उज्जैन की 650 साल पुरानी शाही मस्जिद पर विवाद, सड़क पर उतरे मुसलमान
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली, भोपाल
मध्य प्रदेश के उज्जैन में 650 साल पुरानी शाही मस्जिद के एक हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने के मामले ने 28 सितंबर को तनाव का रूप ले लिया। मस्जिद के आसपास बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग जमा हो गए। प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में लोगों ने रातभर धरना दिया। सोमवार सुबह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। इस दौरान पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
यह विवाद उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण की योजना से जुड़ा है। प्रशासन इस परियोजना के लिए कई इमारतों और निर्माणों को हटाने की कार्रवाई कर रहा है। इसी योजना के तहत ऐतिहासिक शाही मस्जिद का एक हिस्सा भी सड़क की प्रस्तावित सीमा में आ रहा है। हालांकि, मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक इमारत का मामला नहीं है, बल्कि उनकी धार्मिक पहचान, आस्था और सदियों पुरानी विरासत से जुड़ा सवाल है।
For the Muslims of Ujjain, this was not merely a structure—it was a 600-year-old heritage, a living testament to their history, faith and belonging. Yet, when they stood to protect it, the brutality unleashed upon them and the manner in which they were forced to demolish a portion of their own historic mosque was deeply painful and disturbing. What happened was not merely the destruction of a wall; it was an assault on memory, heritage and dignity. For a State entrusted with protecting its citizens and their heritage, such treatment is profoundly shameful.
— Aasif Mujtaba (@MujtabaAasif) September 28, 2026
मस्जिद के एक हिस्से को हटाने को लेकर स्थानीय मुस्लिम समुदाय में पहले से ही नाराजगी थी। समुदाय के लोगों ने प्रशासन से बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश की थी। उज्जैन के समाजसेवी मोहम्मद यूनुस के मुताबिक, रात में काजी साहब और प्रतिनिधि समिति ने प्रशासन के साथ बातचीत में तीन फीट तक हिस्सा हटाने पर सहमति दी थी। उनका कहना था कि इसके तहत काम शुरू होना था, लेकिन प्रशासन की ओर से पहले ही जेसीबी बुला लिए जाने से युवाओं के बीच गलतफहमी पैदा हो गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा हो गए।
मोहम्मद यूनुस के इस बयान से साफ होता है कि प्रशासन और मस्जिद से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बावजूद जमीनी स्तर पर संवाद की कमी बनी हुई थी। समुदाय के कई युवाओं को आशंका थी कि मस्जिद को उनकी सहमति के बिना नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इसी आशंका ने विरोध को और तेज कर दिया। हालांकि, बातचीत में बनी सहमति और मौके पर मौजूद लोगों की अपेक्षाओं के बीच अंतर को लेकर स्थिति तनावपूर्ण होती चली गई।
कांग्रेस नेता और भोपाल के पूर्व विधायक आरिफ मसूद ने इस मामले में प्रशासन से संवेदनशीलता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि उज्जैन में हजारों लोग अपनी 650 साल पुरानी धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर बैठे थे। उनके अनुसार, पिछले दो दिनों से लगभग 8,000 से 10,000 लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल थे। इनमें शेर काजी, खालिक उर रहमान और प्रतिनिधि समिति के अन्य सदस्य भी मौजूद थे।
आरिफ मसूद के मुताबिक, प्रशासन के साथ बातचीत के दौरान दुकानों के ऊपर बने छज्जों को हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन मस्जिद के हिस्से को लेकर कोई अंतिम सहमति नहीं बनी थी। उन्होंने लोगों से संयम बरतने की अपील की और पुलिस से कहा कि छज्जे हटाने की कार्रवाई के दौरान किसी तरह की जबरदस्ती या बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि संवेदनशील धार्मिक मामलों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
📍उज्जैन शाही मस्जिद के एक हिस्से को गिराए जाने को लेकर मचे तनाव के दौरान, एक मुस्लिम व्यक्ति का पीछा किया गया और बेरहमी से पीटा गया। वह लगातार कहता रहा, "मैंने कुछ नहीं किया है।" इतनी बुरी तरह पीटे जाने के बावजूद उसे छोड़ा नहीं गया! https://t.co/BpycNzBR0z
— Shaikh Javed (@ShaikhSahab__) September 28, 2026
मस्जिद के मामले को लेकर कानूनी लड़ाई भी चल रही थी। मस्जिद पक्ष ने प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत में पहले दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। 28 सितंबर को मस्जिद पक्ष और नगर निगम के बीच समझौते की जानकारी अदालत को दी गई, जिसके बाद मामले से जुड़ी दो अपीलों का निपटारा कर दिया गया।
