15 अगस्त पर पुरानी दिल्ली हवेली धर्मपुरा में उड़ाइए पतंग, जानें पूरा प्लान
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नौशाद अख्तर
स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली का आसमान कुछ अलग दिखाई देता है। खासकर पुरानी दिल्ली का। छतों पर पतंगें होती हैं। हाथों में डोर होती है। कहीं पेंच लड़ते हैं तो कहीं पतंग कटने पर छतों से शोर उठता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में इस दिन पतंगबाजी का उत्साह दिखाई देता है।
पुरानी दिल्ली की पतंगबाजी सिर्फ मनोरंजन नहीं है। यह शहर की पुरानी संस्कृति और यादों का हिस्सा है। स्वतंत्रता दिवस पर इसकी रौनक और बढ़ जाती है।
इस बार अगर आप पुरानी दिल्ली में नहीं रहते हैं और यहां की पतंगबाजी को करीब से देखना चाहते हैं तो आपके लिए एक खास मौका है। 14 से 16 अगस्त तक हवेली धर्मपुरा में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पतंगबाजी का आयोजन किया जा रहा है।
इस आयोजन का समय शाम 4 बजे से है। करीब दो घंटे के इस अनुभव के लिए टिकट की कीमत 2,500 रुपये रखी गई है। पांच साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए टिकट जरूरी है। सभी उम्र के लोगों को प्रवेश दिया जाएगा।
लेकिन इस आयोजन की खासियत सिर्फ पतंगबाजी नहीं है।
आप जिस जगह से पुरानी दिल्ली के आसमान में उड़ती पतंगों को देखेंगे, वह खुद इतिहास का एक हिस्सा है। यह वही हवेली धर्मपुरा है, जिसे उसकी ऐतिहासिक वास्तुकला और संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

पतंगों से रंग जाएगा पुरानी दिल्ली का आसमान
स्वतंत्रता दिवस के वीकेंड पर हवेली धर्मपुरा की छत से पुरानी दिल्ली का आसमान देखने का अनुभव अलग होगा। जामा मस्जिद और लाल किले के आसपास का इलाका पतंगों से भरा नजर आएगा।
आयोजन में आने वाले लोग खुद भी पतंग उड़ा सकेंगे। युवा पतंगबाजों के साथ पेंच लड़ाने का मौका मिलेगा। पतंग काटने और कटने का पुराना रोमांच भी यहां महसूस किया जा सकता है।
आयोजकों के अनुसार इस दौरान टीम लोगों को पतंगबाजी की परंपरा के बारे में भी बताएगी। यानी यह केवल पतंग उड़ाने का कार्यक्रम नहीं है। इसके साथ पुरानी दिल्ली की एक पुरानी परंपरा को समझने का मौका भी मिलेगा।
आयोजन खुली जगह में होगा। बैठने और खड़े होने दोनों की व्यवस्था रहेगी। यह बच्चों के लिए भी अनुकूल बताया गया है। हालांकि पालतू जानवरों को साथ लाने की अनुमति नहीं होगी।
पतंगबाजी के साथ चाय और हाई टी
पुरानी दिल्ली का नाम आए और खाने की बात न हो, ऐसा कैसे हो सकता है?
पतंगबाजी के बाद यहां चार कोर्स की हाई टी का इंतजाम किया गया है। इसमें पुरानी दिल्ली के मशहूर स्वाद को शामिल किया गया है।
मेहमानों को चाय, कॉफी और दूसरे पेय भी परोसे जाएंगे। इसके बाद पुरानी दिल्ली की मशहूर चाट के स्वाद का आनंद लिया जा सकेगा।
कुरकुरी पालक पत्ता चाट और पुरानी दुकानों के समोसे इस अनुभव का हिस्सा हैं। इस तरह एक ही शाम में पतंगबाजी, पुरानी दिल्ली का खाना और ऐतिहासिक हवेली तीनों का आनंद लिया जा सकता है।
शाम के समय छत से डूबते सूरज का दृश्य इस अनुभव को और खास बनाएगा।
हवेली धर्मपुरा की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं
अब सवाल है कि आखिर हवेली धर्मपुरा इतनी खास क्यों है?
