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बाराबंकी में अदबी कैनवस का शानदार मुशायरा

शहर के मोहल्ला पीर बटावन में स्थित Mother Halima Public School में एक खूबसूरत अदबी शाम सजी। Bazm Adabi Canvas के बैनर तले मासिक तरही मुशायरे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में शायरी के चाहने वालों की अच्छी खासी भीड़ जुटी।

मुशायरे की अध्यक्षता बज़्म के सदर जिया उद्दीन ने की। खास मेहमान के तौर पर Shoeb Kausar Radolvi और Adeel Mansoori मौजूद रहे। सम्मानित मेहमान के रूप में Master Mohammad Aleem Radolvi ने शिरकत की। मंच पर सभी शायरों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत तरही मिसरे से हुई। शायरों ने उसी जमीन पर अपनी गजलें पेश कीं। एक से बढ़कर एक अशआर ने माहौल को जीवंत बना दिया। श्रोता हर अच्छे शेर पर दाद देते नजर आए।

शोएब कौसर रदोलवी ने इबादत और सादगी पर खूबसूरत शेर पढ़ा। उन्होंने कहा कि जिंदगी की असली खूबसूरती इबादत और तहारत में है। उनके कलाम को खूब सराहा गया।

मोहसिन कदवई ने इंसानियत का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि असली इबादत जरूरतमंद की मदद में है। उनके शेर ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया।

अदील मंसूरी ने समाज की सच्चाई को बयान किया। उन्होंने कहा कि अब कोई भी सुरक्षित नहीं है। उनके शेर में मौजूदा हालात की झलक साफ दिखी।

मास्टर अलीम रदोलवी ने मोहब्बत और भाईचारे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर दर्द की दवा मोहब्बत में छिपी होती है। उनका अंदाज सादा था लेकिन असरदार रहा।

डॉक्टर रेहान अलवी का शेर सबसे ज्यादा पसंद किया गया। उन्होंने कहा कि इंसान की असली पहचान दौलत या शोहरत से नहीं होती। असली बड़ाई तहारत और शराफत में है। इस शेर पर खूब तालियां बजीं।

आदर्श बाराबंकवी और मास्टर इरफान ने भी बेहतरीन कलाम पेश किया। उनके अशआर में जज्बात और सच्चाई दोनों नजर आए। मिस्टर अमीठवी ने अपने शेर में समाज के भेदभाव पर सवाल उठाया।

इसके अलावा Nafees Ahmad Puri, Dr Khalid, Qari Maqbool Ahmad, अफजल रहमान और अरीबा खातून ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं। सभी ने अपने अंदाज में श्रोताओं का दिल जीता।

कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इनमें शमीम अंसारी जैदपुरी, मौलाना सलीमुल्लाह कासमी, हाफिज जबीहुल्लाह, इकबाल कुरैशी और शराफत हुसैन के नाम खास तौर पर लिए गए।

अंत में बज़्म के जनरल सेक्रेटरी डॉक्टर रेहान अलवी और स्कूल प्रबंधन की ओर से सभी शायरों और मेहमानों का शुक्रिया अदा किया गया। बज़्म के सदर जिया उद्दीन ने कहा कि श्रोताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को कामयाब बनाया।

उन्होंने यह भी ऐलान किया कि जल्द ही एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया जाएगा। इस घोषणा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह शाम अदब और तहजीब की खूबसूरत मिसाल बन गई।

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