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भद्रवाह के गुलदंडा में बिछी बर्फ की सफेद चादर: उमड़ा पर्यटकों का सैलाब

भद्रवाह (जम्मू-कश्मीर): मुस्लिम नाउ ब्यूरो

जब देश के मैदानी इलाकों में सूरज की तपिश दस्तक देने लगी है, ठीक उसी समय जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की खूबसूरत भद्रवाह घाटी एक अलग ही रंग में रंगी नजर आ रही है। भद्रवाह के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलदंडा में हुई ताजा बर्फबारी ने पूरे इलाके को एक जादुई ‘विंटर वंडरलैंड’ में तब्दील कर दिया है। अप्रैल की शुरुआत में हुई इस अप्रत्याशित बर्फबारी का लुत्फ उठाने के लिए देश भर से हजारों की संख्या में पर्यटक यहाँ पहुँच रहे हैं।

गुलदंडा में ‘स्प्रिंग स्नोफॉल’ का जादू

आमतौर पर वसंत के महीने में फूलों की महक होती है, लेकिन भद्रवाह की ऊंची चोटियों पर इस समय ‘सफेद सोना’ बरस रहा है। गुलदंडा के ऊंचे घास के मैदानों (High-altitude meadows) में चारों तरफ बर्फ की मोटी परत बिछ गई है।

वहाँ का नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं है। पर्यटकों को बर्फ के साथ अठखेलियां करते, बर्फ के गोले एक-दूसरे पर फेंकते और ढलानों पर फिसलते देखा जा सकता है। नवविवाहित जोड़े इस शांत और सुरम्य वातावरण में टहलते नजर आ रहे हैं, तो वहीं परिवार और दोस्तों के समूह इस यादगार पल को अपने कैमरों में कैद करने में मशगूल हैं। सफेद चादर के बीच संगीत की धुन पर थिरकते सैलानियों के झुंड घाटी की जीवंतता को और बढ़ा रहे हैं।

सनासर और पटनीटॉप में भी रौनक

भविष्यवाणी के अनुरूप, केवल भद्रवाह ही नहीं, बल्कि जम्मू संभाग की प्रसिद्ध सनासर घाटी में भी पर्यटकों का तांता लगा हुआ है। 25 मार्च से ही पटनीटॉप-सनासर मार्ग खुलने के बाद यहाँ भारी भीड़ देखी जा रही है।

सनासर के स्थानीय हितधारकों, जिनमें होटल मालिक, नाविक और छोटे दुकानदार शामिल हैं, ने इस साल रिकॉर्ड तोड़ पर्यटन सीजन की उम्मीद जताई है। यहाँ की मुख्य झील के किनारे स्थित ट्यूलिप गार्डन इस समय पर्यटकों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। खिले हुए ट्यूलिप और चारों तरफ फैली प्राकृतिक सुंदरता बच्चों और परिवारों को अपनी ओर खींच रही है। यहाँ पर्यटक घुड़सवारी, ज़िपलाइनिंग और कई इंटरैक्टिव गेम्स का आनंद ले रहे हैं।

मौसम की मार और प्रशासन की मुस्तैदी

जहाँ एक तरफ बर्फबारी पर्यटन के लिए खुशियां लाई है, वहीं दूसरी तरफ ऊंचे इलाकों में चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 28 से 31 मार्च के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान में व्यापक हल्की से मध्यम बर्फबारी और बारिश की संभावना जताई गई थी।

सुरक्षा के लिहाज से, 29 मार्च को 85 किलोमीटर लंबे बांदीपोरा-गुरेज मार्ग पर वाहनों की आवाजाही निलंबित कर दी गई थी। गुरेज और तुलेल जैसे ऊंचे क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी के कारण यह एहतियाती कदम उठाया गया। इससे पहले 23 मार्च को इसी मार्ग पर दो बड़े हिमस्खलन (Avalanches) हुए थे, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। हालांकि, सीमा सड़क संगठन (BRO) की 56 RCC टीमों ने युद्धस्तर पर काम करते हुए बर्फ हटाकर कनेक्टिविटी बहाल करने में सफलता पाई है।

पर्यटन से उम्मीदें: स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल

भद्रवाह और सनासर में उमड़ रही भीड़ ने स्थानीय व्यापारियों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वसंत के मौसम में इस तरह की बर्फबारी ‘बोनस’ की तरह है। इससे न केवल पर्यटन से जुड़े लोगों की कमाई बढ़ेगी, बल्कि जम्मू-कश्मीर की छवि एक ‘ऑल-वेदर डेस्टिनेशन’ के रूप में और मजबूत होगी।

सैलानियों के लिए सलाह

प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। ऊंचे दर्रों पर जाने से पहले सड़क की स्थिति की जांच अवश्य कर लें।

निष्कर्ष: कश्मीर की वादियों में वसंत और शीत ऋतु का यह अनूठा मिलन प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। अगर आप भी चिलचिलाती गर्मी से राहत पाना चाहते हैं और बर्फ के बीच सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो भद्रवाह और सनासर की ये वादियां आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं।