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असम बेदखली संकट: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने केंद्र से तात्कालिक हस्तक्षेप माँगा

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,नई दिल्ली

जमीयत उलेमा-ए-हिंद (JUH) के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने असम के हिंसा-प्रभावित धुबरी और गोलपाड़ा ज़िलों का तथ्य-जांच दौरा पूरा कर लिया है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि वहाँ चल रहे बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान ने हज़ारों गरीब मुस्लिम परिवारों को घर-विहीन कर दिया है; कई परिवार अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे थे जिन्हें अब प्रशासन हटवा रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि भोजन, पानी और राहत सामग्री की आपूर्ति पर रोक लगाई जा रही है और पुलिस फ़ायरिंग में नागरिकों के घायल होने—और एक नाबालिग की मौत—जैसी गंभीर घटनाएँ सामने आई हैं, जो संवैधानिक अधिकारों व मानवीय गरिमा का खुला उल्लंघन हैं।

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ज़मीनी हालात: “स्थिति बेहद गंभीर” – जमीयत उलेमा असम की रिपोर्ट

जमीयत उलेमा असम द्वारा तैयार रिपोर्ट, जिसे संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी को सौंपा गया, बताती है कि राहत शिविरों के तौर पर खड़ी की गई अस्थायी झुग्गियों को भी ध्वस्त किया जा रहा है। कई जगहों पर हैंडपंप उखाड़ दिए गए, स्वच्छता सुविधाएँ नदारद हैं, और प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण राहत एजेंसियों की पहुँच बाधित है।

संगठन का कहना है कि उसने कुछ इलाक़ों में खाद्य सामग्री और तिरपाल वितरित करने की कोशिश की, लेकिन “सरकारी अवरोध” के चलते राहत कार्य सीमित रह गया।


गोलपाड़ा: 17 वर्षीय विस्थापित युवक की मौत, पुलिस फ़ायरिंग के आरोप

तथ्य-जांच दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि 17 जुलाई की रात गोलपाड़ा ज़िले के पैकन वन क्षेत्र स्थित आशुदुबी गाँव में पुलिस ने कथित रूप से गोली चलाई। प्रभावित लोग—जिनमें 12 जुलाई 2025 को बेदखल किए गए विस्थापित परिवार शामिल थे—भोजन, पानी और सड़क मार्ग खोलने की मांग कर रहे थे। इस दौरान गोली लगने से एक 17 वर्षीय शरणार्थी युवक की मौत और तीन लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है।


धुबरी ज़िला: 20,000 से अधिक लोग उजड़े, रेतीले चारों पर धकेले गए

प्रतिनिधिमंडल ने धुबरी ज़िले के चराकत्रा, संतोषपुर और चारवाबकरा क्षेत्रों का भी दौरा किया। रिपोर्ट के अनुसार:

  • 20,000 से अधिक मुस्लिम निवासियों को हटाया गया।
  • इनमें 5,700 पंजीकृत मतदाता और 3,500 से अधिक परिवार शामिल बताए गए।
  • विस्थापितों को ब्रह्मपुत्र के रेतीले चार (नदीय टापू/सैंडबैंक) क्षेत्रों में बसने को मजबूर किया जा रहा है—जहाँ न पीने का पानी है, न स्थायी आश्रय, न बुनियादी सुविधाएँ।

जमीयत ने आरोप लगाया कि यह सब एक कॉरपोरेट-समर्थित सौर ऊर्जा परियोजना के नाम पर किया जा रहा है, जबकि मीडिया का एक वर्ग प्रभावित भारतीय नागरिकों को “अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिया” बताकर उनकी स्थिति और ख़तरनाक बना रहा है।


जमीयत की केंद्र से माँगें

खोज़ निष्कर्षों के आधार पर JUH ने भारत सरकार से तात्कालिक व दीर्घकालिक कदम उठाने की अपील की है:

