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ईरान युद्ध रोकने को चीन-पाकिस्तान का पंचसूत्रीय फॉर्मूला: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शांति की अपील

बीजिंग/इस्लामाबाद: मुस्लिम नाउ ब्यूरो

दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्र, मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भीषण युद्ध को लेकर वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। मंगलवार को बीजिंग में चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक के बाद दोनों देशों ने एक सुर में ‘तत्काल युद्धविराम’ (Immediate Ceasefire) की मांग की है।

ईरान के साथ जारी इस युद्ध के पांचवें सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही, बीजिंग और इस्लाबाद ने एक ‘पंचसूत्रीय पहल’ (Five-Point Initiative) पेश की है, जिसका उद्देश्य न केवल रक्तपात को रोकना है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में सामान्य आवाजाही को बहाल करना भी है।

मध्यस्थ के रूप में उभरा पाकिस्तान

इस संकट में पाकिस्तान एक ‘प्रमुख मध्यस्थ’ (Key Mediator) के रूप में उभरा है। ईरान के साथ 900 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करने वाला पाकिस्तान इस समय एक अनूठी स्थिति में है। इस्लाबाद ने एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने बेहतर होते संबंधों और दूसरी तरफ ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों का लाभ उठाते हुए खुद को एक ‘तटस्थ खिलाड़ी’ के रूप में पेश किया है।

बैठक के दौरान पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने स्पष्ट किया कि “संवाद और कूटनीति ही संघर्षों को सुलझाने के एकमात्र व्यवहार्य तरीके हैं।”

चीन-पाकिस्तान की ‘पंचसूत्रीय पहल’ के मुख्य बिंदु

बीजिंग में जारी साझा बयान में दोनों देशों ने शांति बहाली के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

  1. तत्काल वार्ता की शुरुआत: चीन और पाकिस्तान ने संबंधित पक्षों से जल्द से जल्द बातचीत की मेज पर आने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि विवादों को केवल शांतिपूर्ण माध्यमों से ही सुलझाया जाना चाहिए।
  2. संप्रभुता की रक्षा: पहल में जोर दिया गया है कि ईरान और खाड़ी देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता की हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए।
  3. नागरिक और परमाणु ठिकानों की सुरक्षा: युद्ध के बीच नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और विशेष रूप से ‘शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं’ (Peaceful Nuclear Facilities) को निशाना न बनाने की अपील की गई है।
  4. समुद्री मार्गों की सुरक्षा: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ में फंसे हुए जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
  5. व्यापारिक बहाली: दोनों देशों ने सभी पक्षों से नागरिक और वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने देने और जलडमरूमध्य में सामान्य नेविगेशन को जल्द बहाल करने का आह्वान किया है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज: वैश्विक चिंता का केंद्र

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का वह ‘चोकपॉइंट’ है जहाँ से वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक तेल की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ा है। वांग यी और इशाक डार ने चेतावनी दी है कि इस जलमार्ग की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।

कूटनीतिक बिसात पर पाकिस्तान का बढ़ता कद

यह पहली बार नहीं है जब इस्लाबाद ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पुल बनने की पेशकश की है। पाकिस्तान की यह सक्रियता उसे दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका में खड़ा करती है। चीन का साथ मिलना इस पहल को और अधिक वजन देता है, क्योंकि चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी है।

निष्कर्ष: क्या सफल होगी यह पहल?

अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए, चीन और पाकिस्तान की यह संयुक्त अपील कितनी कारगर साबित होगी, यह आने वाला वक्त बताएगा। हालांकि, बीजिंग से आया यह संदेश साफ है कि एशियाई शक्तियां अब इस युद्ध को और लंबा खींचने के पक्ष में नहीं हैं।

‘मुस्लिम नाउ’ की इस विशेष रिपोर्ट का सार यही है कि जब तक प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय शक्तियां एकजुट होकर दबाव नहीं बनाएंगी, तब तक शांति वार्ता की मेज सजना मुश्किल है। चीन और पाकिस्तान ने गेंद अब अमेरिका और ईरान के पाले में डाल दी है।