Culture

नफरत की साजिशें नाकाम: रामनवमी पर देश ने पेश की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल

पिछले डेढ़ दशक से भारत की फिजाओं में ‘सांस्कृतिक युद्ध’ और वैचारिक मतभेद का जहर घोलने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जिसका एकमात्र एजेंडा हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत के बीज बोना है। अक्सर देखा गया है कि ये शरारती तत्व रामनवमी जैसे पावन त्योहारों को सांप्रदायिक तनाव और दंगों की भेंट चढ़ाने के लिए ढाल बनाते हैं। इस साल जब पूरी दुनिया इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों से सहमी हुई है और हर तरफ अनिश्चितता का माहौल है, तब भारत में भी रामनवमी को लेकर कई तरह की आशंकाएं और डर का माहौल बनाया जा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस चुनौतीपूर्ण समय में देशवासियों से एकजुटता की अपील की थी।

लेकिन, इस बार देश की जनता ने नफरत के सौदागरों को करारा जवाब दिया है। मुल्क के कोने-कोने से सौहार्द, भाईचारे और मोहब्बत की ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने न केवल दुनिया को भारत की एकजुटता का अहसास कराया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि भारत की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कोई भी ताकत इसे हिला नहीं सकती।

जुमे की नमाज और रामनवमी: जब एक साथ उठे हाथ इस वर्ष रामनवमी का पावन अवसर ‘जुमे’ (शुक्रवार) के दिन पड़ा। एक तरफ मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ थी, तो दूसरी तरफ सड़कों पर रामभक्तों का जयघोष। आमतौर पर नफरत फैलाने वाले ऐसे ही मौकों की तलाश में रहते हैं, लेकिन देश की जनता ने इसे उत्सव बना दिया। बिहार के सीवान, कटिहार और जहानाबाद से लेकर झारखंड की राजधानी रांची तक, हर जगह हिंदू-मुस्लिम एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। कहीं मुसलमानों ने रामनवमी के जुलूस पर फूलों की बारिश की, तो कहीं नमाज पढ़कर निकलते भाइयों का रामभक्तों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

रांची में मौलाना का करतब और ‘राम’ बने नन्हे मुन्ने झारखंड की राजधानी रांची इस बार भाईचारे का केंद्र बनी रही। सोशल मीडिया पर एक वीडियो और तस्वीर ने सबका दिल जीत लिया, जिसमें एक मुस्लिम मौलाना रामनवमी के जुलूस में तलवारबाजी के हैरतअंगेज करतब दिखा रहे थे। उनके हर वार पर जय श्रीराम के नारे लगा रहे भक्तों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। वहीं, एक और दिल छू लेने वाली तस्वीर वायरल हुई, जिसमें एक दाढ़ी वाला शख्स अपने नन्हे बच्चे को ‘भगवान राम’ के रूप में सजाकर जुलूस में शामिल होने पहुंचा था। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर ‘इमेज ऑफ द ईयर’ के रूप में साझा की जा रही है, जो यह संदेश देती है कि मजहब बच्चों की मासूमियत और आस्था के सम्मान में कभी बाधा नहीं बनता।

सीवान और कोलकाता: सियासत से ऊपर उठकर सेवा बिहार के सीवान में पूर्व सांसद डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे और रघुनाथपुर के विधायक ओसामा शहाब ने सांप्रदायिक सौहार्द की एक नई इबारत लिखी। उन्होंने रामनवमी के जुलूस में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरे शहर में चाय, पानी और नाश्ते के स्टॉल लगवाए। ओसामा खुद इन शिविरों में मौजूद रहे और रामभक्तों की सेवा की। उधर, कोलकाता में ‘यूथ आइकन’ समीर खान और अन्य युवाओं ने “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना” के नारे को चरितार्थ करते हुए जुलूसों का भव्य स्वागत किया। पश्चिम बंगाल की संस्कृति ने एक बार फिर दिखाया कि वहां के लोगों के लिए उत्सव साझा होते हैं।

महाराष्ट्र और झारखंड के गांवों की गूंज नागपुर जिसे देश का हृदय स्थल कहा जाता है, वहां से भी शानदार वीडियो सामने आए। ‘ये नागपुर है मेरे भाई’ के कैप्शन के साथ वायरल हो रहे वीडियो में हिंदू और मुस्लिम युवाओं को एक-दूसरे के गले मिलते और ढोल-ताशों पर नाचते देखा गया। वहीं, झारखंड के गिरिडीह जिले के सरिया सबलपुर और कुल्गो जैसे ग्रामीण इलाकों में भी भाईचारा चरम पर था। गिरिडीह में मंत्री इरफान अंसारी खुद राम का जयकारा लगाते और जुलूस की अगुवाई करते नजर आए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत का लोकतंत्र और समाज अपनी विविधताओं में ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति खोजता है।

नफरत की दुकानों पर सौहार्द का ताला सोशल मीडिया पर श्याम किशोर चौबे जैसे कई जागरूक नागरिकों ने इन दृश्यों को साझा करते हुए लिखा, “किसी को मिर्ची लगे तो लगे, लेकिन यही हमारे भारत की असली तस्वीर है।” फेसबुक, इंस्टाग्राम और रील्स के इस दौर में जहां अक्सर फेक न्यूज के जरिए नफरत फैलाई जाती है, वहीं इस बार इन्ही प्लेटफॉर्म्स ने सकारात्मकता फैलाने का काम किया। जहानाबाद में मकर संक्रांति से लेकर रामनवमी तक के आयोजनों में हिंदू-मुस्लिम एकता के नारे गूंजते रहे।

निष्कर्ष: सुरक्षित है भारत का भविष्य इजराइल-ईरान युद्ध के बीच जब दुनिया परमाणु हमलों और आर्थिक मंदी की आशंकाओं से घिरी है, तब भारत से आने वाली ये तस्वीरें एक उम्मीद की किरण हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि भले ही डेढ़ दशक से ‘सांस्कृतिक युद्ध’ का खेल खेला जा रहा हो, लेकिन जमीन पर आम आदमी आज भी अपने पड़ोसी के साथ शांति और प्रेम से रहना चाहता है। प्रधानमंत्री की एकजुटता की अपील को देशवासियों ने न केवल सुना, बल्कि उसे अपने आचरण में उतारकर दिखाया।

रामनवमी के इस उत्सव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की धार्मिक एकजुटता किसी राजनीतिक एजेंडे या गिरोह की साजिशों से कमजोर होने वाली नहीं है। यह मुल्क अपनी साझा विरासत, सांझी संस्कृति और अटूट भाईचारे के दम पर हर मुसीबत का सामना करने को तैयार है। सीवान से कोलकाता और रांची से नागपुर तक, भारत आज मुस्कुरा रहा है क्योंकि नफरत की हार हुई है और मोहब्बत की जीत।