मदीना बस दुर्घटना के पीड़ितों को अंतिम विदाई, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ने पेश की ख़िराज-ए-अक़ीदत
मुस्लिम नाउ ब्यूरो,,मदीना( सऊदी अरब)
सऊदी अरब के मदीना में हुए भीषण बस हादसे के पीड़ितों का अंतिम संस्कार 22 नवंबर को किया गया। यह दुर्घटना भारतीय हज यात्रियों के लिए एक गहरा सदमा थी। इस मार्मिक अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल, न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नज़ीर, भारत के राजदूत डॉ. सुहेल खान, और महावाणिज्य दूत फहद सूरी विशेष रूप से उपस्थित रहे और मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
शोकपूर्ण विदाई: जन्नत उल बक़ी में दफ़्न
सभी दिवंगत तीर्थयात्रियों के पार्थिव शरीरों को मदीना के सबसे पवित्र कब्रिस्तान, जन्नत उल बक़ी में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। यह कब्रिस्तान इस्लामी इतिहास में अत्यंत पूजनीय स्थान है। एक आधिकारिक बयान में, सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
"मदीना बस दुर्घटना के पीड़ितों का अंतिम संस्कार 22 नवंबर को मदीना, सऊदी अरब में हुआ। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नज़ीर ने पैगंबर की मस्जिद में अंतिम नमाज़ और जन्नत उल बक़ी में दफ़्न में भाग लिया। राजदूत डॉ. सुहेल खान और महावाणिज्य दूत फहद सूरी भी मृतकों के रिश्तेदारों और शुभचिंतकों के साथ शामिल हुए। दूतावास इस दुखद दुर्घटना पर एक बार फिर गहरी संवेदना व्यक्त करता है।"

इस बयान ने न केवल मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की, बल्कि भारत सरकार के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधित्व को भी दर्शाया, जो इस कठिन समय में पीड़ितों के परिवारों के साथ खड़ा रहा।
उच्च-स्तरीय संवाद और सऊदी अरब का सहयोग
अपनी शोक यात्रा के दौरान, राज्यपाल नज़ीर ने मदीना के कार्यवाहक राज्यपाल, महामहिम अब्दुल मोहसिन बिन नायफ़ बिन हुमैद से मुलाकात की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मदीना के राज्यपाल प्रिंस सलमान बिन सुल्तान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद से टेलीफोन पर बात भी की।
भारतीय दूतावास ने इस बैठक और बातचीत का विवरण साझा करते हुए बताया कि सऊदी अधिकारियों ने इस दुर्घटना पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और भारत को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। भारतीय पक्ष ने सऊदी अरब के नेतृत्व और संबंधित सभी अधिकारियों द्वारा प्रदान की गई सहायता के लिए गहन आभार व्यक्त किया। इस उच्च-स्तरीय समन्वय ने सुनिश्चित किया कि अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं गरिमा और सम्मान के साथ पूरी हों।
राज्यपाल नज़ीर के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विशेष मुख्य सचिव जी. अनंत रामू और सचिव (सीपीवी और ओआईए) अरुण कुमार चटर्जी भी मौजूद थे।
विनाशकारी हादसा: 45 जिंदगियां ख़त्म
यह भयानक हादसा उन 54 तीर्थयात्रियों के समूह के साथ हुआ, जो 9 नवंबर को हैदराबाद से उमरा यात्रा के लिए रवाना हुए थे। यह यात्रा 9 से 23 नवंबर तक निर्धारित थी।
यह समूह मक्का से मदीना जा रहा था, तभी मदीना से लगभग 25 किलोमीटर पहले उनकी बस एक तेल टैंकर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि तुरंत बाद एक भयानक विस्फोट हुआ, जिसने पलक झपकते ही बस को अपनी चपेट में ले लिया।
यह एक दुखद विडंबना थी कि समूह के 54 सदस्यों में से 4 यात्री पहले ही अलग कार से मदीना के लिए रवाना हो गए थे, और 4 निजी कारणों से मक्का में रुके रहे। इस दुर्भाग्यपूर्ण बस में 46 तीर्थयात्री सवार थे।
यह हादसा इतना विनाशकारी था कि बस में सवार 45 यात्रियों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। बस पूरी तरह जल गई, और इस भयानक आग से केवल एक व्यक्ति—मोहम्मद अब्दुल शोएब—ही बच पाया।
तेल टैंकर से हुई टक्कर और उसके बाद हुए विस्फोट ने इस घटना को अत्यंत घातक बना दिया। इस त्रासदी ने भारतीय मुस्लिम समुदाय को, विशेष रूप से हैदराबाद के लोगों को, शोक में डुबो दिया है। जन्नत उल बक़ी में सामूहिक दफ़्न ने न केवल मृतकों को अंतिम सम्मान दिया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि इस दुख की घड़ी में उनके परिवारों को उच्च-स्तरीय सरकारी समर्थन और संवेदना प्राप्त हो। यह घटना तीर्थयात्रा की धार्मिक पवित्रता के बीच एक भयानक मानवीय त्रासदी का काला अध्याय बन गई है।

