हज 2026 में दवा पहुंचाएंगे ड्रोन
मक्का/नई दिल्ली:
हज 2026 सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं होगी, बल्कि तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से भी एक नया अध्याय लिखेगी। इस बार सऊदी अरब हज के दौरान दवाएं और मेडिकल सैंपल पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करने जा रहा है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन लाखों जायरीन के लिए राहत लेकर आएगी जो बुजुर्ग हैं, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं या आपात स्थिति में तुरंत इलाज की जरूरत महसूस कर सकते हैं।
अब तक हज के दौरान किसी मरीज तक जरूरी दवा या मेडिकल सैंपल पहुंचाने में जमीनी रास्ते से करीब 90 मिनट तक लग जाते थे। भीड़, लंबी दूरी और सुरक्षा व्यवस्था के कारण कई बार देरी हो जाती थी। लेकिन अब यही काम छह से सात मिनट में पूरा हो सकेगा। यानी इलाज की रफ्तार बढ़ेगी और इमरजेंसी में मरीज को जल्दी मदद मिल सकेगी।
हालांकि इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। खासकर उन हाजियों के लिए जो अपने साथ ऐसी दवाएं लेकर जाएंगे जिनमें मादक या मनोवैज्ञानिक तत्व शामिल होते हैं। सऊदी प्रशासन ने इसके लिए साफ नियम तय किए हैं।
सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि हज 2026 के दौरान ड्रोन सिर्फ प्रयोग के तौर पर नहीं उड़ेंगे, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा बनेंगे। ये ड्रोन मक्का की मस्जिद अल हरम, मदीना की मस्जिद ए नबवी और हज के प्रमुख स्थलों मीना, अराफात और मुजदलिफा में दवाएं और मेडिकल सैंपल पहुंचाएंगे।
हर साल हज में दुनिया भर से लाखों लोग पहुंचते हैं। लंबी पैदल यात्रा, तेज गर्मी और भारी भीड़ के बीच कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं अचानक सामने आती हैं। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, सांस लेने में परेशानी, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियां आम होती हैं। ऐसे हालात में समय पर दवा पहुंचना किसी की जान बचा सकता है।
यही वजह है कि सऊदी अरब ने स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक को शामिल करने का फैसला किया है। सऊदी स्वास्थ्य मंत्री फहद अल जलाजेल के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर पिछले दो वर्षों से काम चल रहा था। ड्रोन की उड़ान, सुरक्षित लैंडिंग और तेज गर्मी में उनकी क्षमता को लेकर लगातार परीक्षण किए गए।
सऊदी प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हज के मौसम में तापमान काफी ऊंचा रहता है। कई दवाएं ऐसी होती हैं जिन्हें एक तय तापमान में रखना जरूरी होता है। इसी वजह से इन ड्रोन में खास कूलिंग सिस्टम लगाया गया है ताकि तापमान संवेदनशील दवाएं सुरक्षित रह सकें।
फहद अल जलाजेल ने कहा कि इस तकनीक का मकसद सिर्फ सुविधा देना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य हज के दौरान मेडिकल सप्लाई को तेज और भरोसेमंद बनाना है। पहले जहां दवा पहुंचाने में डेढ़ घंटे तक लग जाते थे, वहीं अब छह मिनट में जरूरी सामान अस्पताल या हेल्थ सेंटर तक पहुंच सकेगा।
इस नई व्यवस्था का संचालन मक्का हेल्थ क्लस्टर और नेशनल यूनिफाइड प्रोक्योरमेंट कंपनी यानी नपको मिलकर करेंगे। दोनों संस्थाएं दवाओं और मेडिकल संसाधनों की सप्लाई पर नजर रखेंगी। किस अस्पताल को क्या जरूरत है, इसकी जानकारी डिजिटल सिस्टम के जरिए जुटाई जाएगी और उसी के अनुसार ड्रोन भेजे जाएंगे।
