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बंगाल : बीजेपी नेता और कार्यकर्ताओं समेत आठ गिरफ्तार, बेटे को बचाने में मुस्लिम व्यक्ति की गई जान

बांका,पश्चिम बंगाल के

16 अगस्त को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की एक टीम ने इंदास में हफीज और उनके परिवार से मुलाकात की।

पश्चिम बंगाल के बांका जिला स्थित इंदास में 51 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति शेख मोहम्मद मफीक की मौत के मामले में स्थानीय बीजेपी नेता और कार्यकर्ताओं समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि हिंदुत्ववादी लोगों ने उनके बेटे पर हमला किया और उसे बचाने की कोशिश के दौरान मफीक के साथ भी मारपीट की गई, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई और बाद में उनकी मौत हो गई।

मफीक के 25 वर्षीय बेटे शेख अब्दुल हफीज नागरिक अधिकार संगठन CJP (Citizens for Justice and Peace) के स्वयंसेवक हैं। वह अपने गांव के एक सरकारी स्कूल की खराब स्थिति को रिकॉर्ड कर रहे थे और उसे बेहतर बनाने के लिए संगठन के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जुड़े थे।

मफीक की पत्नी हसीना बेगम ने 16 अगस्त को इंदास थाने में एफआईआर दर्ज कराई। यह एफआईआर उनके पति की मौत के एक दिन बाद दर्ज हुई। Alt News के अनुसार, शिकायत में प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक काशीनाथ डे को हमले के लिए कथित तौर पर उकसाने वाला व्यक्ति बताया गया है।

शिकायत में शेख आजाद, श्रीकांत माझी, रोहित माझी, अष्टम माझी और प्रशांत माझी के अलावा आठ से दस अज्ञात लोगों के नाम शामिल हैं। आरोप है कि 13 अगस्त की रात करीब आठ बजे हमलावर लाठी, लोहे की रॉड और अन्य हथियारों के साथ परिवार के घर में घुस आए और हफीज तथा उनके पिता मफीक पर हमला किया।

इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें शेख आजाद, श्रीकांत माझी, प्रशांत रुईदास, रोहित माझी, बाबलू माझी, संतु माझी, टिंकू केवड़ा और अष्टम माझी शामिल हैं।

एफआईआर में नामजद तीन आरोपियों—आजाद, श्रीकांत माझी और अष्टम माझी—को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है, जबकि अन्य पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, अष्टम माझी करिसुंडा में बीजेपी नेता हैं, जबकि आजाद समेत अन्य आरोपी बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता और समर्थक बताए जाते हैं।

हालांकि, घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि आरोपी अपराधी हैं और उनका बीजेपी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

सरकारी स्कूल की स्थिति रिकॉर्ड करने के बाद हमला

हफीज 13 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद अपने गांव करिसुंडा लौटे थे। इसके बाद उन्होंने संगठन के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत काम शुरू किया।

13 अगस्त को हफीज करिसुंडा पश्चिमपाड़ा प्राथमिक विद्यालय पहुंचे। वह इसी स्कूल में पढ़ चुके थे। उन्होंने प्रधानाध्यापक काशीनाथ डे से कहा कि वह स्कूल की स्थिति को रिकॉर्ड करना चाहते हैं। इसमें स्कूल के शौचालय और कक्षाओं की छत की खराब हालत भी शामिल थी।

हफीज के अनुसार, प्रधानाध्यापक ने उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा। लेकिन उनका आरोप है कि उसी शाम स्थानीय बीजेपी समर्थक उनके घर पहुंच गए और उन पर हमला कर दिया।

हफीज ने बताया कि हमलावरों ने पहले उनके साथ मारपीट की। उन्हें बचाने के लिए उनके पिता मफीक बीच में आए। इसके बाद मफीक पर टांगी से हमला किया गया। टांगी एक प्रकार का धारदार कृषि उपकरण है। इस हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई।

बाद में हफीज ने एक वीडियो में अपनी गर्दन और बांह पर लगी चोटों के निशान भी दिखाए।

अपने पिता की मौत के बाद एक भावुक वीडियो में हफीज ने कहा, “क्या आप जानते हैं कि मेरे पिता की मौत हो गई। क्योंकि उनका बेटा एक सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने गया था। उन्होंने उन्हें मार डाला। बीजेपी के लोगों ने उन्हें मार डाला।”

पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप

हफीज ने आरोप लगाया कि हमले के बाद पुलिस की पहली टीम गांव में दो घंटे से अधिक समय बाद पहुंची, जबकि इंदास पुलिस थाना वहां से करीब 20 मिनट की दूरी पर है।

उन्होंने कहा कि उनके पिता के शरीर से खून बह रहा था, लेकिन पुलिसकर्मियों में से कोई भी उन्हें इंदास ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के दौरान उनके साथ नहीं गया।

हफीज का यह भी आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की, लेकिन जब उन्होंने घटना की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी और संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला दिया तो पुलिस पीछे हट गई।

हफीज के अनुसार, जिस स्वास्थ्य केंद्र में वह और उनके पिता पहुंचे थे, वहां बीजेपी कार्यकर्ताओं ने घेराव कर रखा था। दोनों को केवल प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद मफीक को भर्ती करने के बजाय कहीं और रेफर कर दिया गया।

