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Assam Muslims Success Story : नाहिद अफरीन, संगीत से समाज सेवा तक

मुस्लिम नाउ विशेष | असम मुस्लिम सक्सेज स्टोरी

असम की युवा गायिका, सामाजिक कार्यकर्ता और यूनिसेफ इंडिया की युवा एडवोकेट नाहिद अफरीन आज उन चुनिंदा मुस्लिम महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने बेहद कम उम्र में संगीत, शिक्षा और समाज सेवा—तीनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। महज 23 वर्ष की उम्र में नाहिद ने जो मुकाम हासिल किया है, वह न केवल असम बल्कि पूरे देश के युवाओं, खासकर मुस्लिम लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

‘मुस्लिम नाउ’ की विशेष श्रृंखला ‘मुस्लिम सक्सेज स्टोरी’ के तहत आज हम आपको रूबरू करा रहे हैं असम की उस बेटी से, जिसने अपनी सुरीली आवाज़ से बॉलीवुड तक पहुंच बनाई और अब समाज में बदलाव की आवाज़ बनकर उभर रही हैं।

प्रतिष्ठित कॉटन यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान (Psychology) की छात्रा नाहिद अफरीन आज यूनिसेफ इंडिया (UNICEF India) की युवा एडवोकेट के रूप में बाल विवाह, मानसिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, नवाचार और STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) में लड़कियों की भागीदारी जैसे गंभीर मुद्दों पर काम कर रही हैं। जिस उम्र में ज्यादातर युवा अपने करियर की दिशा तलाश रहे होते हैं, उस उम्र में नाहिद समाज के संवेदनशील मुद्दों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज़ बुलंद कर रही हैं।

इंडियन आइडल से शुरू हुआ सफर

नाहिद अफरीन पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आईं, जब उन्होंने 2015 में ‘इंडियन आइडल जूनियर’ में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेकेंड रनर-अप का स्थान हासिल किया। असम की इस प्रतिभाशाली बेटी की आवाज़ ने लाखों लोगों का दिल जीत लिया। उनकी सफलता ने न केवल पूर्वोत्तर भारत बल्कि पूरे देश में एक नई पहचान बनाई।

इसके बाद वर्ष 2016 में नाहिद ने बॉलीवुड में कदम रखा और अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा अभिनीत फिल्म ‘अकीरा’ में प्लेबैक सिंगर के तौर पर डेब्यू किया। इतनी कम उम्र में मनोरंजन जगत में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना उनके असाधारण हुनर की गवाही देता है।

लेकिन नाहिद की कहानी सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपनी लोकप्रियता को समाज सेवा और जागरूकता से जोड़कर एक नई मिसाल कायम की।

यूनिसेफ इंडिया की युवा एडवोकेट बनीं

वर्ष 2023 में नाहिद अफरीन को यूनिसेफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय से एक कॉल आया, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी। उन्हें यूनिसेफ इंडिया का युवा अधिवक्ता (Youth Advocate) चुना गया। देश के विभिन्न राज्यों से बेहद कम युवाओं को इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया था, जिनमें नाहिद भी शामिल थीं।

इस भूमिका को निभाने से पहले उन्होंने एक वर्ष तक विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्हें असम में बाल विवाह जैसी सामाजिक समस्याओं पर काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

नाहिद के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में आज भी बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक चुनौती बना हुआ है। जागरूकता की कमी और सामाजिक दबाव के कारण कई बच्चियों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है और उनका भविष्य प्रभावित होता है।

बाल अधिकारों की आवाज़ बनीं नाहिद

नाहिद का सामाजिक सफर 2023 में नहीं, बल्कि इससे पहले शुरू हो चुका था। 2018 में यूनिसेफ इंडिया ने उन्हें नॉर्थ ईस्ट के लिए ‘बाल अधिकार चैंपियन’ चुना था। उस समय वह स्कूली छात्रा थीं, लेकिन समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता और सक्रियता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।

उसी वर्ष असम विधानसभा में बाल विवाह को लेकर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भी उन्होंने हिस्सा लिया। वहां बाल विवाह के दुष्प्रभावों और इसे रोकने के उपायों पर चर्चा हुई। 2020 तक नाहिद लगातार बाल विवाह विरोधी अभियानों और जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय रहीं।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी कर रहीं काम

नाहिद अफरीन केवल बाल विवाह तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। एक मनोविज्ञान की छात्रा होने के नाते वे बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को लेकर भी गंभीरता से काम कर रही हैं।

उनका मानना है कि आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में 13 से 19 वर्ष के किशोर सबसे अधिक तनाव और मानसिक दबाव झेल रहे हैं। पढ़ाई का बोझ, करियर की चिंता, सामाजिक तुलना और पारिवारिक अपेक्षाएं बच्चों को मानसिक रूप से कमजोर बना रही हैं।

नाहिद कहती हैं कि कई बार बच्चे अवसाद और तनाव के चलते गलत फैसले तक ले लेते हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता बेहद जरूरी है।

ग्रामीण समाज में जागरूकता की कोशिश

नाहिद का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में माता-पिता के बीच बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं होती। विशेष रूप से जन्म के बाद स्तनपान, पोषण और मानसिक विकास के महत्व को लेकर जागरूकता की कमी दिखाई देती है।

यूनिसेफ इंडिया की युवा एडवोकेट के तौर पर वह माता-पिता और ग्रामीण समुदायों के बीच इस विषय पर जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं।

“समाज को बेहतर बनाना चाहती हूं”

भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर नाहिद बेहद विनम्रता से कहती हैं कि वह संगीत, शिक्षा और समाज सेवा तीनों को साथ लेकर चलना चाहती हैं।

उनके शब्दों में, “मैं जो भी बनूं, जो भी करूं, उससे समाज को फायदा होना चाहिए। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे ऐसे इंसान के रूप में याद करें, जिसने दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने की कोशिश की।”

नाहिद अफरीन की कहानी केवल सफलता की कहानी नहीं, बल्कि यह इस बात का सबूत भी है कि यदि इरादे मजबूत हों तो कम उम्र में भी समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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