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मिसाइल हमलों से दहला अबू धाबी; खाड़ी में महायुद्ध के बीच भारतीय नागरिक घायल

अबू धाबी/रियाद/तेहरान

पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी की राह कठिन नजर आ रही है। सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी को निशाना बनाकर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया। हालांकि, मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से एक भारतीय नागरिक के घायल होने की खबर है।

इस घटना के साथ ही खाड़ी देशों और ईरान के बीच ‘सीधे युद्ध’ की स्थिति बन गई है। संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि पिछले 24 घंटों में उन्होंने 25 ड्रोन्स (UAVs) और 4 बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है।


अबू धाबी में ‘अल शवामेख’ पर गिरा मलबा: भारतीय नागरिक को आई चोटें

अबू धाबी मीडिया ऑफिस द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह घटना शहर के अल शवामेख (Al Shawamekh) इलाके में हुई। यूएई के अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ने जैसे ही ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया, उसका मलबा रिहायशी इलाके में जा गिरा।

  • भारतीय नागरिक घायल: मलबे की चपेट में आने से एक भारतीय प्रवासी को मामूली चोटें आई हैं। स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें और अफवाहों से बचें।
  • रक्षा मंत्रालय की मुस्तैदी: मंत्रालय ने बताया कि रविवार सुबह से ही यूएई की सेना रक्षात्मक अभियानों में सक्रिय रूप से लगी हुई है।

ईरानी आक्रमण के चौंकाने वाले आंकड़े: यूएई पर अब तक सैकड़ों हमले

यूएई रक्षा मंत्रालय ने इस संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक के “ईरानी आक्रमण” के कुल आंकड़े साझा किए हैं, जो इस युद्ध की भयावहता को दर्शाते हैं:

  • इंटरसेप्ट किए गए ड्रोन (UAVs): 1,773
  • बैलिस्टिक मिसाइलें: 345
  • क्रूज मिसाइलें: 15

मंत्रालय ने इन हमलों को “स्पष्ट ईरानी आक्रामकता” करार दिया है और स्पष्ट किया है कि यूएई की सैन्य क्षमताएं किसी भी तरह के हवाई खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


Ballistic Missile Defense (BMD) schematic diagram, vector illustration

फ्रांस का सऊदी को समर्थन: मैक्रों ने संभाला मोर्चा

खाड़ी देशों पर बढ़ते दबाव के बीच फ्रांसीसी प्रधानमंत्री इमैनुएल मैक्रों ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के साथ महत्वपूर्ण वार्ता की। मैक्रों ने सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में फ्रांस के पूर्ण सहयोग और एकजुटता का आश्वासन दिया।

मैक्रों की चेतावनी:

  1. हॉर्मुज जलडमरूमध्य: मैक्रों ने ईरान पर दबाव डाला है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को तुरंत बहाल करे।
  2. बुनियादी ढांचे पर हमला बंद हो: उन्होंने सभी युद्धरत पक्षों से ऊर्जा केंद्रों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को अस्थायी रूप से रोकने की अपील की है।
  3. वैश्विक समन्वय: मैक्रों ने इस नाजुक घड़ी में G7 और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

तेहरान में धमाके और ईरान के भीतर विद्रोह की सुगबुगाहट

जहाँ एक ओर खाड़ी देश हमलों का सामना कर रहे हैं, वहीं ईरान की राजधानी तेहरान से भी धमाकों की आवाजें सुनाई देने की खबरें आ रही हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान में रात भर तनाव का माहौल रहा।

इसी बीच, ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने वैश्विक समुदाय से एक बड़ा आह्वान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर स्पष्ट रूप से कहा:

“ईरान, इस्लामिक रिपब्लिक (मौजूदा शासन) नहीं है। ईरान का नागरिक बुनियादी ढांचा वहां की जनता का है। मौजूदा शासन ‘दमन और आतंक की मशीन’ है जिसे उखाड़ फेंकना जरूरी है।”

पहलवी ने तर्क दिया कि ईरान की रक्षा के लिए इस शासन का अंत अनिवार्य है, क्योंकि यह शासन भविष्य की स्वतंत्र ईरानी पहचान का दुश्मन है।


विश्लेषण: क्या यह ‘अघोषित’ क्षेत्रीय युद्ध है?

एक वरिष्ठ पत्रकार के नाते, इन घटनाओं का विश्लेषण करने पर तीन प्रमुख बिंदु उभर कर सामने आते हैं:

  1. ईरान की आक्रामकता: ईरान जिस पैमाने पर मिसाइलों और ड्रोन्स का उपयोग कर रहा है, वह दर्शाता है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सर्वोच्चता और दबाव बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
  2. पश्चिमी शक्तियों का प्रवेश: फ्रांस और अमेरिका का सऊदी-यूएई के समर्थन में खुलकर आना इस संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय रूप दे रहा है। यह अब केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रहा।
  3. ऊर्जा संकट का खतरा: हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा केंद्रों पर हमलों से वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है, जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।

निष्कर्ष: जिम्मेदारी और संयम की आवश्यकता

दुनिया इस समय एक ऐसे ज्वालामुखी पर बैठी है जो कभी भी फट सकता है। जैसा कि फ्रांसीसी प्रधानमंत्री ने कहा, “यह समय जिम्मेदारी और संयम दिखाने का है।” यदि वार्ता की मेज पर समाधान नहीं खोजा गया, तो यह मिसाइल युद्ध पूरे क्षेत्र को राख में बदल सकता है। अबू धाबी में भारतीय नागरिक का घायल होना इस बात का प्रमाण है कि इस युद्ध की आंच निर्दोष प्रवासियों तक पहुँच चुकी है।