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संघर्ष विराम के बावजूद गाजा में हर दिन औसतन दो बच्चों की मौत: यूनिसेफ़ का खुलासा

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,जिनेवा/गाजा पट्टी

इजरायल और हमास के बीच हुए संघर्ष विराम के बावजूद, गाजा पट्टी में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने एक दिल दहला देने वाला आंकड़ा जारी किया है, जिसके अनुसार संघर्ष विराम लागू होने के बाद से अब तक संघर्ष-संबंधी घटनाओं में कम से कम 67 बच्चों की जान जा चुकी है।

यूनिसेफ़ के प्रवक्ता रिकार्डो पाइरस ने जिनेवा में बताया, “दर्जनों अन्य बच्चे घायल हुए हैं। इसका मतलब है कि संघर्ष विराम लागू होने के बाद से गाजा में हर दिन औसतन लगभग दो बच्चे मारे जा रहे हैं।” यह आंकड़ा दिखाता है कि अस्थिर शांति के इस दौर में भी मासूमों पर खतरा लगातार मंडरा रहा है।

हवाई हमलों में मासूम जानें

यूनिसेफ़ ने पिछले कुछ दिनों की दुखद घटनाओं का विवरण दिया:

गुरुवार (21 नवंबर): दक्षिणी गाजा के पूर्वी खान यूनिस में हुए एक हवाई हमले में एक नवजात बच्ची की अपने माता-पिता के साथ मौत हो गई।

बुधवार (20 नवंबर): गाजा सिटी और दक्षिणी गाजा में हुए हवाई हमलों में सात बच्चों को जान गंवानी पड़ी।

ये घटनाएँ इस बात की पुष्टि करती हैं कि संघर्ष विराम के बावजूद हवाई हमले और सैन्य कार्रवाई जारी हैं, जिनका सबसे बड़ा शिकार बच्चे बन रहे हैं।

एमएसएफ (MSF) के अस्पतालों में गंभीर रूप से घायल बच्चे

इस बीच, मेडेसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स (Médecins Sans Frontières – MSF), जिसे डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के नाम से भी जाना जाता है, ने गाजा में अपने चिकित्सा दलों द्वारा किए जा रहे इलाज का ब्यौरा दिया है। MSF के अनुसार, अस्थिर संघर्ष विराम को लगभग छह सप्ताह बीत जाने के बाद भी, उनके डॉक्टर इजरायली हवाई हमलों और गोलीबारी से घायल फिलिस्तीनी महिलाओं और बच्चों का इलाज कर रहे हैं।

दान-पुण्य के इस संगठन ने बताया कि बुधवार से लेकर अब तक, उत्तरी और दक्षिणी गाजा में उनके चिकित्सा कर्मचारियों ने कई महिलाओं और बच्चों का इलाज किया है, जिन्हें खुले फ्रैक्चर (Open Fractures) और हाथ-पैर तथा सिर पर गोली लगने के घाव थे। MSF उत्तरी गाजा सिटी और दक्षिणी राफा के अस्पतालों और क्लीनिकों में यह चिकित्सा देखभाल प्रदान कर रहा है।

MSF द्वारा उद्धृत गाजा की एक नर्स के अनुसार, एक चौंकाने वाली घटना में, बुधवार को गाजा सिटी के एक अस्पताल में नौ साल की एक बच्ची का इलाज किया गया, जिसके चेहरे पर इजरायली ड्रोन से हुई गोलीबारी के कारण चोट आई थी। ये मामले इस बात को रेखांकित करते हैं कि सैन्य कार्रवाई नागरिक क्षेत्रों में गहराई तक घुसपैठ कर रही है।

संघर्ष विराम की अस्थिरता

संघर्ष विराम समझौते के तहत, इजरायल की सेना एक तथाकथित “पीली रेखा” (Yellow Line) तक पीछे हट गई है, लेकिन अभी भी गाजा पट्टी के 53 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण बना हुआ है। गाजा का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र गाजा सिटी हमास के नियंत्रण में है, जबकि दक्षिणी राफा इजरायल के नियंत्रण में है।

हालांकि संघर्ष विराम औपचारिक रूप से अभी भी लागू है, लेकिन इजरायल और हमास दोनों ने एक-दूसरे पर बार-बार इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

इजरायल का पक्ष: इजरायल की सेना ने कहा है कि 10 अक्टूबर से उसने उन लोगों को मारा है जिन्हें वह "पीली रेखा" पार करने वाले "आतंकवादी" बताता है। सेना ने यह भी कहा है कि उसने अपने सैनिकों पर हुए हमलों के जवाब में जवाबी हमले किए हैं।

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय का आंकड़ा: गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 11 अक्टूबर के बाद से इजरायली सेना द्वारा गाजा में 312 फिलिस्तीनियों को मार दिया गया है।

यूनिसेफ़ का नवीनतम आंकड़ा इस बात की दुखद पुष्टि करता है कि सैन्य और राजनीतिक गतिरोध के बीच सबसे बड़ी कीमत गाजा के मासूम बच्चे चुका रहे हैं। संघर्ष विराम का उद्देश्य शांति और सुरक्षा लाना था, लेकिन हर दिन औसतन दो बच्चों की मौत, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए एक बड़ी विफलता और मानवीय संकट की निरंतरता का प्रतीक है।

यह रिपोर्ट गाजा में चल रहे मानवीय संकट की गंभीरता को दर्शाती है। क्या आप इस स्थिति के मानवाधिकार पहलुओं पर या अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर कोई और जानकारी चाहेंगे?