इंदौर में मुस्लिम व्यापारियों का बहिष्कार: साम्प्रदायिक माहौल में गरमाता विवाद
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, भोपाल
चुनाव और त्योहारों का मौसम नजदीक आते ही, देश के शांतिपूर्ण वातावरण में सांप्रदायिकता का ज़हर घोलने वाले तत्त्व सक्रिय हो जाते हैं। और यह सब कुछ उन राज्यों में अधिक देखने को मिल रहा है, जहाँ एक खास राजनीतिक दल की सरकार है और जिस पर खुलेआम एक समुदाय को भड़काकर उनमें असुरक्षा की भावना पैदा करने और अपना वोट बैंक पक्का करने का आरोप लगता है। ऐसी ही सरकारों पर यह भी आरोप है कि वे एक ओर ‘मुहम्मद के नाम पर प्रदर्शन’ करने वाले मौलवी को सात पुश्तों की धमकी देकर जेल में डाल देती हैं, वहीं दूसरी ओर बाज़ारों से मुस्लिम व्यापारियों को खदेड़ने और हिंदू दुकानों में काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों को निकालने का अभियान चलाने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है।
मौजूदा समय में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के शीतला बाजार का माहौल यही कहानी बयां कर रहा है। सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियोज़ साफ़ इशारा करते हैं कि यह सब कुछ सरकारी शह पर हो रहा है। यदि ऐसा नहीं होता, तो मुसलमानों के ख़िलाफ़ खुले तौर पर शहर में बैनर लगाकर, मुसलमानों को ‘जिहादी मानसिकता’ का बताकर उनका बहिष्कार नहीं किया जाता। हद तो यह है कि विधायक भी इस काम में लगे हैं। केवल ‘इब्राहिम’ नाम सुनते ही झूले वालों को मेला एरिया से जाने को मजबूर किया जा रहा है, जैसा कि माँ कनकेश्वरी गरबा पंडाल में हुआ, जहाँ विधायक रमेश मेंदोला के निर्देश पर ग़ैर-हिंदू की दुकानें और झूले हटाए गए।
विरोध और प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया में चलने वाले वीडियो में ऐसे कुकृत्यों को बढ़ावा देने के लिए विवादास्पद बैनर-पोस्टर को पश्चिमी संगीत (पाश्चात म्यूज़िक) लगाकर प्रचारित किया जा रहा है। जबकि इसकी प्रतिक्रिया में लोग इसे इंदौर की पुरानी गंगा-जमुनी तहज़ीब और परंपरा के विपरीत बता रहे हैं। मुसलमानों का बहिष्कार करने वालों को समझाने का प्रयास भी किया जा रहा है।
https://www.facebook.com/reel/1475603327054367शीतला बाजार में जब माहौल का जायजा लेने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहुँचे, तो पुलिस ने उन्हें वाहन से आगे जाने से रोक दिया, जिसके बाद वह कांग्रेसजनों के साथ पैदल ही सराफा थाने पहुँचे। दिग्विजय सिंह, विधायक पुत्र एकलव्य सिंह गौड़ के उस बयान के विरोध में पहुँचे थे, जिसमें बाजार से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने की बात कही गई थी। इस दौरान पुलिस द्वारा उन्हें रोके जाने का वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है।
इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई के जवाब में, प्रतिक्रिया होनी स्वाभाविक थी। अब मुसलमानों का एक वर्ग इंदौर के मुस्लिम बहुल बाज़ारों को बढ़ावा देने के लिए वहाँ से खरीदारी करने के लिए मुसलमानों को प्रोत्साहित कर रहा है। ऐसे आह्वान सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं, जिसमें सैयद शहजाद अली जैसे लोग अपने खजराना के व्यापार को बढ़ावा देने की बात कह रहे हैं और दिल्ली, मुंबई, सूरत से होलसेल कपड़ा लाने का सुझाव दे रहे हैं। वहीं, रफ़ीक आज़ाद खजराना की पार्षद रूबीना इक़बाल की “दम” दिखाने के लिए प्रशंसा कर रहे हैं और अन्य मुस्लिम नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं।
हालांकि, बिगाड़ पैदा करने वालों को समझाने वाले और इस तरह की हरकतों को गलत बताने वाले लोग दोनों तरफ हैं। राहुल तायडे जैसे लोग सोशल मीडिया पर टिप्पणी कर रहे हैं कि “इनका राज चल रहा है क्या, देश में संविधान लागू है, ऐसी दादागिरी नहीं चलेगी, ये देश सबका है हिंदू मुस्लिम सिख इसाई आपस में है भाई भाई।” इसके अलावा, सलीम शेख ने विधायक पुत्र के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें यह भी बोलना चाहिए था कि शीतला माता बाजार के दुकानदार की दुकान से कोई भी मुस्लिम समाज खरीदी नहीं करेगा और उनकी दुकानों की चौखट पर कदम नहीं रखेगा।
चूँकि आरोप है कि यह सब कुछ सरकारी संरक्षण में हो रहा है, ऐसे में यह विवाद सुलझने की बजाए और तूल पकड़ सकता है। हालांकि, जो लोग आज सत्ता में हैं, उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि उनकी सत्ता भी दूसरों की तरह स्थायी नहीं है। अगर तख्तापलट हुआ, तो आज का माहौल भी पूरी तरह से पलट जाएगा।
क्या आपको लगता है कि स्थानीय नेताओं द्वारा इस तरह के बहिष्कार का आह्वान, शहर की सामाजिक समरसता को स्थायी रूप से नुकसान पहुँचाएगा?