इसका जवाब इसकी उम्र और वास्तुकला दोनों में छिपा है।
हवेली धर्मपुरा वर्ष 1887 में बनी ऐतिहासिक इमारत है। यह पुरानी दिल्ली के धर्मपुरा इलाके में स्थित है। कभी इसकी अपनी शान थी। खूबसूरत छतें थीं। नक्काशीदार पत्थर थे। लकड़ी का बारीक काम था। पुराने झरोखे और बालकनियां थीं।
समय के साथ हवेली की हालत खराब होती गई।
एक समय ऐसा आया जब इमारत की स्थिति इतनी खराब हो गई कि दिल्ली नगर निगम ने इसे खतरनाक इमारत घोषित कर दिया था। कई मंजिलों पर पानी का स्तर बढ़ने से सीलन फैल गई थी। लकड़ी का काम कमजोर हो गया था।
इमारत के भीतर भी कई बदलाव किए गए थे। बड़े कमरों को छोटे हिस्सों में बांट दिया गया था। टॉयलेट और किचन जैसी सुविधाओं के लिए मूल संरचना में बदलाव हुआ था।
खुले पाइप और लटकते तारों ने स्थिति और खराब कर दी थी।
फिर एक समय ऐसा भी आया जब हवेली की असली छत गिर गई।
जिस इमारत में कभी शाही ठाठ दिखाई देता था, वह पहचान में न आने वाली स्थिति में पहुंच गई थी।

दीवारों के पीछे छिपी थी पुरानी कला
जीर्णोद्धार शुरू हुआ तो चुनौतियां कम नहीं थीं।
दरवाजे और खिड़कियां बंद थीं। दीवारों पर सीलन के निशान थे। कई जगह लंबी दरारें थीं।
चूने की कई परतों के नीचे सजावटी प्लास्टर का काम छिपा था। पत्थर के खंभों पर सिंथेटिक पेंट की मोटी परत चढ़ी हुई थी। इससे पत्थर की बारीक नक्काशी दिखाई नहीं देती थी।
कई पुराने शीशे टूट चुके थे या गायब हो गए थे।
ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हवेली को नया रूप देते समय उसकी पुरानी पहचान खत्म न हो जाए।
यही वजह रही कि इसके जीर्णोद्धार में मूल स्वरूप को बचाने पर विशेष जोर दिया गया।
छह साल तक चला बहाली का काम
हवेली धर्मपुरा को दोबारा खड़ा करना आसान काम नहीं था।
विजय गोयल और सिद्धांत गोयल ने इसकी बहाली की जिम्मेदारी संभाली। उनके सामने ऐसी इमारत थी, जिसकी हालत देखकर यह तय करना मुश्किल था कि इसे किस हद तक बचाया जा सकता है।
शाहजहानाबाद की हवेलियों के संरक्षण का कोई बड़ा उदाहरण भी उनके सामने नहीं था, जिससे सीधे तौर पर रास्ता मिल सके।
इसके बाद करीब छह साल तक काम चला।
करीब 50 कारीगर लगातार इस काम में जुटे रहे। व्यक्तिगत निगरानी में काम हुआ। पुरानी तकनीकों को समझा गया। जहां पुराना पत्थर बचाया जा सकता था, उसे बचाया गया।
जहां पत्थर बदलना जरूरी था, वहां उसी तरह की सामग्री और नक्काशी वाला नया पत्थर लगाया गया।
सही हालत में मिले पुराने पत्थरों को उनकी मूल जगह पर वापस लगाया गया।
यह कोशिश थी कि नई चीजें हवेली पर हावी न हों। बल्कि पुरानी हवेली अपनी ही पहचान के साथ फिर सामने आए।
पुरानी वास्तुकला को बचाने की कोशिश
हवेली के संरक्षण में आधुनिक जानकारी के साथ पारंपरिक निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।
संरक्षण का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह रहा कि ऐतिहासिक इमारत में जितना कम बदलाव किया जाए, उतना बेहतर है।
जीर्णोद्धार के दौरान किए गए काम का रिकॉर्ड भी तैयार किया गया। पुराने दस्तावेज, तस्वीरें और ड्रॉइंग सुरक्षित रखे गए।
हवेली में मिले पुराने फर्नीचर को भी संभालकर रखा गया। नए फर्नीचर का डिजाइन भी हवेली के पुराने दौर की शैली को ध्यान में रखकर किया गया।
इस दौरान सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया। आग से बचाव के लिए स्मोक अलार्म और फायर स्प्रिंकलर जैसे सिस्टम लगाए गए।
आज भी रखरखाव और मरम्मत के काम की निगरानी की जाती है।

UNESCO से भी मिली पहचान
हवेली धर्मपुरा का संरक्षण केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। इसकी बहाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।
UNESCO Asia Pacific Awards for Cultural Heritage Conservation में हवेली धर्मपुरा के संरक्षण को विशेष उल्लेख मिला था।
यह सम्मान इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह केवल एक पुरानी इमारत की मरम्मत की कहानी नहीं थी। यह उस कोशिश की पहचान थी जिसमें पुरानी दिल्ली की वास्तुकला और विरासत को बचाने का प्रयास किया गया।
हवेली धर्मपुरा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि पुरानी इमारत को सिर्फ इसलिए खत्म नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह जर्जर हो चुकी है।
सही सोच और लगातार मेहनत से उसे फिर खड़ा किया जा सकता है।
हवेली की छत से दिखेगा पुरानी दिल्ली का रंग
आज हवेली धर्मपुरा की छत से नीचे देखें तो पुरानी दिल्ली की वही दुनिया दिखाई देती है, जो सदियों से लोगों को आकर्षित करती रही है।
चांदनी चौक की हलचल। पुरानी गलियां। आसपास की ऐतिहासिक इमारतें। जामा मस्जिद। लाल किला। कबूतरों की आवाजाही।
और स्वतंत्रता दिवस पर इन सबके ऊपर उड़ती सैकड़ों पतंगें।
यही दृश्य इस आयोजन को सामान्य पतंगबाजी से अलग बनाता है।
यहां आने वाले लोगों को सिर्फ पतंग उड़ाने की जगह नहीं मिलेगी। उन्हें पुरानी दिल्ली की संस्कृति को महसूस करने का मौका मिलेगा।
2,500 रुपये में क्या मिलेगा?