दिलचस्प बात यह है कि इस योजना की शुरुआती झलक पिछले हज सीजन में देखने को मिली थी। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान एक ड्रोन के जरिए मीना इमरजेंसी अस्पताल में आइस पैक भेजे गए थे। इनका इस्तेमाल लू और हीट स्ट्रोक से पीड़ित मरीजों के इलाज में हुआ था। हज के दौरान तेज धूप और गर्मी के कारण ऐसे मामलों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
हज 2026 के लिए सऊदी अरब ने स्वास्थ्य सुविधाओं का बड़ा ढांचा भी तैयार किया है। सरकार ने 20 हजार से ज्यादा अस्पताल बेड उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इनमें करीब 3800 बेड सीधे पवित्र स्थलों के आसपास होंगे। इसके अलावा 25 इमरजेंसी हेल्थ सेंटर भी बनाए जा रहे हैं।
एम्बुलेंस सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। तीन हजार से ज्यादा एम्बुलेंस तैनात रहेंगी। 11 एयर एम्बुलेंस भी तैयार रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। करीब 7700 पैरामेडिक्स और 52 हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी हज ड्यूटी में लगाए जाएंगे।
सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि इतनी बड़ी भीड़ के बीच स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन में ड्रोन का इस्तेमाल दुनिया में पहली बार इतने बड़े स्तर पर किया जा रहा है। हज में लाखों लोगों की मौजूदगी के कारण जमीन पर हर चीज को तेजी से संचालित करना आसान नहीं होता। ऐसे में आसमान से दवा पहुंचाने का यह तरीका काफी असरदार माना जा रहा है।
हज 2026 में करीब 15 लाख विदेशी हाजियों के पहुंचने की उम्मीद है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ना तय है। खासकर बुजुर्ग और बीमार हाजियों के लिए यह नई व्यवस्था राहत साबित हो सकती है।
लेकिन इस पूरी योजना के बीच सऊदी फूड एंड ड्रग अथॉरिटी ने दवाओं को लेकर नियम भी सख्त किए हैं। यदि कोई हाजी ऐसी दवा लेकर आ रहा है जिसमें मादक या नियंत्रित तत्व हैं, तो उसे पहले से मंजूरी लेनी होगी। इसके लिए पासपोर्ट की कॉपी, पिछले छह महीने के भीतर जारी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन या डॉक्टर की रिपोर्ट जमा करनी होगी। साथ ही दवा और उसके पैकेट की तस्वीरें भी देनी होंगी।
हाजियों को ऑनलाइन घोषणा फॉर्म भरना होगा और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल्ड ड्रग सिस्टम में आवेदन करना पड़ेगा। अनुमति मिलने के बाद ही वे ऐसी दवाएं अपने साथ ला सकेंगे। प्रशासन ने यह भी तय किया है कि कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा दवा नहीं ला सकता। अधिकतम 30 दिनों की खुराक या यात्रा अवधि तक की दवा ही अनुमति के दायरे में होगी।
हज 2026 में तकनीक का असर सिर्फ ड्रोन तक सीमित नहीं रहेगा। सऊदी अरब ने पवित्र स्थलों पर 5जी नेटवर्क की पूरी कवरेज देने की भी घोषणा की है। इसका मकसद हेल्थ सिस्टम, इमरजेंसी सेवाओं और ड्रोन संचालन को बिना रुकावट चलाना है।
दरअसल, दुनिया भर में ड्रोन डिलीवरी को भविष्य की जरूरत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सामान की डिलीवरी में सबसे ज्यादा समय और खर्च आखिरी चरण में होता है। इसे “लास्ट माइल” कहा जाता है। हज जैसे आयोजनों में यही सबसे बड़ी चुनौती होती है क्योंकि भीड़ और रास्तों की सीमाएं काम को धीमा कर देती हैं।
ऐसे में सऊदी अरब का यह कदम सिर्फ हज प्रबंधन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में तकनीक कैसे इंसानी जरूरतों को आसान बना सकती है। हज में लाखों लोग इबादत के लिए आते हैं। अगर उसी दौरान किसी मरीज तक दवा मिनटों में पहुंच जाए, तो शायद यह तकनीक किसी के लिए राहत ही नहीं, जिंदगी बचाने का जरिया भी बन सकती है।

