द कपिल शर्मा शो में करीना कपूर के पाये वाले बयान पर सांप्रदायिकता तलाशने लगे लोग
Table of Contents
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, मुंबई
अभिनेत्री करीना कपूर खान के खाने पीने की पसंद को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। इस बार विवाद की वजह लौकी और पाया है। करीना कपूर ने ‘द कपिल शर्मा शो’ में बताया था कि उनके पति सैफ अली खान के परिवार में लौकी बनाने पर जोर दिया जाता है, जबकि उन्हें पाया पसंद है। शो में कही गई यह बात अब सोशल मीडिया पर राजनीतिक और सांप्रदायिक बहस का विषय बन गई है। कुछ लोगों ने करीना की टिप्पणी को शाकाहारी भोजन का अपमान बताया है। वहीं, दूसरे पक्ष के लोगों का कहना है कि किसी व्यक्ति की खानपान संबंधी पसंद को धर्म से जोड़ना और उस पर विवाद खड़ा करना गैरजरूरी है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या अब सामान्य बातचीत, हास्य और खाने की पसंद को भी धार्मिक पहचान के चश्मे से देखा जाएगा? सोशल मीडिया मंच एक्स पर करीना कपूर को लेकर कई टिप्पणियां की जा रही हैं। कुछ लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इस विवाद को बेवजह का मुद्दा बता रहे हैं।
कपिल शर्मा के शो में क्या बोली थीं करीना कपूर?
विवाद की शुरुआत ‘द कपिल शर्मा शो’ में करीना कपूर खान की एक टिप्पणी से हुई। शो में उनके साथ उनके पति और अभिनेता सैफ अली खान भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान करीना ने सैफ के परिवार में लौकी बनाए जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में लौकी खाने पर जोर दिया जाता है, जबकि उन्हें पाया पसंद है।
करीना ने यह बात हल्के फुल्के अंदाज में कही थी। उनकी प्रतिक्रिया और चेहरे के हावभाव को लेकर अब सोशल मीडिया पर अलग अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि यह केवल खाने की व्यक्तिगत पसंद से जुड़ी टिप्पणी थी। इसे शाकाहारी भोजन या किसी धर्म के खिलाफ बयान मानना उचित नहीं है।
पाया मांसाहारी व्यंजनों में शामिल है। इसे आमतौर पर बकरी या अन्य पशुओं के पैरों से तैयार किया जाता है। भारत के अलग अलग हिस्सों में पाया बनाने और खाने की अपनी परंपराएं हैं। यह व्यंजन खास तौर पर उत्तर भारत, हैदराबाद और पुराने शहरी इलाकों में लोकप्रिय है। दूसरी ओर, लौकी भारतीय घरों में आम तौर पर बनाई जाने वाली सब्जी है। इसे शाकाहारी भोजन का हिस्सा माना जाता है।
लौकी पसंद नहीं होना या पाया पसंद करना अपने आप में किसी धार्मिक विचारधारा का प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद करीना की टिप्पणी को लेकर बहस अब खाने की पसंद से आगे बढ़कर धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं तक पहुंच गई है।
एक्स पर सैफ्रन चार्जर्स ने उठाए सवाल
सोशल मीडिया मंच एक्स पर ‘सैफ्रन चार्जर्स’ नाम के अकाउंट से करीना कपूर की टिप्पणी की आलोचना की गई। पोस्ट में कहा गया कि करीना कपूर ने सैफ अली खान के साथ कपिल शर्मा के शो में लौकी के प्रति अरुचि दिखाई और पाया खाने की बात कही।
पोस्ट में दावा किया गया कि करीना एक बड़ी अभिनेत्री हैं और उन्हें राष्ट्रीय टेलीविजन पर शाकाहारी भोजन के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए था। इसमें यह भी कहा गया कि भारत में बड़ी संख्या में लोग शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं और ऐसे में शाकाहारी खाने का मजाक उड़ाना उचित नहीं है।
इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। आलोचकों ने करीना के व्यवहार को शाकाहारी भोजन के प्रति असम्मान बताया। हालांकि, कई यूजर्स ने इस आरोप को अतिशयोक्ति करार दिया। उनका कहना है कि किसी सब्जी को नापसंद करना और शाकाहार का अपमान करना दो अलग बातें हैं।
यहां यह समझना जरूरी है कि शो में कही गई बात और सोशल मीडिया पर उसके आधार पर लगाए जा रहे आरोप अलग अलग चीजें हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, करीना ने अपनी पसंद का जिक्र किया था। इसे सभी शाकाहारियों या किसी धार्मिक समुदाय के प्रति उनकी सोच का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

सोशल मीडिया पर दो पक्षों में बंटी राय
करीना कपूर के बयान पर एक्स पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने उनकी आलोचना का समर्थन किया। वहीं, कई लोगों ने कहा कि खाने की पसंद को लेकर किसी को निशाना बनाना उचित नहीं है।
एक यूजर ने टिप्पणी की कि शाकाहारी होना और लौकी पसंद करना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। किसी व्यक्ति का शाकाहारी होना यह जरूरी नहीं बनाता कि उसे हर शाकाहारी व्यंजन पसंद ही आए। इसी तरह, मांसाहारी भोजन पसंद करने का अर्थ यह भी नहीं है कि कोई शाकाहारी खाने का विरोधी है।
