लोकतंत्र में संवाद सर्वोपरि, युवाओं के अधिकारों की उपेक्षा ठीक नहीं: मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी
लखनऊ
लखनऊ के प्रमुख शिया विद्वान और लेखक मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने देश के वर्तमान हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने की घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मौलाना ज़ैदी का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता चुना जाना चाहिए। प्रशासन का तर्क है कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश और स्वास्थ्य कारणों से हुई। वहीं आंदोलनकारियों ने पुलिस के इस कदम का कड़ा विरोध किया है।
मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने भारतीय संविधान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि हमारा देश हर नागरिक को शांति से अपनी बात कहने का हक देता है। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब सरकार और जनता के बीच भरोसा बना रहे। बल प्रयोग से किसी भी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। न्याय और जनविश्वास ही किसी भी व्यवस्था की असली ताकत होते हैं।
युवाओं के मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत
शिया विद्वान ने देश के युवाओं के रोजगार और शिक्षा के मुद्दों पर बात की। उनका मानना है कि जब युवा अपने बेहतर भविष्य और अधिकारों की मांग कर रहे हों, तो सरकार को उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए। लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाना किसी भी संकट का हल नहीं हो सकता। संवाद का महत्व हमेशा प्रशासनिक सख्ती से ऊपर होना चाहिए।
मौलाना ज़ैदी ने हाल ही में चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत डिपके का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसी आंदोलन को उसके नाम या लोकप्रियता से नहीं आंका जाना चाहिए। महत्वपूर्ण यह है कि आंदोलन किन मुद्दों पर हो रहा है और उसका तरीका कितना शांतिपूर्ण है। खबरों के मुताबिक सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद अभिजीत डिपके ने खुद भूख हड़ताल पर बैठने का फैसला किया है।
संविधान के दायरे में हो हर सुधार
मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने साफ किया कि उनका मकसद किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है। वह केवल उन बुनियादी मांगों के साथ हैं जो देश के विकास के लिए जरूरी हैं। शिक्षा, न्याय और ईमानदारी जैसे विषयों पर हर नागरिक को संवेदनशील होना चाहिए। करोड़ों युवाओं का भविष्य आज देश के सामने सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल है।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक मंचों और शासन से अपील की कि वे आपस में मिलकर रास्ता निकालें। मतभेदों को दूर करने का एकमात्र जरिया संवैधानिक प्रक्रिया और आपसी बातचीत ही है। किसी भी तरह का गतिरोध देश के विकास में बाधा बनता है।
शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील
आंदोलन कर रहे युवाओं से भी मौलाना ज़ैदी ने एक विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रकट करते समय कानून का सम्मान करना बेहद जरूरी है। अनुशासन और शांति के बिना कोई भी बदलाव लंबे समय तक टिक नहीं सकता। संयम रखना और लोकतांत्रिक मर्यादा में रहना ही सबसे बड़ा हथियार है।
अपने संदेश के आखिर में उन्होंने कहा कि देश तभी मजबूत बनता है जब सरकार अपनी जनता के प्रति संवेदनशील हो और जनता देश के कानूनों का आदर करे। लोकतंत्र की असली जीत किसी एक पक्ष की हार या जीत में नहीं है। असली सफलता तब है जब संवाद के जरिए सबको न्याय मिले और देश प्रगति की राह पर आगे बढ़े।

