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दुबई प्रॉपर्टी मार्केट: युद्ध की आहट के बीच क्या डगमगा रहा है रियल एस्टेट का साम्राज्य?

मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर इजरायल-अमेरिका बनाम ईरान के बीच छिड़े संघर्ष ने पूरी दुनिया की नजरें खाड़ी देशों (Gulf Countries) पर टिका दी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ईरान की बमबारी और युद्ध के साये में दुबई का आलीशान प्रॉपर्टी कारोबार लड़खड़ाने लगा है? ‘मुस्लिम नाउ ब्यूरो’ की इस विशेष रिपोर्ट में हम गहराई से पड़ताल करेंगे कि क्या दुबई का रियल एस्टेट बाजार इस वैश्विक अस्थिरता को झेल पाएगा या यह किसी बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है।

भय बनाम भरोसा: क्या कहते हैं आंकड़े?

हाल ही में ‘गल्फ न्यूज‘ की एक रिपोर्ट ने निवेशकों के बीच हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, दुबई के करीब 85 प्रतिशत मकान मालिक और निवेशक वर्तमान अनिश्चितता के बावजूद अपनी संपत्तियों को बेचने के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि शेष 15 प्रतिशत लोग अब इस दिशा में गंभीरता से विचार करने लगे हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से खरीदारों और विक्रेताओं की संख्या में कोई उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज नहीं की गई है। यह संकेत देता है कि निवेशक ‘रुको और देखो’ (Wait and Watch) की नीति अपना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है, तो गल्फ देशों को पूंजी निवेश (Capital Investment) के स्तर पर एक बड़ा झटका लग सकता है।

पैनिक सेलिंग से दूर, मगर सतर्क हैं मकान मालिक

‘स्मार्ट ब्रिक्स’ के ताजा डेटा के मुताबिक, दुबई के प्रॉपर्टी बाजार में अभी तक ‘पैनिक सेलिंग’ (घबराहट में बिक्री) जैसी स्थिति देखने को नहीं मिली है। स्मार्ट ब्रिक्स के फाउंडर और सीईओ मोहम्मद मोहम्मद का कहना है कि मकान मालिकों का भरोसा अभी भी दुबई के बुनियादी ढांचों (Fundamentals) पर टिका हुआ है।

उन्होंने स्पष्ट किया, “पैनिक सेलिंग न होना इस बात का प्रमाण है कि जमीन पर व्यापारिक गतिविधियां और रोजमर्रा की जिंदगी बिना किसी बड़ी रुकावट के चल रही है। निवेशक जानते हैं कि दुबई ने पहले भी कई संकटों का डटकर सामना किया है।” हालांकि, लिस्टिंग में 5% की मामूली बढ़ोतरी जरूर देखी गई है, लेकिन यह किसी बड़े खतरे के बजाय बाजार में होने वाले सामान्य उतार-चढ़ाव जैसा है।

खरीदारों का बदलता नजरिया: ऑफ-प्लान प्रोजेक्ट्स की ओर झुकाव

भले ही मकान मालिक अपनी जगह जमे हुए हैं, लेकिन नए खरीदारों के व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। अब खरीदार रेडी-टू-मूव (तैयार) प्रॉपर्टी के बजाय ‘ऑफ-प्लान’ (निर्माणाधीन) ट्रांज़ैक्शन की ओर बढ़ रहे हैं। हाल के हफ्तों में लगभग 63% सौदे इसी सेगमेंट में हुए हैं।

इसका एक बड़ा कारण यह है कि निवेशक अब उन प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा रहे हैं जिनका हैंडओवर 2027 के बाद होना है। इससे उन्हें उम्मीद मिलती है कि तब तक क्षेत्रीय तनाव शांत हो जाएगा और उनकी पूंजी सुरक्षित रहेगी। वर्तमान रेंटल मार्केट की सुस्ती ने भी निवेशकों को लंबी अवधि के निवेश की ओर धकेला है।

शॉर्ट-टर्म रेंटल पर पड़ रही है मार

युद्ध की आशंका का सबसे सीधा और कड़वा असर शॉर्ट-टर्म रेंटल (Short-term Rentals) और हॉलिडे होम्स पर पड़ा है। पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं में आई संभावित कमी के कारण ऑक्यूपेंसी (कब्जा दर) और दैनिक किराए में गिरावट दर्ज की गई है।

आंकड़े बताते हैं कि जो 5 प्रतिशत मकान मालिक डिस्काउंट रेट पर अपनी प्रॉपर्टी बेचने को तैयार हैं, उनमें से अधिकांश इसी शॉर्ट-टर्म रेंटल सेगमेंट से जुड़े हैं। यदि अनिश्चितता लंबे समय तक खिंचती है, तो कैश फ्लो की कमी इन मालिकों को संकट में डाल सकती है और वे अपनी संपत्तियां बाजार में निकालने को मजबूर हो सकते हैं।

कीमतों में स्थिरता, लेकिन रफ़्तार में मंदी

दुबई के प्रमुख रियल एस्टेट पोर्टल ‘बायट’ (Bayut) के प्रवक्ताओं का मानना है कि फिलहाल कीमतों में कोई बड़ी गिरावट (Price Correction) नहीं दिख रही है। बाजार की सुस्ती कीमतों के बजाय ‘ट्रांजेक्शन वेलोसिटी’ यानी सौदों की रफ़्तार में मंदी के रूप में सामने आ रही है। पूछताछ के स्तर में कमी आई है और लोग फैसले लेने में सामान्य से अधिक समय लगा रहे हैं।

हालांकि, एक सकारात्मक संकेत यह भी है कि बायर एक्टिविटी में गिरावट के बाद रिकवरी भी तेजी से हुई है। महज नौ दिनों के भीतर खरीदारों की सक्रियता सामान्य स्तर के 80% तक वापस आ गई, जो यह दर्शाता है कि बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) अभी भी मौजूद है।

किरायेदारों की रणनीति: रिलोकेशन के बजाय रिन्यूअल

प्रॉपर्टी मार्केट का एक अहम हिस्सा किरायेदार (Tenants) भी हैं। युद्ध के साये और आर्थिक अनिश्चितता के बीच किरायेदार अब नए घर में शिफ्ट होने या रिलोकेशन के बजाय पुराने कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू (नवीनीकरण) करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। वे मौजूदा माहौल में किसी भी तरह के अतिरिक्त खर्च या नए वित्तीय बोझ से बचना चाहते हैं।

निष्कर्ष: क्या दुबई फिर से बाजी मारेगा?

दुबई का प्रॉपर्टी बाजार वर्तमान में एक ‘क्रॉसरोड’ (चौराहे) पर खड़ा है। एक तरफ वैश्विक तनाव और युद्ध की आशंकाएं पूंजी निवेश के लिए खतरा पैदा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ दुबई की मजबूत अर्थव्यवस्था और निवेशकों का अटूट भरोसा इसे गिरने से रोक रहा है।

क्या 15 प्रतिशत आशंकित निवेशक बढ़कर बहुमत में बदल जाएंगे? या फिर दुबई एक बार फिर से साबित कर देगा कि वह दुनिया का सबसे सुरक्षित ‘इन्वेस्टमेंट हेवन’ है? यह आने वाले समय में इजरायल-ईरान संघर्ष के रुख और वैश्विक कूटनीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल, दुबई के गगनचुंबी इमारतें मजबूती से खड़ी हैं, लेकिन उनके अंदर बैठे निवेशकों की धड़कनें तेज हैं।