हफीज का आरोप है कि अस्पताल के बाहर भी हमलावरों ने उन पर दोबारा हमला किया। उन्होंने उन्हें जबरन एक कोने में ले जाकर उनका मोबाइल फोन छीन लिया और उसमें मौजूद वीडियो डिलीट कर दिए।

इसके बाद परिवार ने एफआईआर दर्ज कराने और स्वास्थ्य केंद्र से मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट लेने की कोशिश की। परिवार का आरोप है कि उन्हें यह प्रमाणपत्र भी नहीं दिया गया।

परिवार के अनुसार, जब वे एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने पहुंचे तो वहां भी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर भीड़ जुटा ली और उन्हें शिकायत दर्ज कराने से रोकने की कोशिश की।

आखिरकार परिवार के पास मफीक को वापस घर ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

हफीज के अनुसार, 14 अगस्त को भी मफीक को आगे का इलाज नहीं मिल सका और वह घर पर ही रहे। इस दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा इलाके को घेरे रखने का भी आरोप लगाया गया।

अपनी जान को खतरा महसूस होने पर हफीज विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों की मदद से गांव से निकल गए। इसके बाद CJP के पश्चिम बंगाल नेतृत्व ने उन्हें एक अज्ञात स्थान पर सुरक्षित रखा।

इलाज के दौरान हुई मफीक की मौत

मफीक की हालत लगातार बिगड़ने के बाद उनकी पत्नी हसीना बेगम 15 अगस्त को उन्हें दोबारा इंदास ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गईं। वहां से उन्हें बर्दवान मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया।

मफीक की उसी दिन रात करीब आठ बजे मौत हो गई।

हफीज का आरोप है कि 13 अगस्त के हमले से पहले भी CJP से उनके जुड़ाव को लेकर उन्हें धमकियां दी गई थीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि 28 जुलाई को बीजेपी कार्यकर्ताओं पिंटू माझी, शेख आजाद और श्रीकांत माझी ने गांव की सड़क पर उन्हें रोक लिया था। कथित तौर पर उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने CJP का समर्थन करना और वीडियो अपलोड करना बंद नहीं किया तो उन्हें गांव से निकाल दिया जाएगा।

हफीज के मुताबिक, आजाद ने उनकी मां से भी कहा था, “आपका बेटा एक आतंकवादी संगठन में शामिल हो गया है। उसे पाकिस्तान से पैसे मिल रहे हैं। उससे कहो कि अपनी हरकतें सुधार ले, वरना हम जरूरी कार्रवाई करेंगे।”

इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर हफीज को 9 अगस्त को एक तथाकथित ‘कंगारू कोर्ट’ के सामने पेश होने का आदेश दिया। हालांकि, यह बैठक नहीं हो सकी, लेकिन हफीज का कहना है कि धमकियां जारी रहीं।

राजनीतिक और छात्र संगठनों ने की कार्रवाई की मांग

घटना के बाद कई राजनीतिक और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने बांका जाकर हफीज और उनके परिवार से मुलाकात की और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

TMC की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने हफीज से विस्तार से बातचीत की है और उन्हें “हर तरह की मदद और समर्थन” का आश्वासन दिया है।

इंडियन यूथ कांग्रेस ने भी कहा कि उसकी टीम परिवार के साथ जमीन पर मौजूद है और वह कानूनी तथा अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगी। संगठन ने एफआईआर में नामजद सभी लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की।

CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका भी बांका पहुंचे और हफीज तथा उनके परिवार से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि संगठन “अब्दुल के साथ पूरी तरह खड़ा है।”

रांका ने कहा, “उनके परिवार पर केवल इसलिए हमला किया गया क्योंकि वे एक सरकारी स्कूल देखने गए थे। हम डरने वाले नहीं हैं। आप हिंसा और नफरत फैलाते रहिए, हम स्कूलों के लिए लड़ते रहेंगे।”

AISA की पश्चिम बंगाल टीम ने भी बांका जाकर हफीज और उनके परिवार से मुलाकात की।

AISA की अध्यक्ष नेहा ने मफीक की मौत को “सांप्रदायिक हमला और हत्या” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मफीक की हत्या बीजेपी कार्यकर्ताओं ने की और पश्चिम बंगाल पुलिस से जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करने की मांग की।

हमले के पीछे सांप्रदायिक पहलू पर भी सवाल

इस घटना ने उन लोगों के बीच भी चिंता पैदा की है, जो मानते हैं कि हमले में हफीज की मुस्लिम पहचान भी एक कारक हो सकती है। उनका कहना है कि इस हिंसा को मुस्लिमों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

कुछ आलोचकों ने यह सवाल भी उठाया है कि CJP ने हफीज के स्कूल अभियान पर तो प्रमुखता से जोर दिया है, लेकिन हमले के संभावित इस्लामोफोबिक या मुस्लिम-विरोधी मकसद को स्पष्ट रूप से संबोधित नहीं किया है।

घटना में पुलिस की भूमिका, आरोपियों के बीजेपी से कथित संबंध और हमले के पीछे संभावित सांप्रदायिक मकसद जैसे सवाल अब भी चर्चा में हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

स्रोतः मकतूब

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