अमेरिका और ईरान के बीच भीषण जंग, होर्मुज जलडमरूमध्य नाकेबंदी से हड़कंप
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, वाॅशिंगटन
पश्चिम एशिया संकट अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब सीधे सैन्य टकराव में बदल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लगाने का बड़ा फैसला किया है। ट्रम्प के इस एलान के तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। इस सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। दोनों देशों के बीच छिड़ी इस जंग के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में भारी उछाल आया है। पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त इस समुद्री मार्ग पर टिकी हुई हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने पुष्टि की है कि अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के खिलाफ तीसरे दिन भी हमले जारी रखे हैं। सेंटकॉम की ओर से जारी बयान में बताया गया कि अमेरिकी बलों ने करीब पांच घंटे तक लंबा सैन्य अभियान चलाया। इस दौरान ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, मिसाइल ठिकानों, ड्रोन केंद्रों और नौसैनिक परिसंपत्तियों पर सटीक हथियारों से हमला किया गया। अमेरिका ने ईरान के जिन प्रमुख इलाकों को निशाना बनाया है उनमें बुशहर, चाहबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास शामिल हैं। इन इलाकों में रात भर तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरानी मीडिया ने भी इन रिहाइशी और सैन्य द्वीपों पर हुए भारी नुकसान की बात स्वीकार की है।
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 13, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इस सैन्य कार्रवाई की जानकारी दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका अब होर्मुज जलडमरूमध्य का रक्षक बनेगा। इसके बदले में वहां से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों से बीस प्रतिशत सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा। सेंटकॉम के मुताबिक यह समुद्री नाकेबंदी अमेरिकी समय के अनुसार चौदह जुलाई की शाम चार बजे से लागू हो जाएगी। खाड़ी देशों के समय के मुताबिक यह नाकेबंदी पंद्रह जुलाई की आधी रात से प्रभावी होगी। अमेरिकी सेना इस दौरान केवल ईरानी बंदरगाहों की तरफ जाने वाले और वहां से निकलने वाले जहाजों को रोकेगी। अन्य देशों के सामान्य व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी। अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि इस नाकेबंदी का उल्लंघन करने वाले किसी भी जहाज को बलपूर्वक रोका जा सकता है।
इस अमेरिकी कार्रवाई के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने भी पलटवार किया है। ईरान की सेना ने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के दो बड़े तेल टैंकरों पर क्रूज मिसाइल से हमला किया है। इन तेल टैंकरों के नाम मोम्बासा और अल बहिया बताए गए हैं। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने इस मिसाइल हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। यह हमला ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास हुआ है। ईरान के इस हमले में तेल टैंकर पर सवार एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है। इसके अलावा आठ अन्य चालक दल के सदस्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेन के नागरिक शामिल हैं।
Yesterday, using multiple one-way attack surface drones, CENTCOM forces successfully struck a submarine and ship maintenance facility in Iran. Three Corsair unmanned surface vessels hit the port at Bandar Abbas Naval Base, marking the first time American forces have employed sea… pic.twitter.com/bOM2kmgRxz
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यूएई सरकार ने इस हमले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन बताया है। यूएई ने कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने का पूरा अधिकार रखता है। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने अपने नेविगेशन सिस्टम बंद कर दिए थे। ईरान ने आरोप लगाया कि ये टैंकर अमेरिकी इशारे पर काम कर रहे थे। चेतावनी को नजरअंदाज करने के बाद ही इन पर मिसाइलें दागी गईं। इस घटना के बाद दुबई और अबू धाबी में अमेरिकी दूतावास ने अपनी सभी राजनयिक नियुक्तियों को पंद्रह जुलाई तक के लिए रद्द कर दिया है।
इस युद्ध की आंच अब बहरीन तक भी पहुंच गई है। बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान ने ड्रोन और मिसाइल से बड़े हमले किए हैं। बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने पूरे देश में आपातकालीन सायरन बजाकर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है। ईरान की सरकारी टेलीविजन रिपोर्ट के मुताबिक आईआरजीसी ने बहरीन में स्थित अमेरिकी सैनिकों के आवासीय परिसरों, हथियार डिपो और एक उपग्रह संचार केंद्र को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। बहरीन में लगातार बजते सायरन के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी दहशत का माहौल है। इसके साथ ही कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी ईरानी हमलों की खबरें आ रही हैं।
इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच भी गोलाबारी तेज हो गई है। सऊदी अरब की सेना ने दावा किया है कि उसने हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया है। वहीं हूती गुट ने आरोप लगाया है कि सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने सना हवाई अड्डे को निशाना बनाया है। इस चौतरफा गोलाबारी ने पूरे मध्य पूर्व को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस इलाके में अमेरिका के पचास हजार से अधिक सैनिक पूरी तरह मुस्तैद हैं।
At 4:45 p.m. ET today, U.S. Central Command began launching the third consecutive night of strikes against Iran, at the Commander in Chief's direction. These strikes will continue imposing a heavy cost on Iranian forces and degrade their ability to attack innocent civilians and…
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सैन्य तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि इन हमलों के बावजूद ईरान के साथ एक नया समझौता अब भी संभव है। ट्रम्प ने दावा किया कि दो दिन पहले दोनों देशों के बीच एक सहमति बन गई थी। लेकिन ईरान ने ऐन वक्त पर बातचीत से कदम पीछे खींच लिए। ट्रम्प ने एलान किया है कि वह आने वाले गुरुवार की रात नौ बजे अमेरिकी जनता को संबोधित करेंगे। इस राष्ट्र के नाम संबोधन में वह ईरान युद्ध को लेकर अपनी भविष्य की रणनीति का खुलासा कर सकते हैं।
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त तेल आपूर्ति मार्ग है। दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस मार्ग पर नाकेबंदी और हमलों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में एक ही दिन में नौ प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई है। अगर यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने भी इस मार्ग पर किसी भी तरह का टैक्स लगाने का विरोध किया है। वैश्विक नेताओं ने दोनों पक्षों से तुरंत युद्ध रोकने की अपील की है।

