान है और यह बातचीत के लिए महत्वपूर्ण बात है। उन्होंने दावा किया कि समझौते की दिशा में काफी गति दिखाई दे रही है।

अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच यह संपर्क इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष कूटनीतिक बातचीत लंबे समय से बेहद सीमित रही है। न्यूयॉर्क में हुई बैठक को हाल के महीनों में तनाव कम करने की कोशिशों के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों की शर्तों में अभी अंतर बना हुआ है।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अब्बास अराघची ने अमेरिकी पक्ष के सामने ईरान की कुछ शर्तें रखीं। इनमें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़ी स्थिति, अमेरिकी सैन्य दबाव कम करना और ईरान की जब्त संपत्तियों से संबंधित मुद्दे शामिल हैं। ईरानी पक्ष ने यह संकेत भी दिया है कि हॉर्मुज से जुड़ा मुद्दा किसी संभावित समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हॉर्मुज बना बातचीत का अहम मुद्दा

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदुओं में से एक बन गया है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालिया संघर्ष के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मध्यस्थों के जरिए संकेत दिया है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और कुछ प्रतिबंधों में राहत देता है तो हॉर्मुज को दोबारा खोलने पर बातचीत हो सकती है। ईरानी पक्ष ने कथित तौर पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और जब्त संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें भी रखी हैं। इन प्रस्तावों की अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

कतर भी अमेरिका और ईरान के बीच संवाद का रास्ता बनाने में सक्रिय है। कतर ने पाकिस्तान के साथ मिलकर बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिशों का संकेत दिया है। सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये भी तनाव कम करने और बातचीत के समर्थन में अपनी स्थिति जाहिर कर चुके हैं। इससे साफ है कि ईरान अमेरिका विवाद केवल दोनों देशों का मामला नहीं रह गया है। इसका असर पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।

ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर क्या कहा

क्षेत्रीय नेताओं के साथ बैठक में ट्रंप ने ईरान की आर्थिक स्थिति को बेहद खराब बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट आर्थिक प्रतिबंधों और वित्तीय दबाव की नीति को आगे बढ़ा रहे हैं।

ट्रंप ने ईरान की महंगाई को लेकर 300 प्रतिशत से अधिक का दावा भी किया। हालांकि, यह राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है और इसे स्वतंत्र आर्थिक आंकड़े के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही प्रतिबंधों, मुद्रा संकट और क्षेत्रीय संघर्ष के दबाव में रही है। मौजूदा युद्ध ने इन आर्थिक चुनौतियों को और जटिल बनाया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को वित्तीय रूप से अलग करने की नीति का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि अमेरिका का उद्देश्य तेहरान पर ऐसा दबाव बनाना है जिससे वह जल्द समझौते के लिए तैयार हो। ट्रंप ने यह भी कहा कि एक समय ऐसा आ सकता है जब समझौते का विकल्प उपलब्ध न रहे।

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र

ट्रंप ने बातचीत के साथ अमेरिकी सैन्य अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान ईरान की नौसेना और वायु क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने ईरान के हथियार कारखानों और मिसाइल तथा ड्रोन भंडारण ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात कही।

ट्रंप ने ईरान की वायु रक्षा प्रणाली को लगभग पूरी तरह नष्ट करने का दावा भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियान ने ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग अलग स्तर पर आवश्यक है। इसलिए इन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भी अमेरिकी नीति का प्रमुख मुद्दा बताया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ईरान को लेकर सैन्य कार्रवाई की संभावना की चेतावनी दी थी और कहा था कि अमेरिका परमाणु हथियार हासिल करने की ईरानी कोशिश को स्वीकार नहीं करेगा।

बातचीत और धमकी साथ साथ

ईरान अमेरिका संबंधों में इस समय सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कूटनीतिक बातचीत और सैन्य चेतावनी दोनों एक साथ चल रही हैं। मंगलवार को अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों की बातचीत हुई। ट्रंप ने इसे सकारात्मक बताया। लेकिन उसी दिन उन्होंने ईरान पर अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई की संभावना भी जताई।

ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि उनके सामने ईरान को लेकर बड़ा फैसला है। उन्होंने समझौते और सैन्य कार्रवाई के बीच विकल्प की बात की। बाद में क्षेत्रीय नेताओं के साथ बैठक में भी उन्होंने कहा कि समझौता जल्द हो सकता है।

ईरान की तरफ से भी सैन्य चेतावनियां जारी हैं। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि बातचीत को दबाव में स्वीकार नहीं किया जाएगा। तेहरान हॉर्मुज को अपने रणनीतिक विकल्पों में शामिल कर रहा है। इस वजह से संभावित समझौते की राह आसान नहीं दिखाई देती।

भारत के लिए हॉर्मुज और ऊर्जा मार्ग क्यों अहम

अमेरिकी राष्ट्रपति ने बैठक में भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारे यानी IMEC का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की ऊर्जा व्यवस्था को ऐसे मार्गों की ओर ले जाने की जरूरत है जो किसी एक समुद्री मार्ग पर निर्भर न हों। हॉर्मुज संकट का सीधा संबंध तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति से है।

भारत के लिए यह मुद्दा विशेष महत्व रखता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। पश्चिम एशिया भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता क्षेत्रों में शामिल है। इसलिए हॉर्मुज में लंबे समय तक अस्थिरता रहने पर तेल की कीमत, समुद्री परिवहन और बीमा लागत पर असर पड़ सकता है। मौजूदा तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी उतार चढ़ाव देखा गया है।

क्या अमेरिका और ईरान में समझौता होगा

फिलहाल इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत में गति आने की बात कही है। अमेरिकी प्रतिनिधियों और ईरानी पक्ष के बीच संपर्क भी हुआ है। क्षेत्रीय देश मध्यस्थता कर रहे हैं। लेकिन परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, हॉर्मुज, सैन्य दबाव और युद्ध की स्थिति जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं।

न्यूयॉर्क में हुई बैठक से इतना जरूर स्पष्ट है कि युद्ध के बीच कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। ट्रंप ने समझौते की संभावना पर सकारात्मक टिप्पणी की है। ईरान ने भी मध्यस्थों के माध्यम से कुछ शर्तों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखा है। लेकिन किसी औपचारिक समझौते के लिए आगे की बातचीत निर्णायक होगी।

फिलहाल न्यूयॉर्क से निकलने वाला सबसे बड़ा संदेश यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के बीच बातचीत की कोशिश फिर सक्रिय हुई है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, ईरान का परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा इस बातचीत के केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मंगलवार की कूटनीतिक गतिविधि वास्तव में किसी समझौते की ओर बढ़ती है या फिर सैन्य और आर्थिक दबाव के बीच एक और बातचीत तक सीमित रह जाती है।

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