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जम्मू में फारूक अब्दुल्ला पर फायरिंग की कोशिश नाकाम, आरोपी गिरफ्तार; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली / जम्मू

जम्मू में बुधवार रात एक निजी समारोह के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah की मौजूदगी में अचानक गोली चलने की घटना सामने आई। यह घटना शहर के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश स्थित रॉयल पार्क मैरिज हॉल में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान हुई।

पुलिस के मुताबिक एक व्यक्ति ने लाइसेंसी हथियार से फायरिंग की, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया। इस घटना में किसी को चोट नहीं आई, जबकि मौजूद सभी नेता सुरक्षित हैं। हालांकि इस घटना ने जम्मू-कश्मीर में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


शादी समारोह के बाहर हुई फायरिंग, तुरंत काबू किया गया आरोपी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह घटना उस समय हुई जब फारूक अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary एक राजनीतिक सहयोगी के बेटे की शादी में शामिल होने पहुंचे थे।

सूत्रों के मुताबिक समारोह समाप्त होने के बाद जब नेता बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने अचानक पिस्तौल निकालकर गोली चला दी। गोली चलने की आवाज से मौके पर मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

हालांकि सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए हमलावर को पकड़ लिया और उसका हथियार जब्त कर लिया।

पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जमवाल के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी की उम्र लगभग 70 वर्ष के आसपास बताई जा रही है।


पुलिस का दावा – आतंकी कोण नहीं

जम्मू के एसपी साउथ Ajay Sharma ने बताया कि घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल इस घटना में किसी आतंकवादी संगठन की भूमिका के संकेत नहीं मिले हैं।

पुलिस के अनुसार:

  • आरोपी के पास से लाइसेंसी पिस्तौल बरामद की गई है।
  • उसने समारोह स्थल के बाहर एक गोली चलाई थी।
  • सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे काबू कर लिया।
  • मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

एसपी शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सुरक्षित हैं और घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।


सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह एक बड़ा सुरक्षा चूक का मामला है।

चौधरी ने कहा:

“हम सब साथ थे। फारूक साहब, मैं और नासिर सब सुरक्षित हैं। लेकिन यह बहुत बड़ा सवाल है कि इतनी बड़ी सुरक्षा चूक कैसे हो गई। वहां स्थानीय पुलिस मौजूद नहीं थी।”

उन्होंने कहा कि इतने वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए थे।


खेल मंत्री ने भी बताया बड़ा सुरक्षा लापरवाही का मामला

जम्मू-कश्मीर के खेल और युवा मामलों के मंत्री Satish Sharma ने भी इस घटना को गंभीर सुरक्षा चूक बताया।

उन्होंने कहा कि पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और जल्द ही सच्चाई सामने आएगी।

शर्मा ने कहा:

“सब लोग सुरक्षित हैं, लेकिन यह जांच का विषय है कि हथियार समारोह स्थल तक कैसे पहुंचा। ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सुरक्षा मिलनी चाहिए।


कांग्रेस ने भी जताई चिंता

जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष Tariq Hameed Karra ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि इस तरह की हिंसक घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और यह क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं।

कर्रा ने कहा:

“ऐसी घटनाएं बेहद परेशान करने वाली हैं। क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग भी की।


उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया – “अल्लाह का शुक्र है”

घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन सौभाग्य से उनके पिता सुरक्षित हैं।

उमर अब्दुल्ला ने लिखा:

“अल्लाह का शुक्र है। मेरे पिता बाल-बाल बच गए।”

उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई।


राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में घटना

यह घटना ऐसे समय हुई है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा और राजनीतिक गतिविधियां दोनों ही बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही हैं।

हाल के महीनों में क्षेत्र में राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक सभाओं की संख्या बढ़ी है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही पुलिस ने इस मामले में आतंकवादी कोण से इनकार किया हो, लेकिन यह घटना सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को उजागर करती है।


जांच के दायरे में कई सवाल

अब जांच एजेंसियां कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाश रही हैं, जैसे:

  • आरोपी समारोह स्थल तक हथियार लेकर कैसे पहुंचा?
  • क्या सुरक्षा व्यवस्था में कहीं लापरवाही हुई?
  • आरोपी का मकसद क्या था?
  • क्या यह व्यक्तिगत विवाद था या किसी अन्य कारण से हमला किया गया?

पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही मामले से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।


सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

विश्लेषकों का मानना है कि अगर सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई नहीं की होती तो यह घटना बड़ा हादसा बन सकती थी।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली रहे नेता फारूक अब्दुल्ला पर हमले की कोशिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा को लेकर कितनी सतर्कता बरती जा रही है।