एक अन्य यूजर ने कहा कि वह ऐसे कई शाकाहारी लोगों को जानता है जिन्हें लौकी पसंद नहीं है। ऐसे में करीना की टिप्पणी को धर्म या सनातन परंपरा से जोड़ना उचित नहीं है। उसने यह भी कहा कि हर बात को धार्मिक पहचान से जोड़ने से समाज में अनावश्यक तनाव बढ़ता है।
कुछ टिप्पणियों में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या एक कॉमेडी शो में कही गई हल्की फुल्की बात को इतना गंभीर बना देना चाहिए? यूजर्स का कहना था कि मनोरंजन कार्यक्रमों में कलाकार अक्सर अपनी पसंद और नापसंद को हास्य के अंदाज में बताते हैं। हर टिप्पणी को विवाद का आधार बनाना सही नहीं है।
एक अन्य प्रतिक्रिया में कहा गया कि लौकी का मजाक उड़ाने को लेकर इतनी गंभीरता दिखाने के बजाय समाज को शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा, बेरोजगारी और दूसरी महत्वपूर्ण समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि सोशल मीडिया पर सभी लोग करीना के खिलाफ नहीं हैं। कई यूजर्स विवाद को अनावश्यक मान रहे हैं और इसे सामान्य खानपान की पसंद तक सीमित रखने की बात कर रहे हैं।
गरीबों के भोजन का मुद्दा भी उठा
इस विवाद में आर्थिक असमानता का मुद्दा भी सामने आया। सैफ्रन चार्जर्स की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने कहा कि आलोचकों को यह समझना चाहिए कि भारत की बड़ी आबादी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करती है। बहुत से लोग नियमित रूप से महंगा मांसाहारी भोजन नहीं खरीद सकते और उन्हें अपनी आय के अनुसार भोजन का चुनाव करना पड़ता है।
इस टिप्पणी के जरिए यह सवाल उठाया गया कि भोजन को लेकर बहस करते समय समाज के अलग अलग आर्थिक वर्गों की वास्तविकताओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। भारत में लोगों की खानपान संबंधी आदतें क्षेत्र, परिवार, आय, उपलब्धता और व्यक्तिगत पसंद के आधार पर अलग अलग होती हैं।
कुछ लोग शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं। कुछ मांसाहारी भोजन खाते हैं। वहीं, कई परिवारों में दोनों तरह का भोजन किया जाता है। इन विविधताओं को भारतीय समाज की सामान्य वास्तविकता के रूप में देखा जाना चाहिए।
खाने की पसंद को लेकर किसी व्यक्ति को नीचा दिखाना या उसकी धार्मिक पहचान पर सवाल उठाना सामाजिक संवाद को कमजोर करता है। इस मामले में भी यही बहस सामने आई है कि व्यक्तिगत पसंद को सामूहिक धार्मिक अस्मिता से जोड़ना कितना उचित है।
रणवीर कपूर के पुराने बयान की भी चर्चा
इस विवाद के दौरान अभिनेता रणबीर कपूर का नाम भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। कुछ यूजर्स ने उनके पुराने बयानों और खानपान संबंधी टिप्पणियों का जिक्र किया। सोशल मीडिया पर उनके नाम और करीना कपूर के नाम को लेकर भी कुछ प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
रणबीर कपूर के राम की भूमिका निभाने वाली आगामी फिल्म का संदर्भ देते हुए कुछ लोगों ने उनके पुराने बयानों को फिर से चर्चा में ला दिया। हालांकि, करीना कपूर की टिप्पणी और रणबीर कपूर से जुड़े पुराने विवाद अलग अलग मामले हैं। इन्हें एक साथ जोड़ने से बहस और अधिक राजनीतिक तथा धार्मिक रंग ले सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी कलाकार की फिल्मी भूमिका, निजी खानपान की पसंद और सार्वजनिक बयान तीन अलग विषय हैं। इन सभी को एक ही नजरिये से देखना सही निष्कर्ष तक पहुंचने में बाधा बन सकता है।
मृणाल पांडे ने भी उठाया सवाल
इस विवाद पर वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक हिंदुस्तान की पूर्व संपादक मृणाल पांडे की टिप्पणी भी चर्चा में आई। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि अगर करीना के बजाय उनके पति सैफ अली खान लौकी के खिलाफ ऐसी टिप्पणी करते, तो शायद कुछ लोग उनके देश निकाले की मांग करने लगते।
मृणाल पांडे की इस टिप्पणी को विवाद के राजनीतिक और सांप्रदायिक पहलू से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका सवाल इस बात की ओर इशारा करता है कि सार्वजनिक जीवन में खानपान संबंधी टिप्पणियों पर अलग अलग लोगों के लिए अलग मापदंड अपनाए जा सकते हैं।
यह टिप्पणी उस व्यापक बहस को भी सामने लाती है जिसमें किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान, पारिवारिक पृष्ठभूमि और खानपान को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं दी जाती हैं। किसी बयान की आलोचना करना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन आलोचना और व्यक्तिगत निशाना बनाने के बीच अंतर बनाए रखना भी जरूरी है।
Ram ! Ram ! Agar Kareena nahin uska Pati Lauki ki shaan ke khilaf aisa kuchh kehta, tau aap shayad uske Desh Nikaley ki maang kertey !
