जामिया में छात्र संघ चुनाव पर कमेटी गठित, आंदोलन जारी
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों पर विचार करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सात सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। प्रशासन का कहना है कि कमेटी प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करेगी, उनकी मांगों की समीक्षा करेगी और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए जरूरी कदम सुझाएगी।
18 अक्टूबर 2026 को जारी विश्वविद्यालय के बयान के मुताबिक, कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ, रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिजवी, विभिन्न संकायों के डीन, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर, मुख्य प्रॉक्टर, छात्रावासों के प्रोवोस्ट और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों की मांगों और परिसर में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर चर्चा की गई।
हालांकि, कमेटी के गठन को छात्र संघ चुनाव बहाल करने की अंतिम मंजूरी नहीं माना जा सकता। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी चुनाव की तारीख घोषित नहीं की है। छात्रों की मांग पर विचार करने और चुनाव कराने का फैसला लेने के बीच अभी कई प्रक्रियाएं बाकी हैं। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े छात्रों और संगठनों की ओर से उठाए गए सवालों ने जामिया में छात्र प्रतिनिधित्व और प्रशासन के साथ संवाद को लेकर बहस तेज कर दी है।
2006 से नहीं हुए जामिया में छात्र संघ चुनाव
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव लंबे समय से नहीं हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय में आखिरी बार 2006 में छात्र संघ चुनाव कराए गए थे। इसके बाद से छात्र संगठनों और विद्यार्थियों के बीच चुनाव बहाल करने की मांग समय समय पर उठती रही है।
छात्र संघ को विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की समस्याएं उठाने और प्रशासन के सामने अपनी बात रखने का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। छात्र संघ चुनाव की मांग करने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि चुने हुए प्रतिनिधियों के जरिए छात्रावास, फीस, शैक्षणिक सुविधाओं, परिसर की सुरक्षा और दूसरे छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को व्यवस्थित ढंग से उठाया जा सकता है।
इसी मांग को लेकर पांच छात्रों ने 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन से जुड़े विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में छात्र संघ बहाल करने की मांग की। विरोध प्रदर्शन के दौरान परिसर में तनाव की स्थिति भी बनी रही।
प्रशासन की ओर से गठित नई कमेटी को अब इन मांगों पर छात्रों से बातचीत करनी है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कमेटी अपनी रिपोर्ट कब तक सौंपेगी और छात्र संघ चुनाव कराने पर अंतिम फैसला किस समय लिया जाएगा।
तीन छात्रों पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद
छात्र संघ चुनाव की मांग के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन विद्यार्थियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को जारी आदेश में एलएलबी के छात्र एबिन बेसिल को एक वर्ष के लिए विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विषय में स्नातकोत्तर कर रहे जासिम खान और एमए सोशल वर्क के छात्र रेहान हैदर को निलंबित किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों पर एक वर्ष तक परिसर में प्रवेश का प्रतिबंध भी लगाया गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने एबिन बेसिल पर 15 अक्टूबर को गालिब लॉन में कथित अनधिकृत धरने में शामिल होने, कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया प्रभावित करने के आरोप लगाए। प्रशासन के आदेश में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने सीसीटीवी कैमरे की तार खींच दी थी, जिससे निगरानी व्यवस्था प्रभावित हुई।
आदेश में 11 सितंबर को हुए एक पुराने विरोध प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया। प्रशासन ने आरोप लगाया कि उस दौरान बेसिल और कुछ अन्य विद्यार्थियों ने प्रॉक्टोरियल टीम के सदस्यों का सामना किया और घटना के बारे में भ्रामक विवरण वाले वीडियो प्रसारित किए।
ये आरोप विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश में दर्ज हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से साबित हुए तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। संबंधित विद्यार्थियों का पक्ष और अनुशासनात्मक कार्रवाई के खिलाफ उनकी दलीलें भी मामले को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भूख हड़ताल कर रहे छात्रों के साथ बदसलूकी का आरोप
तीन विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए। शनिवार को जारी संयुक्त बयान में छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि सुबह के समय 100 से अधिक सुरक्षाकर्मी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और भूख हड़ताल कर रहे विद्यार्थियों के साथ धक्का मुक्की की।
छात्र संगठनों के इस दावे पर विश्वविद्यालय की ओर से अलग से विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध कराई गई जानकारी में शामिल नहीं है। इसलिए घटना के इस पहलू पर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
छात्रों के आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। विश्वविद्यालय ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर संवाद की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। लेकिन छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई और चुनाव की मांग पर निर्णय में देरी से आंदोलन को लेकर असंतोष बना हुआ है।
छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू करने वाले पांच विद्यार्थियों में से तीन के खिलाफ कार्रवाई की गई। ऐसे में कमेटी के सामने केवल चुनाव की मांग पर चर्चा करना ही नहीं, बल्कि परिसर में सामान्य शैक्षणिक माहौल बहाल करने और छात्रों की शिकायतें सुनने की चुनौती भी होगी।
कुलपति और रजिस्ट्रार की छात्रों के साथ बैठक
कमेटी के गठन से पहले विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक छह घंटे से अधिक समय तक चली। इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और केंद्रों की विषय समितियों के निर्वाचित पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
16 अक्टूबर को जारी विश्वविद्यालय के बयान में कहा गया था कि बैठक के जरिए विद्यार्थियों को अपनी शिकायतें रखने और समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव देने का अवसर मिला।
विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा था कि प्रशासन को सैद्धांतिक रूप से छात्र संघ बहाल करने पर आपत्ति नहीं है। हालांकि, इसके लिए औपचारिक अनुरोध पर विचार करना होगा। अधिकारी के मुताबिक, किसी कमेटी को इस मामले की समीक्षा करनी होगी और चुनाव से पहले हिंसा जैसी घटनाओं को रोकने के उपायों का आकलन करना होगा।
इस बयान से संकेत मिलता है कि प्रशासन छात्र संघ चुनाव की मांग पर विचार के लिए तैयार है, लेकिन उसने अभी चुनाव बहाल करने का औपचारिक फैसला नहीं लिया है। सात सदस्यीय कमेटी का गठन इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
Office of the Chief Public Relations Officer, Jamia Millia Islamia Important Press Release JMI Constitutes a High-Level Committee to Address Students’ Grievances and Restore Normalcy on Campus October 18, 2026 A meeting of senior university functionaries – JMI Vice Chancellor, Prof. Mazhar Asif, Registrar JMI, Prof. Md. Mahtab Alam Rizvi, Deans of Faculties, Dean Students’ Welfare, Chief Proctor, Provosts of hostels, and other officials of Jamia Millia Islamia (JMI), was held today to deliberate on the demands raised by students who have been sitting on a hunger strike and staging protests. Following detailed deliberations during this meeting; the University has constituted a high-level, 7-member committee to engage in dialogue with the protesting students, examine their demands, and take necessary steps towards restoring peace and ensuring a return to normalcy on the campus. Chief Public Relations Officer, JMI
— Jamia Millia Islamia (NAAC A++ Grade Central Univ) (@jmiu_official) October 18, 2026
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का उदाहरण भी चर्चा में
जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग के बीच अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का उदाहरण भी सामने आ रहा है। एएमयू में भी छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन चला था। छात्रों के दबाव और आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव कराने के लिए तैयार हुआ था।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव का मुद्दा और जामिया में चल रहा आंदोलन अपने अलग संदर्भ रखते हैं। फिर भी, दोनों विश्वविद्यालयों में छात्र प्रतिनिधित्व की मांग और प्रशासन के साथ बातचीत का सवाल महत्वपूर्ण है।
जामिया के मामले में अब निगाहें सात सदस्यीय कमेटी की कार्यवाही पर हैं। यह देखना होगा कि कमेटी विद्यार्थियों की मांगों पर क्या सिफारिश करती है और विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव बहाल करने के बारे में क्या निर्णय लेता है।
क्या जामिया में जल्द होंगे छात्र संघ चुनाव?
फिलहाल जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की कोई तारीख घोषित नहीं हुई है। विश्वविद्यालय ने कमेटी गठित कर प्रदर्शनकारी छात्रों से संवाद करने और उनकी शिकायतों पर विचार करने का फैसला किया है। लेकिन चुनाव बहाल करने की मांग का अंतिम समाधान अभी सामने नहीं आया है।
छात्रों की मुख्य मांग है कि विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव दोबारा शुरू किए जाएं। वहीं, प्रशासन ने चुनाव की प्रक्रिया पर विचार करने के साथ परिसर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने पर जोर दिया है।
आने वाले दिनों में कमेटी और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत इस विवाद की दिशा तय कर सकती है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो चुनाव बहाल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हालांकि, इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की औपचारिक घोषणा और स्पष्ट समयसीमा जरूरी होगी।
जामिया में 2006 के बाद छात्र संघ चुनाव नहीं होने का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में है। अब छात्रों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्चस्तरीय कमेटी उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघ चुनाव कराने की दिशा में ठोस कदम उठाता है।
सवाल और जवाब
सवाल: जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग पर क्या फैसला हुआ?
जवाब: 18 अक्टूबर 2026 को जामिया प्रशासन ने प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर बातचीत करने और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की। अभी चुनाव की तारीख घोषित नहीं हुई है।
सवाल: जामिया में आखिरी बार छात्र संघ चुनाव कब हुए थे?
जवाब: उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आखिरी छात्र संघ चुनाव 2006 में हुए थे।
सवाल: छात्र आंदोलन के दौरान किन विद्यार्थियों पर कार्रवाई हुई?
जवाब: मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एबिन बेसिल को एक वर्ष के लिए निष्कासित किया गया, जबकि जासिम खान और रेहान हैदर को निलंबित किया गया। प्रशासन ने तीनों पर एक वर्ष के परिसर प्रतिबंध की कार्रवाई भी की।

