NewsTOP STORIES

दो-तिहाई जनादेश के साथ बीएनपी की सरकार, क्या बदलेगा बांग्लादेश का सियासी नक्शा?

बांग्लादेश की सियासत में 2024 की छात्र-नेतृत्व वाली जनविद्रोह के बाद हुए पहले आम चुनावों ने सत्ता की दिशा बदल दी है। तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 299 में से कम से कम 209 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया है। यह स्पष्ट है कि अब देश की कमान तारिक रहमान के हाथों में होगी।

चुनाव आयोग के मुताबिक, शेरपुर-3 सीट पर एक प्रत्याशी के निधन के कारण मतदान स्थगित रहा, जबकि बाकी 299 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक जनादेश को पिछले 17 वर्षों में “सबसे स्वतंत्र और पारदर्शी” चुनाव के रूप में देखा जा रहा है।


जमात-ए-इस्लामी की चौंकाने वाली वापसी

15 वर्षों तक प्रतिबंध और राजनीतिक हाशिये का सामना करने वाली जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश ने भी 68 सीटें जीतकर मजबूत वापसी की है। पार्टी अब संसद में सबसे प्रभावी विपक्ष के रूप में उभरी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जमात की संगठनात्मक मजबूती उसे एक “सक्रिय और अनुशासित विपक्ष” की भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगी, जिससे संसदीय संतुलन कायम रहेगा।


‘जुलाई नेशनल चार्टर’ और संवैधानिक बदलाव

चुनाव के साथ कराए गए जनमत-संग्रह में अधिकांश मतदाताओं ने ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ के पक्ष में मतदान किया। इस चार्टर के प्रमुख बिंदु हैं:

  • प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा
  • राष्ट्रपति के अधिकारों में वृद्धि
  • न्यायपालिका की अधिक स्वतंत्रता
  • संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना

बीएनपी ने अपने घोषणापत्र में इस चार्टर को लागू करने का वादा किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह लागू होता है तो बांग्लादेश की शासन प्रणाली में संरचनात्मक परिवर्तन संभव हैं।


तारिक रहमान की वापसी और प्राथमिकताएं

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान लगभग दो दशक तक ब्रिटेन में स्व-निर्वासन में रहे। पिछले वर्ष उनकी वापसी के बाद पार्टी नेतृत्व उनके हाथों में आया।

हालिया इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि नई सरकार की प्राथमिकताएं होंगी:

  • पूर्व शासकों का जवाबदेह बनाना
  • युवाओं की राजनीतिक मांगों को प्राथमिकता
  • व्यापक आर्थिक सुधार

संविधान क्या कहता है?

बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 55 और 56 के अनुसार:

  • राष्ट्रपति उस सांसद को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे जिसे संसद में बहुमत का समर्थन प्राप्त हो।
  • मंत्रिमंडल प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कार्य करेगा और सामूहिक रूप से संसद के प्रति उत्तरदायी होगा।
  • मंत्रिमंडल के अधिकांश सदस्य संसद सदस्य होंगे।

राजपत्र अधिसूचना जारी होने के बाद सांसद शपथ लेंगे और फिर राष्ट्रपति औपचारिक रूप से नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी करेंगे।


राष्ट्रीय सरकार का वादा

बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने संकेत दिया है कि पार्टी अकेले सत्ता नहीं चलाएगी, बल्कि “फासीवाद-विरोधी आंदोलन” में शामिल सहयोगियों के साथ सहमति के आधार पर राष्ट्रीय सरकार बनाएगी।

सूत्रों के मुताबिक, 15 या 16 फरवरी को सांसदों का शपथ ग्रहण और 17 या 18 फरवरी को मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण संभव है—यानी रमज़ान से पहले नई सरकार औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल सकती है।


जनता की उम्मीदें और चुनौतियां

करीब 59.44 प्रतिशत मतदान ने यह संकेत दिया है कि जनता बदलाव चाहती है। अब सबसे बड़ी परीक्षा होगी—क्या नई सरकार राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक पुनरुद्धार और संस्थागत सुधारों को जमीन पर उतार पाएगी?

दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आ रही बीएनपी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती वादों को नीतिगत बदलाव में बदलने की होगी।