रुपये की गिरावट बनी प्रवासी भारतीयों के लिए फायदा: यूएई से पैसा भेजने का सुनहरा मौका
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली/दुबई
कभी-कभी किसी के लिए बुरी खबर, दूसरे के लिए अच्छी साबित हो जाती है। भारतीय मुद्रा की मौजूदा गिरावट का असर भी कुछ ऐसा ही है। जहां भारत सरकार और निवेशक रुपये के अवमूल्यन से चिंतित हैं, वहीं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रहने वाले लाखों प्रवासी भारतीय इस गिरावट को सुनहरा अवसर मान रहे हैं। दरअसल, यूएई दिरहम के मुकाबले भारतीय रुपया गिरकर 23.88 पर पहुंच गया है — जो जुलाई महीने में अब तक का सबसे निचला स्तर है।
यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 1 अगस्त से 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे भारतीय बाज़ारों में हलचल मच गई और रुपये पर दबाव बढ़ा है। जुलाई के अधिकांश समय तक 23.30 से 23.40 के आसपास स्थिर रहने के बाद, अब रुपया अचानक लुढ़का है — और यही वो मौका है जिसका इंतज़ार प्रवासी भारतीय लंबे समय से कर रहे थे।
यूएई स्थित कई एक्सचेंज हाउस अब 23.6 से 23.7 की दर से भारतीय रुपया खरीद-बेच कर रहे हैं — यह स्तर पिछली बार फरवरी में देखा गया था। विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार, यह इस वर्ष की शुरुआत में देखे गए 23.92 के रिकॉर्ड निचले स्तर के बेहद करीब है।
क्या यह है पैसे भेजने का सबसे सही समय?
दुबई के एक सीनियर मुद्रा व्यापारी ने कहा,
“यह 2025 में अब तक की सबसे बेहतरीन रेमिटेंस अपॉर्च्युनिटी है। रुपये में हालिया गिरावट ने उन प्रवासियों के लिए खास फायदा दिया है, जिन्होंने वेतन आने के बाद पैसे भेजने में देरी की थी।”
डॉलर के मुकाबले रुपया कमज़ोर होने के पीछे अमेरिका की मज़बूत आर्थिक स्थिति भी एक बड़ी वजह है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अब 87.70 के आसपास है और लगातार पाँचवे दिन मज़बूती की ओर बढ़ रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को स्थिर रखेगा, जिससे डॉलर में स्थायित्व बना रहेगा।
एक वरिष्ठ विदेशी मुद्रा सलाहकार ने कहा:
“अगर आप सही वक्त का इंतज़ार कर रहे हैं, तो यही वो समय है। यह मौके ज्यादा देर तक नहीं टिकते।”
ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता नहीं हुआ और टैरिफ में कटौती नहीं की गई, तो रुपया और भी दबाव में आ सकता है। लेकिन फिलहाल, मौजूदा विनिमय दर 23.88 कई प्रवासी भारतीयों के लिए उनके परिवारों को ज्यादा पैसे भेजने का सुनहरा अवसर साबित हो रही है।
निष्कर्ष:
यूएई में रहने वाले भारतीयों के लिए यह वक्त एक आर्थिक लाभ का क्षण है। एक ओर जहां भारतीय बाज़ार डॉलर के दबाव में हैं, वहीं प्रवासी इसे अपने परिवार के लिए ज्यादा सहायता भेजने के मौके के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में स्थिति बदल भी सकती है, इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है — “अभी नहीं तो कब?”