  1. फ़ौरन राहत – सभी विस्थापित परिवारों को भोजन, पीने का पानी, चिकित्सीय सहायता व अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराया जाए।
  2. राहत मार्ग खोलें – एनजीओ, धार्मिक-सामाजिक समूहों और मानवीय संगठनों को प्रभावित इलाक़ों तक पहुँच की अनुमति दी जाए; सड़क अवरोध हटें।
  3. न्यायिक कार्रवाई – नागरिकों पर गोली चलाने के आरोपों की न्यायिक जाँच; दोषी पुलिसकर्मियों पर सख़्त कार्रवाई।
  4. मुआवज़ा व पुनर्वास – विस्थापित परिवारों को उचित आर्थिक मुआवज़ा और रहने योग्य वैकल्पिक भूमि का आवंटन।
  5. घृणा नैरेटिव पर रोक – भारतीय नागरिकों को “बांग्लादेशी” कहकर कलंकित करने वाली दुष्प्रचार मुहिम पर तुरंत रोक; राज्य एजेंसियों और मीडिया के लिए तथ्य-आधारित दिशा-निर्देश।
  6. अल्पसंख्यक सुरक्षा – असम में धार्मिक एवं जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ “दमनकारी कार्रवाइयों” को तुरंत रोका जाए।

“औपनिवेशिक दौर से भी कठोर”: रिपोर्ट का गंभीर आरोप

जमीयत की रिपोर्ट के शब्दों में, राहत अवरोध, फ़ायरिंग, जलस्रोत नष्ट करने और आवागमन बंद करने जैसी कार्रवाइयाँ “मानवीय गरिमा और भारतीय संविधान की मूल भावना पर हमला” हैं। रिपोर्ट ने इन्हें कुछ परिप्रेक्ष्यों में “औपनिवेशिक शासन से भी कठोर” करार दिया।


प्रतिनिधिमंडल में कौन थे?

दौरे में शामिल वरिष्ठ व स्थानीय नेतृत्व:

  • मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी (महासचिव, JUH)
  • हाफ़िज बशीर अहमद क़ासमी (महासचिव, जमीयत उलेमा असम)
  • मौलाना अब्दुल क़ादिर क़ासमी (अतिरिक्त महासचिव)
  • मौलाना महबूब हसन
  • मौलाना फ़ज़्ल करीम क़ासमी
  • मुफ़्ती सादउद्दीन क़ासमी
  • मौलाना इज़्ज़त अली
  • श्री अब्दुल हई
  • श्री अबू कलाम
  • मौलाना अबू हाशिम
  • मौलाना अबू तालिब (गोलपाड़ा)
  • मुफ़्ती याहिया (अध्यक्ष, बिलासिपारा JUH)
  • हाफ़िज़ लुक़मान (अध्यक्ष, Chapar JUH)
  • मुफ़्ती साजिद (अध्यक्ष, Kokrajhar JUH)
  • मौलाना अब्दुल माजिद (अध्यक्ष, Dhubri JUH)
  • अन्य स्थानीय नेता व कार्यकर्ता

बैकग्राउंड: असम में बेदखली, चार क्षेत्र और नागरिकता पर विवाद

असम में नदी के रेतीले ‘चार’ इलाकों और वन भूमि पर कब्ज़े, बाढ़-क्षति पुनर्वास, और ‘अवैध घुसपैठ’ के आरोप लंबे समय से राजनीतिक विवाद का हिस्सा रहे हैं। बार-बार की बाढ़, भूमि क्षरण और दावों-प्रति-दावों के बीच स्थानीय समुदाय अक्सर प्रशासनिक कार्रवाई और पहचान की राजनीति के बीच फँस जाते हैं। मौजूदा अभियान ने इस पुरानी बहस को फिर उभार दिया है—कौन नागरिक है, किसकी ज़मीन है, और विकास परियोजना के नाम पर किसे हटाया जा रहा है?