अरब देश मोरक्को को मिली पहली महिला प्रधानमंत्री, कौन हैं फातिमा मंसूरी
Table of Contents
नौशाद अख्तर, नई दिल्ली
अरब दुनिया की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ा है। मोरक्को ने पहली बार किसी महिला को सरकार की कमान सौंपी है। राजा मोहम्मद षष्ठम ने 29 सितंबर 2026 को फातिमा जहरा अल मंसूरी को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। उन्हें नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी भी दी गई है। मोरक्को के शाही महल ने नियुक्ति की पुष्टि की है।
फातिमा मंसूरी की नियुक्ति केवल मोरक्को के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। वह अरब दुनिया में प्रधानमंत्री बनने वाली दूसरी महिला हैं। उनसे पहले ट्यूनीशिया की नजला बौदेन ने 2021 से 2023 तक प्रधानमंत्री पद संभाला था। इस लिहाज से मंसूरी की राजनीतिक यात्रा अरब देशों में महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी की एक अहम मिसाल के रूप में देखी जा रही है।
लेकिन इस नियुक्ति के पीछे सिर्फ एक ऐतिहासिक उपलब्धि की कहानी नहीं है। इसके साथ मोरक्को की चुनावी राजनीति, गठबंधन सरकार, युवाओं की नाराजगी, रोजगार, महंगाई और 2030 फुटबॉल विश्व कप की तैयारियों जैसी कई बड़ी चुनौतियां भी जुड़ी हैं।

चुनाव के बाद मंसूरी को मिली जिम्मेदारी
मोरक्को में 23 सितंबर को संसदीय चुनाव हुए थे। 395 सदस्यों वाले प्रतिनिधि सभा में फातिमा मंसूरी की पार्टी ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्निटी पार्टी यानी PAM सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। उसे 97 सीटें मिलीं। नेशनल रैली ऑफ इंडिपेंडेंट्स को 66 और इस्तिकलाल पार्टी को 65 सीटें मिलीं। जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी ने 54 सीटें हासिल कीं। आधिकारिक चुनावी आंकड़ों में भी यही सीट वितरण दर्ज है।
मगर PAM को बहुमत नहीं मिला है। बहुमत के लिए 198 सीटों की जरूरत है। पार्टी के पास इसके आधे से भी कम सीटें हैं। इसलिए फातिमा मंसूरी के सामने सबसे पहली चुनौती नई सरकार के लिए गठबंधन तैयार करने की है।
यानी प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका पहला राजनीतिक इम्तिहान सरकार चलाना नहीं बल्कि सरकार बनाना है।
PAM ने दूसरी पार्टियों के साथ काम करने की इच्छा जताई है। हालांकि कुछ दलों ने विपक्ष में रहने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में गठबंधन को लेकर बातचीत मोरक्को की राजनीति का सबसे अहम मुद्दा बनी रहेगी।
कौन हैं फातिमा जहरा मंसूरी
फातिमा जहरा मंसूरी का जन्म 1976 में माराकेश में हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की। फ्रांस की यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्टपेलियर से उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से एंग्लो सैक्सन बिजनेस लॉ से जुड़ी पढ़ाई भी की।
उनकी राजनीतिक यात्रा स्थानीय शासन से शुरू हुई। 2009 में वह माराकेश की मेयर चुनी गईं। इस पद पर पहुंचने वाली वह पहली महिला थीं। बाद में 2021 के चुनावों के बाद उन्होंने फिर माराकेश नगरपालिका का नेतृत्व संभाला। वह संसद की सदस्य भी रह चुकी हैं।
राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका अक्टूबर 2021 में और मजबूत हुई। उन्हें राष्ट्रीय क्षेत्रीय नियोजन, शहरी विकास, आवास और शहरी नीति से जुड़ा मंत्रालय मिला। इस जिम्मेदारी के दौरान आवास सहायता कार्यक्रम, शहरी नियोजन और भूकंप प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे मुद्दे उनके मंत्रालय के महत्वपूर्ण कामों में रहे।
PAM की स्थापना 2008 में हुई थी। मंसूरी पार्टी की सामूहिक नेतृत्व व्यवस्था की राष्ट्रीय समन्वयक भी रही हैं। 2024 में वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में शामिल हुईं।
इस तरह स्थानीय राजनीति से शुरू हुई उनकी यात्रा अब मोरक्को की राष्ट्रीय सरकार के शीर्ष पद तक पहुंच गई है।

