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Donald Trump की सख्त चेतावनी, तेहरान पर बढ़ा दबाव

वॉशिंगटन से एक बार फिर पश्चिम एशिया की राजनीति में तीखे संकेत मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि वह परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता, तो उसे “बहुत ही दर्दनाक” परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

व्हाइट हाउस में इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ बैठक के एक दिन बाद ट्रम्प ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी वार्ताओं का नतीजा “अगले एक महीने में” सामने आ सकता है। उन्होंने दो टूक कहा, “हमें समझौता करना ही होगा, वरना यह ईरान के लिए बेहद त्रासद साबित होगा। मैं ऐसा नहीं चाहता, लेकिन समझौता ज़रूरी है।”


“फेज़ टू बहुत कठिन होगा”

ट्रम्प ने संकेत दिया कि यदि बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका “फेज़ टू” की ओर बढ़ेगा, जो ईरान के लिए और अधिक कठोर होगा। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष जुलाई में इज़रायल और ईरान के बीच 12 दिन चले संघर्ष के दौरान अमेरिका ने तेहरान की परमाणु सुविधाओं पर सैन्य हमले किए थे।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका मध्य पूर्व में दबाव बढ़ाने के लिए दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को भेजने पर भी विचार कर रहा है। यह कदम स्पष्ट रूप से ईरान को कड़ा संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है।


नेतन्याहू की शंका बरकरार

वॉशिंगटन दौरे पर आए नेतन्याहू ने ट्रम्प पर दबाव डाला कि परमाणु वार्ता में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाए।

हालांकि ट्रम्प ने वार्ता जारी रखने पर जोर दिया, लेकिन नेतन्याहू ने किसी भी संभावित समझौते की गुणवत्ता पर “सामान्य संदेह” व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैं आपसे छिपाऊंगा नहीं कि मुझे ईरान के साथ किसी भी समझौते की गुणवत्ता को लेकर शंका है।”

नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और हमास, यमन के हूती विद्रोहियों तथा लेबनान के हिज़्बुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन के मुद्दे शामिल होने चाहिए। उनके शब्दों में, “यह केवल परमाणु मुद्दा नहीं है।”


खामेनेई और तेहरान का रुख

दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के नेतृत्व में तेहरान ने अब तक वार्ता के दायरे को परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रखने पर जोर दिया है। ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा और वह “अत्यधिक मांगों” के सामने झुकेगा नहीं।

ईरान ने हाल ही में ओमान में हुई बातचीत के बाद भी साफ किया कि सैन्य दबाव या अमेरिकी तैनाती उसे डराने वाली नहीं है।


ट्रम्प का व्यक्तिगत समर्थन

ईरान मुद्दे पर मतभेदों के बावजूद ट्रम्प ने नेतन्याहू के प्रति व्यक्तिगत समर्थन का प्रदर्शन किया। उन्होंने इजरायली राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग की आलोचना की, जिन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे नेतन्याहू को माफी देने से इनकार किया है। ट्रम्प ने कहा कि ऐसे निर्णय पर “शर्म आनी चाहिए।”


सैन्य विकल्प की आहट

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की बयानबाज़ी केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं है। पिछले महीने ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर कड़े दमन के बाद ट्रम्प कई बार संभावित सैन्य कार्रवाई का संकेत दे चुके हैं।

हालांकि, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पिछले सप्ताह ओमान में वार्ता फिर शुरू हुई है, लेकिन पिछला दौर इज़रायल-ईरान युद्ध और अमेरिकी हमलों के कारण बाधित हो गया था।

अब सवाल यह है कि क्या अगले एक महीने में कोई ठोस समझौता सामने आएगा या पश्चिम एशिया एक बार फिर तनाव के नए दौर में प्रवेश करेगा। फिलहाल, ट्रम्प की चेतावनी और नेतन्याहू की शंका ने इस क्षेत्रीय समीकरण को और अधिक जटिल बना दिया है।