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अब्बास अराघची: कूटनीति के मैदान में ईरान का वो चेहरा, जिसने अमेरिका को उलझा दिया

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच लंबी चली बातचीत भले ही किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एक नाम लगातार चर्चा में बना रहा। यह नाम है ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi का।

कहा जा रहा है कि इस बार ईरान की रणनीति सिर्फ कूटनीतिक नहीं थी, बल्कि भावनात्मक और प्रतीकात्मक भी थी। पाकिस्तान आने वाली उड़ान में ईरानी प्रतिनिधिमंडल अपने साथ उन बच्चों की तस्वीरें लेकर आया था, जो हालिया बमबारी में मारे गए थे। साथ ही स्कूल बैग भी रखे गए थे। माना जाता है कि यह विचार खुद अराघची का था।

इस कदम का मकसद साफ था। दुनिया को यह दिखाना कि युद्ध की असली कीमत कौन चुका रहा है। वे बच्चे जो किसी राजनीति का हिस्सा नहीं थे। वे परिवार जो सिर्फ अपनी जिंदगी जी रहे थे। ईरान इस संदेश को सीधे और असरदार तरीके से सामने लाना चाहता था।

अब्बास अराघची को लेकर कहा जाता है कि वे बेहद शांत और सोच समझकर कदम उठाने वाले नेता हैं। उनके हर फैसले के पीछे एक लंबी रणनीति होती है। वे सिर्फ बयान देने वाले राजनेता नहीं हैं। वे जमीन पर जाकर हालात को समझते हैं।

जब से अमेरिका, Israel और ईरान के बीच तनाव बढ़ा है, अराघची कई बार सड़कों पर नजर आए हैं। वे आम लोगों से मिलते हैं। उनका हाल पूछते हैं। कोशिश करते हैं कि लोगों का हौसला बना रहे।

युद्ध के समय यह भूमिका बहुत अहम होती है। डर और अनिश्चितता के माहौल में जब कोई नेता लोगों के बीच जाता है, तो भरोसा बनता है। यही वजह है कि ईरान में हालात वैसे नहीं बने जैसे अमेरिका ने सोचा था।

अमेरिका को उम्मीद थी कि हमलों के बाद ईरान के भीतर असंतोष बढ़ेगा। शायद सरकार के खिलाफ आवाज उठेगी। लेकिन हुआ इसके उलट। ईरान की जनता और ज्यादा एकजुट हो गई।

कई बार ऐसा भी देखने को मिला कि जब किसी अहम जगह पर हमले की धमकी दी गई, तो वहां हजारों लोग इकट्ठा हो गए। वे उस जगह के चारों तरफ खड़े हो गए। यह एक तरह से संदेश था कि वे डरने वाले नहीं हैं।

कहा जाता है कि इस तरह की रणनीतियों के पीछे भी अराघची की सोच काम करती है। वे जानते हैं कि सिर्फ सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि लोगों का मनोबल भी किसी देश की बड़ी ताकत होता है।

Strait of Hormuz को लेकर भी उनकी सोच की चर्चा होती है। माना जाता है कि उन्होंने इसे एक रणनीतिक दबाव के तौर पर इस्तेमाल करने का विचार दिया। यह रास्ता दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बहुत अहम है। इसलिए इसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ता है।

अराघची की शिक्षा और अनुभव भी उन्हें अलग बनाते हैं। वे फारसी, अरबी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में धाराप्रवाह बोलते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पढ़ाई की है। राजनीति विज्ञान में उच्च शिक्षा ली है। और ब्रिटेन की कैंट यूनिवर्सिटी से पीएचडी भी की है।

लेकिन उनकी पहचान सिर्फ डिग्रियों से नहीं बनती। उनकी असली पहचान उनके व्यवहार में दिखती है। हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इसमें वे अपने पुराने शिक्षक से मिलते नजर आते हैं।

वीडियो में देखा गया कि वे अपने शिक्षक के हाथ को चूमने की कोशिश करते हैं। यह एक सम्मान का भाव था। एक ऐसा संस्कार जो आज की राजनीति में कम ही दिखाई देता है।

इस वीडियो को साझा करते हुए लोगों ने लिखा कि असली तहजीब सिर्फ पश्चिम में नहीं है। बल्कि पूर्व की परंपराओं में भी गहराई और सम्मान है।

अराघची का यह रूप एक अलग तस्वीर पेश करता है। एक ऐसा नेता जो सख्त फैसले भी लेता है और विनम्र भी रहता है। जो रणनीति भी बनाता है और लोगों के बीच भी जाता है।

इस्लामाबाद की बातचीत भले ही किसी समझौते पर खत्म नहीं हुई। लेकिन इस दौरान ईरान ने अपने तरीके से दुनिया के सामने अपनी बात रखने की कोशिश की।

अब्बास अराघची इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम चेहरा बनकर उभरे हैं। उनकी भूमिका सिर्फ एक विदेश मंत्री की नहीं दिखी। बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की दिखी जो अपने देश की छवि और संदेश दोनों को लेकर गंभीर है।

आने वाले समय में बातचीत फिर शुरू होगी या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि इस बार दुनिया ने ईरान को सिर्फ एक देश के तौर पर नहीं, बल्कि एक सोच के तौर पर भी देखा है।

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