क्या बिहार के कांग्रेस नेता तारिक़ अनवर का आयतुल्लाह ख़ुमैनी से कोई ऐतिहासिक रिश्ता है? दावे और पड़ताल
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली / पटना / कटिहार
इज़रायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के ऐतिहासिक रिश्तों पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक और दिलचस्प दावा वायरल हो रहा है। दावा यह है कि बिहार के वरिष्ठ कांग्रेस नेता Tariq Anwar का संबंध ईरान की इस्लामी क्रांति के नायक Ayatollah Ruhollah Khomeini के परिवार से जुड़ा हुआ है।
यह दावा “Lost Muslim Heritage of Bihar” नाम के एक सोशल मीडिया हैंडल पर प्रकाशित एक लेख के बाद तेजी से फैल गया। इस लेख में इतिहास और वंशावली के आधार पर दोनों परिवारों के बीच एक दूर का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ता होने की बात कही गई है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक किसी आधिकारिक स्रोत से नहीं हुई है। फिर भी यह चर्चा इतिहास, प्रवासन और भारतीय उपमहाद्वीप तथा ईरान के पुराने संबंधों को समझने का एक दिलचस्प अवसर जरूर देती है।

ईरान की इस्लामी क्रांति और खुमैनी का भारतीय संबंध
Iranian Revolution के नेता आयतुल्लाह रूहुल्लाह खुमैनी के परिवार को लेकर इतिहासकारों के बीच पहले से यह चर्चा मौजूद रही है कि उनके पूर्वज भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़े थे। कई ऐतिहासिक विवरणों में बताया गया है कि खुमैनी के दादा सैयद अहमद मूसवी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किंतूर गांव से 19वीं सदी में ईरान चले गए थे।
बताया जाता है कि बाद में यही परिवार ईरान के शहर खुमैन में बस गया। इसी कारण उनके वंशजों को “खुमैनी” कहा जाने लगा। यही परिवार आगे चलकर ईरान की धार्मिक और राजनीतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
यही वह बिंदु है जहां से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे लेख में एक और ऐतिहासिक कड़ी जोड़ने की कोशिश की गई है।
तारिक़ अनवर के परिवार की जड़ें
वायरल लेख के अनुसार कांग्रेस नेता तारिक़ अनवर का पारिवारिक इतिहास भी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किंतूर गांव से जुड़ा हुआ बताया जाता है। कहा जाता है कि उनके पूर्वज तुगलक काल में वहां से बिहार के वर्तमान अरवल इलाके में आकर बस गए थे।
इस परंपरा के अनुसार सबसे पहले मखदूम शाह शमशुद्दीन अरवली किंतूरी इस क्षेत्र में पहुंचे। बाद में उनके भाई शाह खलीलुद्दीन भी यहां आकर बस गए। अरवल के शाही मोहल्ले में यही खानदान आगे चलकर एक बड़ा सूफी और सामाजिक परिवार बना।
कहा जाता है कि इसी परिवार की पीढ़ियों में आगे चलकर कई प्रतिष्ठित लोग हुए। इनमें प्रशासन, कानून और राजनीति से जुड़े नाम भी शामिल रहे।
सूफी परंपरा और अरवल की खानकाह
स्थानीय परंपराओं में मखदूम शाह शमशुद्दीन अरवली का नाम एक सूफी संत के रूप में लिया जाता है। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने बिहार शरीफ और मनेर शरीफ जैसे सूफी केंद्रों में समय बिताया और वहां के प्रमुख सूफी संतों से शिक्षा प्राप्त की।
कथाओं के अनुसार उन्हें अरवल क्षेत्र की आध्यात्मिक जिम्मेदारी दी गई थी। सोन नदी के किनारे उन्होंने साधना और इबादत में लंबा समय बिताया। स्थानीय लोककथाओं में उनकी तपस्या और आध्यात्मिक साधना से जुड़े कई किस्से सुनाए जाते हैं।
इन्हीं कथाओं में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने अपने छोटे भाई शाह खलीलुद्दीन की वंश परंपरा को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद दिया था। यही वंश आगे चलकर अरवल और आसपास के इलाकों में फैला।
इसी खानदान से जुड़े बताए जाते हैं तारिक़ अनवर
वायरल लेख के अनुसार यही खानदान आगे चलकर कई पीढ़ियों में विभाजित हुआ। इसी परिवार की एक शाखा से बिहार के वरिष्ठ नेता तारिक़ अनवर का संबंध बताया जाता है।
तारिक़ अनवर का परिवार लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। उनके परदादा शाह अशफाक ब्रिटिश दौर में मजिस्ट्रेट रहे बताए जाते हैं। उनके दादा शाह जुबैर बैरिस्टर थे और काउंसिल ऑफ स्टेट के सदस्य भी रहे। उनके पिता शाह मुश्ताक बिहार की राजनीति में सक्रिय थे और विधायक भी रहे।
खुद तारिक़ अनवर भारतीय राजनीति का एक जाना पहचाना नाम हैं। वे कई बार सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
क्या सचमुच खुमैनी और तारिक़ अनवर के परिवार जुड़े हैं
इतिहासकारों का मानना है कि भारत और ईरान के बीच सदियों से सांस्कृतिक और धार्मिक संपर्क रहे हैं। मुगल काल से लेकर आधुनिक दौर तक दोनों क्षेत्रों के बीच लोगों का आना जाना जारी रहा।
हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल इस दावे को लेकर इतिहासकार सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। वंशावली और मौखिक परंपराओं के आधार पर कई बार ऐसे दावे सामने आते हैं, लेकिन उन्हें ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित करना आसान नहीं होता।
फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है जो सीधे तौर पर यह साबित करता हो कि तारिक़ अनवर और आयतुल्लाह खुमैनी के परिवार का कोई सीधा रक्त संबंध है।
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुई यह चर्चा
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईरान से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषय फिर से चर्चा में आ रहे हैं।
भारत और ईरान के रिश्ते भी लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्कों पर आधारित रहे हैं। यही कारण है कि जब भी ईरान से जुड़ा कोई विषय सामने आता है तो भारतीय समाज और इतिहास की कड़ियों को भी तलाशा जाने लगता है।
इतिहास, राजनीति और विरासत की दिलचस्प कहानी
तारिक़ अनवर और आयतुल्लाह खुमैनी के परिवारों को जोड़ने वाला यह दावा भले ही अभी पूरी तरह प्रमाणित न हो। लेकिन इसने एक बार फिर भारत और ईरान के साझा इतिहास की चर्चा जरूर छेड़ दी है।
इतिहासकारों का कहना है कि भारतीय उपमहाद्वीप और ईरान के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्तों की लंबी परंपरा रही है। सूफी संतों, व्यापारियों और विद्वानों के माध्यम से सदियों तक दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क बना रहा।
इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में ऐसे किस्से और दावे सामने आते रहते हैं।
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल यह कहानी इतिहास, परंपरा और राजनीति के संगम का एक दिलचस्प उदाहरण बन गई है।

