News

मिडिल ईस्ट में भीषण युद्ध: अमेरिका का ईरान पर हमला, कुवैत और बहरीन दहल उठे

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, रियाद

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका ने ईरान पर बड़े हवाई हमले शुरू कर दिए हैं. अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी को सजा देने के लिए की गई है. हाल ही में जॉर्डन में एक बड़ा हमला हुआ था. उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी. तभी से अमेरिका बदले की ताक में था. अब इस नए हमले के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की लपटें फैल गई हैं. कुवैत और बहरीन जैसे देश भी इस युद्ध की चपेट में आ चुके हैं.

इस पूरे विवाद में अब तक 16 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं. इसके अलावा 430 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं. खाड़ी देशों में लगातार बज रहे सायरन और आसमान में उड़ती मिसाइलें एक बड़े संकट का संकेत दे रही हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच आर पार की लड़ाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने इस हवाई हमले की पुष्टि की है. वाशिंगटन का दावा है कि वे सिर्फ अपने सैनिकों की मौत का बदला ले रहे हैं. दूसरी तरफ ईरान भी शांत बैठने के मूड में नहीं दिख रहा है. ईरान के एक सांसद ने अमेरिकी सैनिकों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि यह संदेश देश के नए सर्वोच्च नेता की तरफ से आया है. इस चेतावनी के बाद खाड़ी में तैनात अमेरिकी सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने एक और बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि अमेरिकी सेना ने उनके एक निर्माणाधीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमला किया है. यह प्लांट देश के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में स्थित दारखोविन में है. ईरानी अधिकारियों के अनुसार अमेरिका ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए इस प्लांट पर कई मिसाइलें दागीं. इस दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है. परमाणु संयंत्र पर हमला होने से स्थिति और ज्यादा संवेदनशील हो गई है.

कुवैत और बहरीन पर ईरान का पलटवार

अमेरिका के इन हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी के अन्य देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. कुवैत के ऊपर ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों की बरसात हो रही है. कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली यानी एयर डिफेंस सिस्टम लगातार आ रहे हमलों को रोकने में जुटा है.

कुवैत में पानी और बिजली संकट पैदा करने की कोशिश की जा रही है. ईरान ने लगातार दूसरे दिन कुवैत के एक प्रमुख बिजली और जल डिस्टिलेशन प्लांट को निशाना बनाया. इस हमले के बाद प्लांट के कई हिस्सों में भीषण आग लग गई. कुवैती सरकार ने इसे ईरान की कायराना हरकत बताया है. दमकल विभाग की टीमें आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं. कुवैत के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल अहमद अल सबाह ने अल अदान अस्पताल का दौरा भी किया. उन्होंने इस हमले में घायल हुए नागरिकों से मुलाकात की. उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिए कि घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए.

पड़ोसी देश बहरीन में भी हालात बेहद खराब हैं. बहरीन की राजधानी मनामा में रविवार को अचानक हवाई हमले के सायरन गूंज उठे. सायरन की आवाज सुनते ही लोगों में दहशत फैल गई. बहरीन के गृह मंत्रालय ने नागरिकों के लिए एक जरूरी एडवाइजरी जारी की है. सरकार ने लोगों से शांत रहने की अपील की है. साथ ही सभी को तुरंत नजदीकी सुरक्षित स्थानों या बंकरों में जाने के लिए कहा गया है.

हॉरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों को रोका

इस बीच समुद्र में भी टकराव शुरू हो गया है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने हॉरमुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से गुजरने वाले दो जहाजों को रोक लिया है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

ईरान का कहना है कि कुल चार जहाज बिना अनुमति के इस असुरक्षित रास्ते से निकलने की कोशिश कर रहे थे. इन जहाजों को अमेरिकी सेना का समर्थन हासिल था. ईरानी सेना के अनुसार इस दौरान दो जहाजों के साथ दुर्घटना हो गई और उन्हें वहीं रोक दिया गया. बाकी बचे दो जहाज अपना रास्ता बदलकर वापस लौट गए. इस कार्रवाई से साफ है कि ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति के इस सबसे बड़े रास्ते को पूरी तरह बंद करने की कोशिश कर रहा है. अगर यह रास्ता बंद होता है तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं.

जॉर्डन में दूतावास की चेतावनी और सुरक्षा अलर्ट

युद्ध की इस आग के बीच जॉर्डन से विरोधाभासी खबरें आ रही हैं. अम्मान में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है. दूतावास ने कहा कि जॉर्डन सरकार ने तटीय शहर अकाबा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और बंदरगाह को खाली करा लिया है. दूतावास ने इसके पीछे एक विशिष्ट और विश्वसनीय खतरे का हवाला दिया. उन्होंने अमेरिकी नागरिकों को इन जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी है. साथ ही अमेरिकी सेना के ठिकानों के पास न जाने को कहा है.

हालांकि जॉर्डन सरकार ने इस दावे का पूरी तरह खंडन किया है. जॉर्डन सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद अल मोमानी ने कहा कि हवाई अड्डे या बंदरगाह को खाली करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है. दोनों ही जगहें पूरी तरह सामान्य रूप से काम कर रही हैं. सुरक्षा एजेंसियों को पिछले कुछ घंटों में किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं मिला है. फिर भी सुरक्षा बल हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे हैं.

ईरान के भीतर भी बढ़ा आंतरिक तनाव

इस बाहरी युद्ध के बीच ईरान के अंदरूनी हालात भी ठीक नहीं हैं. ईरान की न्यायपालिका ने रविवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए दो प्रदर्शनकारियों को फांसी दे दी. इन दोनों पुरुषों के नाम इरफान इस्फ़ंदियारी और गोल मोहम्मद मोहम्मदी बताए गए हैं.

इन दोनों पर आर्थिक समस्याओं को लेकर शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा फैलाने का आरोप था. कोर्ट के अनुसार इन लोगों ने पुलिस अधिकारियों को सड़क के साइन बोर्ड से बांधा था. इसके बाद उन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई थी. इस फांसी के बाद ईरान के भीतर भी मानवाधिकारों को लेकर बहस छिड़ गई है. एक तरफ देश बाहरी मोर्चे पर युद्ध लड़ रहा है और दूसरी तरफ अंदरूनी विद्रोह को दबाने के लिए कड़े कदम उठा रहा है.

मिडिल ईस्ट का यह संकट अब केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रहा. इसमें अमेरिका, ईरान, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे कई देश शामिल हो चुके हैं. आने वाले दिन इस पूरे क्षेत्र के भविष्य के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं.