जामिया के ओसामा नूर को मिली शेवनिंग स्कॉलरशिप
Table of Contents
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के लॉ फैकल्टी के पूर्व छात्र ओसामा नूर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक नई शैक्षणिक यात्रा शुरू की है। 2023 बैच के नूर को यूके सरकार की प्रतिष्ठित शेवनिंग स्कॉलरशिप मिली है। इसके बाद उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस यानी LSE में मास्टर ऑफ लॉज़, LL.M. की पढ़ाई शुरू कर दी है।
ओसामा नूर की यह उपलब्धि जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लॉ फैकल्टी के लिए भी खास मानी जा रही है। फैकल्टी के मुताबिक, नूर वहां से शेवनिंग स्कॉलरशिप हासिल करने वाले चौथे छात्र हैं। उनसे पहले इदरीस मुहम्मद, नबीला जमील और आफरीन काजी को यह प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति मिल चुकी है। खास बात यह है कि लगातार तीन वर्षों में यह तीसरा छात्र है, जिसे लॉ फैकल्टी से शेवनिंग स्कॉलरशिप मिली है।

जामिया से LSE तक पहुंची पढ़ाई की यात्रा
ओसामा नूर की शैक्षणिक यात्रा जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लॉ फैकल्टी से शुरू होकर अब लंदन तक पहुंची है। 2023 बैच से जुड़े नूर ने कानून की पढ़ाई के दौरान अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीरता बनाए रखी। फैकल्टी के डीन प्रोफेसर डॉ. गुलाम यज़दानी ने भी उनसे मुलाकात के दौरान उनके छात्र जीवन की अच्छी अटेंडेंस और पढ़ाई के प्रति समर्पण को याद किया।
LSE में दाखिला लेने से पहले नूर ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में दो वर्षों तक लॉ क्लर्क सह रिसर्च एसोसिएट के रूप में काम किया। सुप्रीम कोर्ट का यह अनुभव उनकी पेशेवर यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। अब लंदन में LL.M. की पढ़ाई के दौरान उन्हें कानून और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय अकादमिक विमर्श को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
शेवनिंग स्कॉलरशिप भी इसी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह यूके सरकार का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति कार्यक्रम है। इसके तहत दुनिया के विभिन्न देशों से चुने गए छात्रों और उभरते नेताओं को यूनाइटेड किंगडम में पोस्टग्रेजुएट शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलता है। नूर का चयन इसी कार्यक्रम के तहत हुआ है।
लंदन जाने से पहले जामिया लौटे नूर
LSE के लिए रवाना होने से पहले ओसामा नूर जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लॉ फैकल्टी पहुंचे। यहां उन्होंने फैकल्टी के डीन प्रोफेसर डॉ. गुलाम यज़दानी से मुलाकात की।
इस मुलाकात के दौरान प्रोफेसर यज़दानी ने उन्हें शेवनिंग स्कॉलरशिप मिलने पर बधाई दी। उन्होंने नूर की मेहनत और लगन की सराहना की। साथ ही जामिया में उनके छात्र जीवन को भी याद किया।
नूर के लिए भी यह मुलाकात केवल औपचारिक मुलाकात नहीं थी। जामिया में बिताए समय और शिक्षकों के सहयोग को उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा का अहम हिस्सा बताया।
नूर ने कहा कि जामिया ने उन्हें ऐसा सुरक्षित माहौल दिया, जहां वह पढ़ाई कर सके, आगे बढ़ सके और अपने लिए रास्ता चुन सके। उन्होंने लॉ फैकल्टी और उन शिक्षकों के प्रति आभार जताया, जिन्होंने उनके छात्र जीवन में उनका साथ दिया।
उन्होंने कहा कि LSE में अपने नए अध्याय की शुरुआत से पहले फैकल्टी में वापस आना उनके लिए खास मायने रखता है।
जामिया की लॉ फैकल्टी के लिए लगातार उपलब्धि
ओसामा नूर की शेवनिंग स्कॉलरशिप को जामिया की लॉ फैकल्टी की शैक्षणिक उपलब्धियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। फैकल्टी के अनुसार, नूर इस प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति को पाने वाले चौथे शेवनिंग स्कॉलर हैं।
उनसे पहले इदरीस मुहम्मद, नबीला जमील और आफरीन काजी इस छात्रवृत्ति के लिए चुने जा चुके हैं। लगातार तीन वर्षों में तीसरे छात्र का शेवनिंग स्कॉलर बनना फैकल्टी के लिए विशेष उपलब्धि के तौर पर बताया गया है।
प्रोफेसर गुलाम यज़दानी ने कहा कि फैकल्टी को अपने ग्रेजुएट्स को दुनिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में उच्च शिक्षा हासिल करते देखकर गर्व होता है। उनके मुताबिक, इस तरह की उपलब्धियां जामिया के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में आगे की पढ़ाई के लिए प्रेरित करती हैं।

वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार के सहयोग का उल्लेख
इस अवसर पर प्रोफेसर यज़दानी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वाइस चांसलर प्रोफेसर मज़हर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी के सहयोग और नेतृत्व का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच शैक्षणिक उत्कृष्टता और वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने की आकांक्षा को प्रोत्साहित करने वाला माहौल बनाने में संस्थान का सहयोग महत्वपूर्ण है।
लॉ फैकल्टी का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्तियों के लिए छात्रों का चयन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। इससे संस्थान के शैक्षणिक वातावरण और छात्रों की वैश्विक शिक्षा के प्रति बढ़ती रुचि भी सामने आती है।
युवा वकीलों के लिए नया रास्ता
ओसामा नूर की कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू उनकी शिक्षा के साथ पेशेवर अनुभव भी है। जामिया से कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सीधे आगे की उच्च शिक्षा का रास्ता नहीं चुना। पहले उन्होंने भारत के सुप्रीम कोर्ट में दो साल तक काम किया। इसके बाद LSE में LL.M. की पढ़ाई का अवसर मिला।
कानून के छात्रों के लिए यह यात्रा एक खास उदाहरण पेश करती है। भारतीय विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई, सुप्रीम कोर्ट में पेशेवर अनुभव और फिर अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा। यह क्रम युवा कानून छात्रों के लिए आगे की संभावनाओं को समझने का एक रास्ता भी दिखाता है।
जामिया लॉ फैकल्टी के लिए भी यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शेवनिंग स्कॉलरशिप पाने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे छात्रों के बीच अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा को लेकर रुचि का संकेत मिलता है।
अब LSE में नया अध्याय
ओसामा नूर के लिए अब लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में LL.M. का नया अध्याय शुरू हो चुका है। जामिया की लॉ फैकल्टी से लेकर भारत के सुप्रीम कोर्ट और फिर LSE तक पहुंची उनकी यात्रा शिक्षा और कानून के क्षेत्र में उनके अनुभवों को एक नया विस्तार देती है।
उनकी उपलब्धि के साथ जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लॉ फैकल्टी के शेवनिंग स्कॉलर्स की सूची भी लंबी हुई है। फैकल्टी के लिए लगातार तीन वर्षों में तीसरे शेवनिंग स्कॉलर का सामने आना एक उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि है।
ओसामा नूर के लिए यह केवल एक छात्रवृत्ति नहीं है। यह उनके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून शिक्षा की नई शुरुआत है। जामिया में मिली शिक्षा, सुप्रीम कोर्ट का अनुभव और अब LSE में LL.M. की पढ़ाई उनकी आगे की पेशेवर यात्रा का अगला चरण है।

