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डॉ. फातिमा अल-ज़ग़ूल की आलोचनात्मक पुस्तकों में सना अल-शअलान की कहानी और उपन्यास कला

मिस्र/जॉर्डन

जॉर्डन की साहित्यिक आलोचक डॉ. फातिमा अल-ज़ग़ूल ने अपनी हालिया आलोचनात्मक पुस्तकों में जॉर्डन की प्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. सना अल-शअलान (बिंत नईमा) के उपन्यासों और कहानी-साहित्य का अध्ययन किया है। उनके आलोचनात्मक लेखन में सना अल-शअलान की रचनाओं के विभिन्न साहित्यिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है।

डॉ. फातिमा अल-ज़ग़ूल ने सना अल-शअलान के उपन्यास ‘अदरिकहा अल-निस्यान’ यानी ‘विस्मृति ने उसे आ घेरा’ में भय की अवधारणा का अध्ययन किया है। इस विषय पर उन्होंने अपनी वर्ष 2026 में प्रकाशित आलोचनात्मक पुस्तक ‘जॉर्डन के उपन्यास में भय : एक मनोवैज्ञानिक आलोचनात्मक अध्ययन’ में एक पूरा अध्याय समर्पित किया है।

इस अध्याय का शीर्षक है, ‘सना अल-शअलान के उपन्यासों में विपरीत लिंग के प्रति भय : उपन्यास अदरिकहा अल-निस्यान में विपरीत लिंग के प्रति भय के विभिन्न रूप।’

उल्लेखनीय है कि पुस्तक ‘जॉर्डन के उपन्यास में भय : एक मनोवैज्ञानिक आलोचनात्मक अध्ययन’ का पहला संस्करण जॉर्डन के प्रकाशन संस्थान दार अल-बैरूनी पब्लिशिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन ने प्रकाशित किया है।

दूसरी ओर, डॉ. फातिमा अल-ज़ग़ूल ने सना अल-शअलान के कहानी-संग्रह ‘तक़ासिम अल-फ़िलस्तीनी’ का भी आलोचनात्मक अध्ययन किया है। इस अध्ययन को उन्होंने वर्ष 2026 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘आधुनिक साहित्य में आलोचनात्मक दृष्टिकोण’ में शामिल किया है।

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इस पुस्तक में सना अल-शअलान की कहानियों पर आधारित अध्याय का शीर्षक है, ‘सना अल-शअलान के कहानी-संग्रह तक़ासिम अल-फ़िलस्तीनी में जादुई यथार्थवाद।’

पुस्तक ‘आधुनिक साहित्य में आलोचनात्मक दृष्टिकोण’ का पहला संस्करण मिस्र के प्रकाशन संस्थान दार नादिया पब्लिशिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन ने प्रकाशित किया है।

इस तरह डॉ. फातिमा अल-ज़ग़ूल के आलोचनात्मक लेखन में सना अल-शअलान के उपन्यास और कहानी, दोनों विधाओं को स्थान मिला है। उनके अध्ययन में एक ओर उपन्यास के मनोवैज्ञानिक पक्षों पर ध्यान दिया गया है, तो दूसरी ओर कहानी-साहित्य में जादुई यथार्थवाद जैसी साहित्यिक प्रवृत्ति का विश्लेषण किया गया है।

सना अल-शअलान की साहित्यिक उपलब्धियां

उल्लेखनीय है कि जॉर्डन की साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. सना अल-शअलान (बिंत नईमा) को उपन्यास, लघुकथा, बाल साहित्य, विचारात्मक लेखन, आत्मकथा, विज्ञान कथा, शोध, रंगमंच, यात्रा-साहित्य, तुलनात्मक साहित्य और मीडिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 67 अंतरराष्ट्रीय, अरब जगत, स्थानीय और क्षेत्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

उनके कई नाटकों का स्थानीय और अरब जगत के विभिन्न रंगमंचों पर मंचन भी किया जा चुका है।

सना अल-शअलान के नाम से अब तक लगभग 90 प्रकाशित पुस्तकें और साहित्यिक कृतियां दर्ज हैं। इनमें विशिष्ट आलोचनात्मक पुस्तकें, लेख, उपन्यास, कहानी-संग्रह, बाल कहानियां, नाटक, यात्रा-साहित्य, आत्मकथा, रचनात्मक लघु-लेखन और गद्य रचनाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उनकी अनेक पांडुलिपियां अभी अप्रकाशित हैं।

उनकी रचनाओं और साहित्यिक योगदान पर सैकड़ों अध्ययन, लेख और शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। वह स्थानीय, अरब जगत और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनेक समाचारपत्रों तथा साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित स्तंभ भी लिखती रही हैं। इसके अलावा, उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फिल्मों के लिए पटकथाएं भी लिखी हैं।

सना अल-शअलान को विभिन्न संस्थाओं की ओर से अनेक सम्मान, स्मृति-चिह्न, मानद उपाधियां और सांस्कृतिक, सामाजिक तथा अधिकार संबंधी प्रतिनिधित्व के अवसर भी मिले हैं।

उनकी रचनात्मक यात्रा आज आलोचनात्मक अध्ययन और अकादमिक शोध का एक महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है। जॉर्डन, अरब जगत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में उनके साहित्य पर शोध किए जा रहे हैं। उनके रचनात्मक कार्यों को लेकर पीएचडी और एमए स्तर के शोध-प्रबंध भी तैयार किए गए हैं।

इस प्रकार सना अल-शअलान का साहित्यिक योगदान केवल रचनात्मक लेखन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह साहित्यिक आलोचना, अकादमिक अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी निरंतर अध्ययन का विषय बना हुआ है।

अनुवाद संबंधी नोट: अरबी में दिए गए नामों, पुस्तक-शीर्षकों और साहित्यिक विधाओं का हिंदी रूप मूल अर्थ के निकट रखा गया है। जिन पुस्तकों के शीर्षक का हिंदी में प्रचलित आधिकारिक अनुवाद उपलब्ध नहीं है, उनका अर्थानुसार अनुवाद किया गया है।

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