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15,000 राखियों से ढक गए दोनों हाथ, खान सर ने कहा – ‘हाथ सुन्न हो गया

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, पटना

दुनिया में भाई-बहन का रिश्ता सबसे प्यारा माना जाता है। रक्षाबंधन का दिन इस रिश्ते की डोर को और मजबूत कर देता है। लेकिन अगर मैं आपसे कहूँ कि इस धरती पर एक ऐसा भाई भी है जिसकी कलाई पर इतनी राखियाँ बंधती हैं कि एक वक्त तो उनके हाथ में खून का बहाव तक रुक जाता है, तो शायद आप हैरान रह जाएँ। और भी चौंकाने वाली बात ये कि ऐसा सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कई सालों से हर रक्षाबंधन पर हो रहा है।

जी हाँ, ये कहानी है देश के चर्चित शिक्षक खान सर की — वही खान सर, जो मामूली फीस लेकर लाखों छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं, जिनकी पढ़ाने की अनोखी शैली से पूरा देश दीवाना है, और जिनके यूट्यूब चैनल पर करोड़ों फॉलोअर्स हैं।


बहनों से भरी दुनिया

खान सर की कोई सगी बहन नहीं है। लेकिन उनके लिए ये कभी कमी नहीं रही, क्योंकि उनके पास हजारों बहनें हैं — वो छात्राएं, जो उनसे पढ़ती हैं और उन्हें सच्चे मन से अपना भाई मानती हैं।

त्योहार के दिन उनका क्लासरूम, उनकी कोचिंग और इस बार पूरा श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल, पटना राखियों और भाई-बहन के प्यार से जगमगा उठा।


रक्षाबंधन 2025 – जब हॉल में उमड़ी 15 हज़ार बहनों की भीड़

इस बार का रक्षाबंधन पहले से कहीं बड़ा और भव्य रहा। पहले ये कार्यक्रम उनकी कोचिंग में होता था, लेकिन इस साल बहनों की संख्या इतनी बढ़ गई कि खान सर ने पूरे श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल को बुक कर लिया।

सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर डेढ़ बजे तक राखी बांधने का सिलसिला चलता रहा। लम्बी कतार में खड़ी बहनें, हाथों में रंग-बिरंगी राखियाँ और चेहरे पर मुस्कान — माहौल ऐसा था मानो एक परिवार के बीच सबसे बड़ा पर्व मनाया जा रहा हो।


156 डिश वाला मेन्यू – पिज्जा से लेकर गोलगप्पे तक

खान सर सिर्फ पढ़ाने में ही नहीं, बल्कि अपने छात्रों की खुशियों का ख्याल रखने में भी सबसे आगे रहते हैं। राखी के दिन सभी बहनों के लिए उन्होंने 156 तरह के व्यंजन तैयार करवाए थे। पिज्जा, गोलगप्पे, मिठाइयाँ, चाट और न जाने कितने पकवान।

राखी बांधने के बाद बहनों ने जमकर इन व्यंजनों का आनंद लिया। कई लड़कियों ने हंसते हुए कहा — “सर हमें पढ़ाई का ज्ञान तो रोज़ देते हैं, लेकिन आज खाने का भी बड़ा ज्ञान मिल गया!”


जब हाथ का खून रुक गया

राखी बांधने का सिलसिला इतना लंबा था कि दोपहर के करीब खान सर के हाथ में इतनी राखियाँ बंध गईं कि उनका हाथ सुन्न होने लगा। उन्होंने माइक पर हंसते हुए कहा —
“डॉक्टर को बुलाओ, हाथ का खून रुक गया है!”

ये सुनते ही हॉल में ठहाकों की गूंज उठी, लेकिन बहनों के हाथों का प्यार थमा नहीं। हर कोई चाहता था कि वो भी अपने “भाई” की कलाई पर राखी बांध सके।


‘बेस्ट भाई’ का खिताब

लोकल मीडिया ने जब कतार में खड़ी कुछ बहनों से बात की तो उनकी आँखों में चमक और शब्दों में स्नेह साफ झलक रहा था।

एक छात्रा ने कहा, “खान सर सिर्फ बेस्ट टीचर ही नहीं, बेस्ट भाई भी हैं। हम उनकी क्लास में सबसे सुरक्षित महसूस करते हैं।”

दूसरी बहन बोली, “हमारी फीस इतनी कम है कि हम पढ़ाई जारी रख सकते हैं। रक्षाबंधन पर कोर्स में डिस्काउंट देकर उन्होंने हमें और बड़ा तोहफा दिया है।”


भाभी कहाँ हैं?

राखी के इस महापर्व में एक मजेदार पल भी आया। जब स्टेज पर बैठकर खान सर राखियाँ बंधवा रहे थे, तभी कुछ शरारती बहनों ने नीचे से आवाज लगाई —
“सर, भाभी कहाँ हैं? उनको क्यों नहीं लाए?”

खान सर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया —
“आज बहनों का पर्व है या भाभी का? आज तो सिर्फ मेरी बहनों का दिन है!”


साल दर साल बढ़ती परंपरा

अपने टीचिंग करियर की शुरुआत से ही खान सर रक्षाबंधन पर ये आयोजन करते आ रहे हैं। पहले ये कार्यक्रम छोटे स्तर पर होता था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी भव्यता बढ़ती गई।

आज ये स्थिति है कि दुनिया में शायद ही कोई और भाई होगा जो एक ही दिन में हजारों राखियाँ बंधवाता हो और फिर भी हर बहन को स्नेह से धन्यवाद देता हो।


पढ़ाई और रक्षा – दो वादे एक साथ

खान सर का मानना है कि पढ़ाई ही सबसे बड़ी रक्षा है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन वो सिर्फ राखी नहीं बंधवाते, बल्कि बहनों से ये भी वादा करते हैं कि वो उन्हें बेहतरीन शिक्षा देंगे और उनके सपनों को पूरा करने में मदद करेंगे।

यही वजह है कि उनकी छात्राओं के लिए ये दिन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक प्रेरणा का दिन भी बन जाता है।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

इस पूरे आयोजन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें खान सर के दोनों हाथ राखियों से इतने ढक गए हैं कि कलाई का रंग तक दिखाई नहीं देता।

लोग इस वीडियो पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं —
“ये हैं असली भाई!”
“आज के जमाने में ऐसा भाई मिलना मुश्किल है।”
“खान सर को सलाम, जिन्होंने शिक्षा और स्नेह का इतना सुंदर संगम बनाया।”


खान सर – सिर्फ शिक्षक नहीं, एक संस्था

पटना के एक साधारण से क्लासरूम से शुरू हुआ उनका सफर आज लाखों छात्रों के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है। वो अपने हर छात्र को परिवार का हिस्सा मानते हैं।

चाहे शादी हो, परीक्षा का रिजल्ट डे हो, या रक्षाबंधन — खान सर हर मौके को यादगार बनाना जानते हैं।


आखिर में, रक्षाबंधन का असली मतलब यही है — एक-दूसरे की रक्षा का वादा, चाहे वो खून का रिश्ता हो या दिल का। खान सर ने इस परंपरा को एक नई ऊँचाई दी है, जहाँ शिक्षा और संस्कार मिलकर एक मजबूत डोर बनाते हैं।

इस साल का रक्षाबंधन पटना के लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक मिसाल बन गया — कि भाई-बहन का रिश्ता खून से नहीं, बल्कि दिल और विश्वास से बनता है।