मोरक्को की राजनीति में महिलाओं की नई तस्वीर
मंसूरी की नियुक्ति को समझने के लिए मोरक्को की राजनीति में महिलाओं की भूमिका को देखना भी जरूरी है।
वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले वह माराकेश की पहली महिला मेयर बनी थीं। अब स्थानीय प्रशासन से लेकर राष्ट्रीय सरकार तक उनकी राजनीतिक यात्रा एक लंबे अनुभव को दिखाती है।
मंसूरी ने अपनी नियुक्ति के बाद इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार मोरक्को में कोई महिला सरकार का नेतृत्व कर रही है और यह केवल उनके लिए नहीं बल्कि सभी मोरक्कन महिलाओं के लिए गर्व की बात है।
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब अरब देशों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है। ट्यूनीशिया की नजला बौदेन के बाद मंसूरी का प्रधानमंत्री बनना इस क्षेत्र में महिला नेतृत्व का दूसरा प्रमुख उदाहरण है।
सामने हैं आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां
नई सरकार को कई आर्थिक और सामाजिक सवालों का सामना करना होगा। रोजगार, महंगाई, वेतन, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा जनता की प्रमुख चिंताओं में हैं।
चुनाव में PAM ने एक करोड़ नौकरियां पैदा करने और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सामाजिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने जैसे वादे किए थे। अब इन वादों को नीतियों में बदलने की जिम्मेदारी नई सरकार पर होगी।
चुनाव में मतदान प्रतिशत भी चर्चा का विषय रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मतदान लगभग 38 प्रतिशत रहा। मोरक्को की राजनीति में कम मतदान को राजनीतिक भागीदारी और जनता के भरोसे से जुड़े सवालों के संदर्भ में रिपोर्ट किया गया है।
युवाओं की अपेक्षाएं भी नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती हैं। रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े सवाल पहले से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में मंसूरी सरकार के लिए आर्थिक विकास के साथ सामाजिक अपेक्षाओं को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा।

2030 विश्व कप की बड़ी जिम्मेदारी
मोरक्को 2030 फीफा विश्व कप की मेजबानी स्पेन और पुर्तगाल के साथ करेगा। इसके लिए देश में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे से जुड़े काम चल रहे हैं। नई सरकार इन परियोजनाओं के अगले चरणों की निगरानी करेगी।
विश्व कप से जुड़े निवेश का आकार भी काफी बड़ा है। रॉयटर्स ने इसे करीब 20 अरब डॉलर की तैयारियों से जोड़ा है। स्टेडियम, परिवहन, आवास और दूसरे बुनियादी ढांचे पर खर्च आने वाले वर्षों में सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं को प्रभावित करेगा।
इसलिए फातिमा मंसूरी के सामने एक साथ दो तरह की जिम्मेदारियां हैं। एक तरफ उन्हें सरकार के लिए स्थिर गठबंधन तैयार करना होगा। दूसरी तरफ बड़े आर्थिक और बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना होगा।
मोरक्को की संवैधानिक व्यवस्था भी समझना जरूरी
मंसूरी की नियुक्ति मोरक्को की संवैधानिक व्यवस्था से भी जुड़ी है। 2011 के संवैधानिक बदलावों के बाद राजा को प्रधानमंत्री के लिए उस पार्टी से व्यक्ति चुनना होता है जो संसदीय चुनाव में सबसे अधिक सीटें हासिल करती है।
इस बार PAM सबसे बड़ी पार्टी बनी। इसलिए राजा मोहम्मद षष्ठम ने उसकी सामूहिक नेतृत्व व्यवस्था की समन्वयक फातिमा मंसूरी को सरकार बनाने की जिम्मेदारी दी।
हालांकि मोरक्को की राजनीतिक व्यवस्था में राजा की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। रक्षा और विदेश नीति जैसे क्षेत्रों में राजशाही के पास व्यापक अधिकार हैं। प्रधानमंत्री सरकार के कामकाज और घरेलू नीतियों में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
पुरानी राजनीतिक पहचान से नई जिम्मेदारी तक
फातिमा मंसूरी की राजनीतिक पहचान केवल प्रधानमंत्री पद से नहीं बनी है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन में काम किया। संसद में रहीं। राष्ट्रीय सरकार में मंत्री बनीं। PAM के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका अनुभव अब राष्ट्रीय सरकार की परीक्षा से गुजरेगा।
उनके निजी और राजनीतिक जीवन को लेकर कुछ विवाद भी सामने आए हैं। स्रोतों के अनुसार कुछ अज्ञात हैकरों ने माराकेश में जमीन से जुड़े लेनदेन को लेकर उन पर हितों के टकराव के आरोप लगाए थे। मंसूरी ने इन आरोपों को मानहानिकारक बताया और कानूनी कार्रवाई की। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि स्रोतों में नहीं है। इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
🚨🇲🇦 Morocco Makes History
— Kirikaar (@Kirikaar77) September 29, 2026
👩🇲🇦 Fatima Ezzahra El Mansouri has been appointed Morocco’s first-ever woman Prime Minister, after King Mohammed VI tasked her with forming a new government. She is also only the second woman to lead a government in the Arab world, after Tunisia’s…
इतिहास के साथ चुनौती भी बड़ी
फातिमा जहरा मंसूरी का प्रधानमंत्री बनना मोरक्को के राजनीतिक इतिहास में निश्चित रूप से एक नया अध्याय है। लेकिन पद की ऐतिहासिकता के साथ जिम्मेदारियां भी बड़ी हैं।
उन्हें ऐसी संसद के बीच सरकार बनानी है जहां किसी एक दल के पास बहुमत नहीं है। उन्हें गठबंधन तैयार करना है। बेरोजगारी और महंगाई से जुड़े सवालों पर काम करना है। युवाओं की अपेक्षाओं को संबोधित करना है। सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के वादों को आगे बढ़ाना है। साथ ही 2030 विश्व कप से जुड़ी विशाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भी गति देनी है।
मंसूरी की कहानी इसलिए केवल मोरक्को की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने की कहानी नहीं है। यह स्थानीय राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंची एक महिला राजनेता की कहानी भी है। आने वाले दिनों में असली तस्वीर इस बात से बनेगी कि वह गठबंधन कैसे तैयार करती हैं और सरकार अपनी प्राथमिकताओं को किस तरह जमीन पर उतारती है।

