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मस्जिद के लाउडस्पीकर से गूंजी ‘अरविंद’ की पुकार, नफरत के दौर में मोहब्बत की मिसाल

नई दिल्ली, मुस्लिम नाउ ब्यूरो

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो उन लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो धर्म के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश करते हैं। इस वीडियो की सादगी में ही इसका सबसे बड़ा संदेश छिपा है। वीडियो में दिख रहा है कि एक मस्जिद के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए नहीं बल्कि एक बिछड़े हुए बच्चे को उसके परिवार से मिलाने के लिए किया जा रहा है।

अशरफ हुसैन नाम के एक यूजर ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया है। वीडियो में एक दाढ़ी वाले शख्स मस्जिद के माइक से ऐलान कर रहे हैं। वह अरविंद नाम के एक सात साल के बच्चे के खो जाने की जानकारी दे रहे हैं। उनके पास ही बच्चे का एक रिश्तेदार भी खड़ा नजर आ रहा है। घोषणा करने वाला व्यक्ति बड़ी ही संजीदगी से बताता है कि बच्चा बोल पाने में असमर्थ है और उसने ग्रे रंग की शर्ट पहनी है। वह पिछले डेढ़-दो घंटे से लापता है।

यह वही लाउडस्पीकर है जिसे लेकर अक्सर विवाद पैदा किए जाते हैं। कुछ लोग अजान की आवाज को ध्वनि प्रदूषण बताकर इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते रहते हैं। लेकिन इस वीडियो ने दिखाया कि कैसे मजहबी दीवारें इंसानियत के आगे छोटी पड़ जाती हैं। मस्जिद से एक हिंदू बच्चे के लिए की गई यह पुकार भारत की साझा संस्कृति और सदियों पुराने भाईचारे की गवाही देती है।

वीडियो साझा करने वाले अशरफ हुसैन ने लिखा कि मस्जिद के लाउडस्पीकर को लेकर अक्सर नकारात्मक खबरें चलाई जाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नफरत फैलाने वाले लोग इस वीडियो पर कुछ कहने की हिम्मत जुटा पाएंगे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह वीडियो कब और किस जगह का है। इसके बावजूद वीडियो के संदेश ने लोगों के दिलों को छू लिया है।

आज के दौर में जहां सोशल मीडिया का इस्तेमाल अक्सर नफरत और अफवाहें फैलाने के लिए होता है वहां यह वीडियो उम्मीद की एक किरण जगाता है। यह साबित करता है कि जमीन पर आज भी आम इंसान एक दूसरे के सुख दुख में साथ खड़े हैं। नफरत की राजनीति चाहे कितनी भी कोशिश कर ले लेकिन भारत की गंगा जमुनी तहजीब को मिटाना इतना आसान नहीं है। अरविंद की सलामती के लिए मस्जिद से उठी यह आवाज इस बात का प्रमाण है कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।

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