हालांकि, अदालत की कार्यवाही और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच स्थानीय समुदाय की भावनाएं लगातार महत्वपूर्ण बनी रहीं। लोगों की मांग थी कि सड़क चौड़ीकरण के लिए किसी वैकल्पिक रास्ते या दूसरी ओर की जमीन का इस्तेमाल किया जाए, ताकि ऐतिहासिक मस्जिद को नुकसान न पहुंचे। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस मामले में प्रशासन से जनभावनाओं और ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए आवश्यक जमीन दूसरी ओर से ली जा सकती है।
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर उज्जैन शाही मस्जिद को तोड़ने की प्रशासनिक कवायद को थोड़ा संवेदनशील होना चाहिये। 600 साल पुरानी धरोहर को सिर्फ सड़क चौड़ीकरण और विकास के नाम पर ध्वस्त कर देना तो नफ़रत की पराकाष्ठा है। मेरे संज्ञान में आया है कि मामला जब न्यायालय में लंबित है तो फिर प्रशासन बार बार मस्जिद की घेराबंदी करके आख़िर क्या संदेशा देना चाहता है ? उज्जैन के हज़ारों युवा लगातार इस मुद्दे पर आवाज़ उठा रहे हैं। उज्जैन प्रशासन से मेरा अनुरोध है कि जन भावनाओं का सम्मान करिये और सड़क चौड़ीकरण के लिये आवश्यक ज़मीन दूसरी साइड से ले लीजिये। इतनी एैतिहासिक धरोहर को तोड़ा जाना कहीं से भी सामान्य घटना नहीं मानी जायेगी। @DrMohanYadav51
— Imran Pratapgarhi (@ShayarImran) September 28, 2026
इमरान प्रतापगढ़ी ने मस्जिद के मामले में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और कहा कि जब मामला अदालत में विचाराधीन था, तब मस्जिद की बार-बार घेराबंदी किए जाने से लोगों के बीच चिंता बढ़ सकती है। उन्होंने उज्जैन प्रशासन से आग्रह किया कि वह स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझे और विवाद को बातचीत से सुलझाने का प्रयास करे।
उज्जैन के मुस्लिम समुदाय में इस मामले को लेकर अविश्वास की एक बड़ी वजह धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के नाम पर होने वाली कार्रवाइयों को लेकर बनी आशंकाएं भी हैं। समुदाय के कुछ लोगों का मानना है कि देश के विभिन्न हिस्सों में मस्जिदों और दरगाहों को हटाने की घटनाओं के कारण ऐतिहासिक शाही मस्जिद को लेकर भी उन्हें चिंता है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर हुई कार्रवाइयों की परिस्थितियां और कानूनी आधार अलग-अलग हो सकते हैं। उज्जैन के मामले में भी प्रशासन की सड़क चौड़ीकरण योजना और मस्जिद की ऐतिहासिक व धार्मिक अहमियत के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उज्जैन में शाही मस्जिद पर कार्रवाई के बीच आंसू गैस का धुआँ चारों ओर फैला है, लेकिन धुएँ के बीच खड़ा यह शख्स जैसे कह रहा हो—डरकर पीछे हटने का सवाल ही नहीं। https://t.co/v0sDpIA2Tq
— The Muslim Matter India (@TheMuslimMatter) September 28, 2026
घटना के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए गए। इनमें पुलिस की कार्रवाई, आंसू गैस के इस्तेमाल और लोगों की भीड़ से जुड़े दृश्य प्रसारित हुए। कुछ वीडियो में एक व्यक्ति की पिटाई किए जाने के आरोप भी लगाए गए। इन घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए। वहीं, समाचार एजेंसियों की रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पत्थरबाजी किए जाने और पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई। इन घटनाओं की स्वतंत्र जांच के बिना किसी एक पक्ष के सभी आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई ने स्थानीय लोगों को भावनात्मक रूप से भी प्रभावित किया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए दृश्यों और पोस्ट में कुछ लोगों को मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने के दौरान भावुक होते हुए दिखाया गया। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि मस्जिद कमेटी के सदस्यों ने प्रशासनिक कार्रवाई से पहले अपने हाथों से छज्जे को हटाना शुरू किया, ताकि शहर में तनाव और न बढ़े। इन दृश्यों ने मुस्लिम समुदाय के बीच मस्जिद से जुड़े ऐतिहासिक और धार्मिक लगाव को सामने लाया।
सोशल मीडिया पर पूर्व विधायक आरिफ मसूद, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और अन्य लोगों की प्रतिक्रियाओं के साथ शाही मस्जिद को लेकर बहस तेज हो गई। तुर्की के मीडिया संस्थान टीआरटी वर्ल्ड की रिपोर्टिंग का भी मूल सामग्री में उल्लेख है। इस तरह स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विवाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया की चर्चा का हिस्सा बन गया। हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित सभी दावों और तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
