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Eid 2026: एशिया में एक साथ मनाई जाएगी ईद, चांद न दिखने से 21 मार्च तय

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली/ढाका/इस्लामाबाद/काबुल

इस वर्ष ईद-उल-फितर को लेकर एशिया के अधिकांश देशों में एक दुर्लभ और सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। भारत, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित कई देशों ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि शनिवार, 21 मार्च 2026 को ईद मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इस बार चांद न दिखने के बाद लगभग पूरे क्षेत्र में एक समान निर्णय लिया गया, जिससे वर्षों बाद ईद एक साथ मनाए जाने का अवसर बना है।

🌙 चांद नहीं दिखा, 30 रोजों के बाद ईद

गुरुवार की शाम एशिया के अधिकांश हिस्सों में शव्वाल का चांद नजर नहीं आया। इस्लामी परंपरा के अनुसार, जब चांद नहीं दिखता तो रमजान के 30 रोजे पूरे किए जाते हैं। इसी आधार पर सभी देशों ने शुक्रवार को रमजान का आखिरी दिन और शनिवार को ईद मनाने का फैसला लिया।

इस बार यह स्थिति इसलिए भी खास है क्योंकि पहले अक्सर चांद को लेकर मतभेद हो जाते थे और अलग-अलग देशों में ईद दो दिनों में बंट जाती थी। लेकिन इस साल ऐसा कोई बड़ा विवाद देखने को नहीं मिला।

🕌 अलविदा जुमे को लेकर भी नहीं रहा भ्रम

ईद की तारीख को लेकर हर साल होने वाले असमंजस का असर अलविदा जुमे पर भी पड़ता था। कई बार यह स्पष्ट नहीं हो पाता था कि रमजान का आखिरी जुमे कौन सा है। लेकिन इस बार चूंकि रमजान के 30 रोजे पूरे हो रहे हैं, इसलिए आखिरी जुमे यानी अलविदा की नमाज भी बिना किसी भ्रम के अदा की गई।

🇧🇩 बांग्लादेश: आधिकारिक घोषणा के बाद 21 मार्च को ईद

बांग्लादेश में 19 मार्च को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया। इसके बाद धार्मिक मामलों के मंत्री काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद ने घोषणा की कि शुक्रवार को 30 रोजे पूरे होंगे और शनिवार को पूरे देश में ईद मनाई जाएगी।

ढाका स्थित बैतुल मुकर्रम राष्ट्रीय मस्जिद में आयोजित बैठक में इस्लामिक फाउंडेशन, मौसम विभाग और अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था SPARSO से मिली जानकारी के आधार पर यह निर्णय लिया गया। सभी रिपोर्टों में यही सामने आया कि चांद दिखाई नहीं दिया।

🇵🇰 पाकिस्तान: रुयत-ए-हिलाल कमेटी का ऐलान

पाकिस्तान में भी चांद न दिखने की पुष्टि के बाद केंद्रीय रुयत-ए-हिलाल कमेटी के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल खबीर आजाद ने घोषणा की कि 21 मार्च, शनिवार को ईद-उल-फितर मनाई जाएगी।

इस्लामाबाद में हुई बैठक में मौसम विभाग, स्पारको और विभिन्न धार्मिक विद्वानों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि सूर्यास्त के समय चांद की उम्र लगभग 12 घंटे थी, जबकि आंखों से देखने के लिए कम से कम 18 से 19 घंटे का होना जरूरी होता है। यही वजह रही कि चांद नजर नहीं आया।

🇮🇩 इंडोनेशिया और भारत में भी समान फैसला

इंडोनेशिया और भारत में भी यही स्थिति रही। चांद की पुष्टि न होने के कारण दोनों देशों में शनिवार को ईद मनाने का ऐलान किया गया। भारत में अंतिम फैसला स्थानीय चांद देखने पर निर्भर करता है, लेकिन शुरुआती संकेतों के अनुसार देश के अधिकांश हिस्सों में 21 मार्च को ही ईद मनाई जाएगी।

🌍 खाड़ी देशों में एक दिन पहले ईद

दूसरी ओर, सऊदी अरब और खाड़ी देशों में चांद दिखाई देने के बाद वहां शुक्रवार, 20 मार्च को ही ईद मनाई जा रही है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर ईद दो अलग-अलग दिनों में मनाई जा रही है, लेकिन एशिया के बड़े हिस्से में एकरूपता देखने को मिल रही है।

🇦🇫 अफगानिस्तान में पहले ही हो चुकी ईद

अफगानिस्तान में इस बार ईद गुरुवार को ही मनाई गई। इस तरह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चांद दिखने के समय के आधार पर ईद की तारीख में अंतर देखने को मिला।

📊 क्यों अलग-अलग होती है ईद?

इस्लामी हिजरी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है। हर महीने की शुरुआत चांद दिखने से होती है। भौगोलिक स्थिति, मौसम और चांद की उम्र जैसे कारकों के कारण अलग-अलग देशों में चांद अलग समय पर दिखाई देता है, जिससे ईद की तारीख में अंतर हो जाता है।

🧭 एकता का संदेश

इस बार एशिया के बड़े हिस्से में एक साथ ईद मनाया जाना मुस्लिम दुनिया में एकता और सामंजस्य का प्रतीक माना जा रहा है। वर्षों बाद ऐसा मौका आया है जब बिना किसी बड़े विवाद के कई देशों ने एक ही दिन ईद मनाने का फैसला लिया है।

निष्कर्ष:
तारीखों में मामूली अंतर के बावजूद ईद का मूल संदेश—भाईचारा, इंसानियत और साझा खुशियां—हर जगह समान रूप से कायम है। इस बार 21 मार्च को एशिया में एक साथ गूंजने वाली तकबीरें इस एकता की मजबूत मिसाल बनेंगी।