— Mrinal Pande (@MrinalPande1) October 18, 2026
खानपान की पसंद को धर्म से जोड़ना कितना उचित?
करीना कपूर खान से जुड़ा यह विवाद केवल लौकी और पाया तक सीमित नहीं है। यह सोशल मीडिया पर बढ़ती उस प्रवृत्ति की ओर भी ध्यान खींचता है जिसमें सामान्य घटनाओं को धार्मिक और राजनीतिक विवाद का रूप दे दिया जाता है।
भारत में खानपान की विविध परंपराएं लंबे समय से मौजूद हैं। अलग अलग समुदायों, क्षेत्रों और परिवारों में भोजन की आदतें अलग होती हैं। किसी को लौकी पसंद है तो किसी को नहीं। कोई शाकाहारी है तो कोई मांसाहारी। कई लोग अपनी पसंद के अनुसार दोनों तरह का भोजन करते हैं।
लोकतांत्रिक समाज में भोजन की पसंद को लेकर असहमति हो सकती है। लेकिन किसी व्यक्ति की पसंद के आधार पर उसकी देशभक्ति, धार्मिक आस्था या सामाजिक सोच का फैसला करना उचित नहीं है।
करीना कपूर की टिप्पणी पर उठे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सोशल मीडिया पर बहस का स्तर कैसा होना चाहिए। क्या हर सामान्य बातचीत को सांप्रदायिक चश्मे से देखना जरूरी है, या लोगों को अपनी पसंद और नापसंद व्यक्त करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए?
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है। एक पक्ष शाकाहारी भोजन के सम्मान की बात कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष व्यक्तिगत पसंद को विवाद में बदलने पर सवाल उठा रहा है। इस बहस से निकलने वाला सबसे जरूरी संदेश यही है कि भोजन की पसंद अलग हो सकती है, लेकिन इस आधार पर किसी व्यक्ति या समुदाय के प्रति नफरत फैलाना किसी भी तरह उचित नहीं है।
सवाल-जवाब
सवाल: करीना कपूर खान को लेकर विवाद क्यों हुआ?
जवाब: ‘द कपिल शर्मा शो’ में करीना कपूर खान ने बताया था कि उन्हें पाया पसंद है, जबकि सैफ अली खान के परिवार में लौकी बनाने पर जोर दिया जाता है। उनकी टिप्पणी पर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने शाकाहारी भोजन के सम्मान का मुद्दा उठाया, जबकि अन्य ने इसे व्यक्तिगत पसंद बताया।
सवाल: मृणाल पांडे ने करीना कपूर विवाद पर क्या कहा?
जवाब: वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक हिंदुस्तान की पूर्व संपादक मृणाल पांडे ने आशंका जताई कि यदि ऐसी टिप्पणी सैफ अली खान ने की होती, तो कुछ लोग उनके देश निकाले की मांग करने लगते।
सवाल: क्या लौकी नापसंद करना शाकाहारी भोजन का अपमान है?
जवाब: जरूरी नहीं। किसी सब्जी को नापसंद करना व्यक्तिगत पसंद का मामला है। इसे शाकाहारी भोजन या किसी धार्मिक समुदाय के प्रति अपमान मानने के लिए टिप्पणी का पूरा संदर्भ देखना जरूरी है।
Actress Kareena Kapoor appeared on Kapil Sharma’s show with her husband, Saif Ali Khan. During the show, she said that people in Saif Ali Khan’s family always ask for bottle gourd (lauki) to be cooked. While saying this, she made a disgusted face. She then said, We are people who eat paya, referring to non-vegetarian food, and started laughing, implying that she cannot eat bottle gourd (lauki). Kareena Kapoor is such a big actress, yet she is making fun of veg food on national television and showing such disdain for vegetarian food, even in a Hindu-majority country where a large number of people enjoy vegetarian food and it is widely preferred in India. Kareena Kapoor should respect all kinds of food choices. I did not expect this from her.
— Saffron Chargers (@SaffronChargers) October 18, 2026