Protests erupted in Ujjain, India, as members of the local Muslim community took to the streets on the night of September 26 to protest the proposed destruction of parts of the 600-year-old Shahi Mosque by Indian authorities for an alleged road widening project. Police fired tear gas at protesters after the protests escalated into stone-pelting. Muslim religious sites in India have been disproportionately targeted under the pretext of road-widening projects, sparking concerns over minority rights and equal application of the law. Local sources say at least 2,100 mosques, madrasas and shrines have been demolished across India since 2010
— TRT World (@trtworld) September 28, 2026
इस विवाद का एक पहलू उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियां भी हैं। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए शहर में सड़क चौड़ीकरण और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम किए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, परियोजना का उद्देश्य यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को बेहतर बनाना है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण की व्यापक योजना के तहत शहर में 272 निर्माणों को हटाने या उनमें बदलाव करने के लिए चिह्नित किया गया है।
लेकिन विकास परियोजनाओं के साथ धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण का सवाल भी जुड़ा हुआ है। उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने इस बहस को फिर सामने ला दिया है कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विकास के दौरान स्थानीय समुदायों की धार्मिक भावनाओं और विरासत को किस तरह ध्यान में रखा जाए। किसी भी परियोजना में कानूनी प्रक्रिया, पारदर्शिता और प्रभावित लोगों के साथ संवाद की भूमिका अहम होती है।
#WATCH मध्य प्रदेश: उज्जैन में शाही मस्जिद के आस-पास के इलाके में तनाव बना हुआ है, क्योंकि भीड़ और पुलिस के बीच झड़प जारी है। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। यहां पत्थरबाज़ी भी देखी गई। यह झड़प आज सुबह तब शुरू हुई जब लोगों का एक बड़ा समूह उस जगह पर पुलिस से भिड़ गया, जहां सड़क चौड़ी करने के प्रोजेक्ट के तहत शाही मस्जिद का एक हिस्सा गिराया जाना है।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 28, 2026
28 सितंबर को मस्जिद कमेटी और नगर निगम के बीच समझौते की जानकारी सामने आने के बाद अदालत ने संबंधित अपीलों का निपटारा कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया में कमेटी के सदस्यों की भागीदारी भी रही। हालांकि, इस घटनाक्रम से पहले हुई झड़पों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठे सवालों ने मामले को संवेदनशील बना दिया।
उज्जैन की शाही मस्जिद के जिस हिस्से पर प्रशासन बुलडोजर चलाने जा रहा था मस्जिद कमेटी ने उस हिस्से को ख़ुद अपने हाथों से तोड़ना शुरू कर दिया है, 650 साल पुरानी मस्जिद के कुछ हिस्से को आज मुसलमान ख़ुद अपने हाथों से तोड़ रहा है क्योंकि प्रशासन 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ महाकुंभ मेले के लिए सड़कों का चौड़ीकरण प्लान लेकर आया है और सड़कें चौड़ी करने के लिए मस्जिद के कुछ हिस्से को भी चिह्नित किया हैं, मस्जिद कमेटी प्रशासन के आदेश के खिलाफ़ हाइकोर्ट पहुंची लेकिन HC ने मस्जिद पक्ष की अपीलों को खारिज कर दिया। आज सुबह प्रशासन मस्जिद के कुछ हिस्से पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर रहा था लेकिन मुसलमान इकट्ठा हुआ तो रिपोर्ट के अनुसार भीड़ पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और भगा दिया, अब मस्जिद कमेटी ने शहर की फ़िज़ा ख़राब न हो इसलिए प्रशासन के आदेश को ऊपर रखते हुए अपने ही हाथों से 650 साल पुरानी शाही मस्जिद के छज्जे को हटाना शुरू कर दिया है, जिस वक़्त कमेटी के लोग छज्जे पर हथौड़ा चला रहे थे उनके हाथ कांप रहे थे और दिल रो रहा था, उनके पास कलेजा था इसलिए अपने ही हाथों से मस्जिद के कुछ हिस्से को हटाया जा रहा है।
— Zakir Ali Tyagi (@ZakirAliTyagi) September 28, 2026
उज्जैन की शाही मस्जिद का विवाद केवल सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं है। यह ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक आस्था, प्रशासनिक निर्णय और नागरिकों के भरोसे से जुड़ा मामला बन गया है। मुस्लिम समुदाय के कई लोगों के लिए मस्जिद का हिस्सा हटना अपनी पुरानी विरासत से जुड़ी भावनाओं को चोट पहुंचाने जैसा है। वहीं, प्रशासन के सामने सिंहस्थ की तैयारियों के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित करने की जिम्मेदारी है। ऐसे में जरूरी है कि आगे की कार्रवाई कानून के दायरे में हो, लोगों की शिकायतों को सुना जाए और किसी भी समुदाय के भीतर असुरक्षा या भेदभाव की भावना को बढ़ने से रोका जाए।
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