मौलाना आजाद की पत्रकारिता की विरासत को आगे बढ़ाएं: प्रोफेसर सैयद ऐनुल हसन
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विशेष संवाददाता, हैदराबाद
मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (मानू) के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में नए संसाधनों का विस्तार हुआ है। परिसर में एक अत्याधुनिक रेडियो पॉडकास्ट स्टूडियो और ‘प्रोफेसर सैयद ऐनुल हसन मीडिया आर्काइवल डिस्प्ले यूनिट’ का औपचारिक उद्घाटन किया गया। पॉडकास्ट स्टूडियो का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सैयद ऐनुल हसन ने किया। वहीं, मीडिया आर्काइवल डिस्प्ले यूनिट का उद्घाटन कुलसचिव (रजिस्ट्रार) प्रोफेसर एसके इश्तियाक अहमद ने किया।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रोफेसर ऐनुल हसन ने छात्रों को संबोधित करते हुए पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया में काम करने वाले हर व्यक्ति को यह स्पष्ट होना चाहिए कि उसकी बात का दर्शक, श्रोता या पाठक कौन है। समाज की जरूरतों को समझे बिना कोई भी संदेश प्रभावी नहीं हो सकता।
मौलाना आजाद के पत्रकारिता मूल्यों की प्रासंगिकता
कुलपति ने भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि मौलाना आजाद ने अपने दौर में ‘अल-हिलाल’ और ‘अल-बलाग’ जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से जन जागरूकता फैलाने का काम किया। उन्होंने तत्कालीन समाज की जरूरतों को समझा और अपनी बात को निडरता से जनता तक पहुंचाया।
पत्रकारिता के छात्रों को मौलाना आजाद के जीवन और उनकी पत्रकारिता की विरासत से सीख लेनी चाहिए। आज के दौर में मीडियाकर्मियों के लिए यह जरूरी है कि वे आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दें।
भाषा और उच्चारण के महत्व पर बात करते हुए कुलपति ने कहा कि प्रसारण में आवाज, लहजे और स्क्रीन की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। छात्रों को ऐसी सरल भाषा का प्रयोग करना चाहिए जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक आसानी से पहुंच सके। सही कौशल और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ ही मीडिया के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई जा सकती है।
मीडिया इतिहास के संरक्षण की आवश्यकता
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर एसके इश्तियाक अहमद ने मीडिया आर्काइवल डिस्प्ले यूनिट के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संचार माध्यमों के इतिहास और उसमें समय-समय पर आए बदलावों को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। यह संग्रह आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद करेगा कि मीडिया ने अलग-अलग दौर में किन-किन चुनौतियों का सामना किया है।
प्रोफेसर इश्तियाक ने विभाग में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत और बुनियादी सुविधाओं के विकास की सराहना की। उन्होंने कहा कि फिल्म मेकिंग जैसे व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) विषयों के लिए बेहतर ढांचागत सुविधाएं प्रदान करना जरूरी है। इसके लिए विभाग द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं। उन्होंने विभाग को अन्य प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के साथ तालमेल बढ़ाने का सुझाव दिया, ताकि छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
नए पाठ्यक्रम और विभाग की भावी योजनाएं
जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के डीन प्रोफेसर एहतशाम अहमद खान ने नए शैक्षणिक पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र से ‘एमए इन फिल्म मेकिंग’ पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।
इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उच्च स्तरीय शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। इसके माध्यम से छात्र फिल्म निर्माण की तकनीकी बारीकियों को सीखने के साथ अपनी रचनात्मक क्षमता को निखार सकेंगे। प्रोफेसर खान ने उम्मीद जताई कि यह नया कोर्स छात्रों को फिल्म उद्योग में पेशेवर भविष्य बनाने में मददगार साबित होगा।
कार्यक्रम में गणमान्य हस्तियों की मौजूदगी
उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, संकाय सदस्य और छात्र बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इनमें एमएमटीटीसी की निदेशक प्रोफेसर सनम फातिमा, आईएमसी के निदेशक रिजवान अहमद खान, सोशल वर्क विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एमडी शाहिद रजा सहित विभाग के अन्य शिक्षक, शोधार्थी और छात्र शामिल थे।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने नए पॉडकास्ट स्टूडियो और आर्काइवल यूनिट का अवलोकन किया और इसे उर्दू पत्रकारिता तथा जनसंचार के शिक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