इस आयोजन के लिए टिकट की कीमत 2,500 रुपये है। कार्यक्रम करीब दो घंटे का है।
इसमें पतंगबाजी के साथ चाय, कॉफी और अन्य पेय उपलब्ध रहेंगे। इसके बाद चार कोर्स की हाई टी और पुरानी दिल्ली के लोकप्रिय व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकेगा।
बैठने और खड़े होने की व्यवस्था रहेगी। कार्यक्रम हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होगा।
पांच साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए टिकट लेना जरूरी है। सभी उम्र के लोगों को प्रवेश दिया जाएगा।
कार्यक्रम खुली जगह में आयोजित होगा। बच्चों के लिए इसे अनुकूल रखा गया है।
पुरानी दिल्ली की हवेलियों के लिए उम्मीद
हवेली धर्मपुरा की बहाली का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि पुरानी इमारतों को बचाया जा सकता है।
शाहजहानाबाद की गलियों में कभी हजारों हवेलियां थीं। समय के साथ इनमें से कई खत्म हो गईं। कई पर नए निर्माण हो गए। कई जर्जर होकर गिरने की कगार पर पहुंच गईं।
हवेली धर्मपुरा की कहानी ऐसे समय में उम्मीद पैदा करती है।
विजय गोयल और सिद्धांत गोयल ने भी माना कि जब उन्होंने पहली बार हवेली देखी थी तो उसकी हालत देखकर यह समझना मुश्किल था कि इसे कितना बचाया जा सकेगा।
लेकिन छह साल की मेहनत के बाद तस्वीर बदल गई।
आज यह हवेली सिर्फ पुरानी दिल्ली की वास्तुकला की पहचान नहीं है। यहां लोग ठहरते हैं। खाना खाते हैं। ऐतिहासिक वातावरण महसूस करते हैं। और अब स्वतंत्रता दिवस पर इसकी छत से पतंग भी उड़ा सकते हैं।
इस बार आजादी का जश्न थोड़ा अलग हो सकता है
स्वतंत्रता दिवस पर पुरानी दिल्ली की पतंगबाजी देखने का अपना आनंद है। लेकिन इस बार अनुभव थोड़ा अलग हो सकता है।
14 से 16 अगस्त तक शाम चार बजे हवेली धर्मपुरा की छत पर पहुंचिए। हाथ में पतंग की डोर लीजिए। सामने पुरानी दिल्ली का आसमान होगा।
जामा मस्जिद और लाल किले के बीच उड़ती पतंगें होंगी।
कहीं कोई पेंच लड़ेगा। कहीं कोई पतंग कटेगी। बच्चे खुशी से शोर करेंगे। आसपास चाय और कॉफी की खुशबू होगी।
फिर पुरानी दिल्ली की चाट और चार कोर्स हाई टी का स्वाद मिलेगा।
और जब सूरज ढलने लगेगा तो शायद उस वक्त समझ आएगा कि किसी शहर की विरासत सिर्फ उसकी इमारतों में नहीं रहती।
वह उसकी गलियों में रहती है।
उसके खानपान में रहती है।
उसकी पतंगों में रहती है।
और उन लोगों की यादों में रहती है, जो उसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे पहुंचाते हैं।
हवेली धर्मपुरा की छत से इस स्वतंत्रता दिवस पर उड़ने वाली पतंगें शायद इसी पुरानी दिल्ली की कहानी का नया अध्याय लिखेंगी।
हवेली धर्मपुरा कैसे पहुंचें?
1. मेट्रो द्वारा (सबसे आसान और उत्तम तरीका)
हवेली धर्मपुरा तक पहुंचने के लिए दिल्ली मेट्रो सबसे आरामदायक जरिया है। आपके पास दो प्रमुख मेट्रो विकल्प उपलब्ध हैं:
- जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन (वायलेट लाइन): यह हवेली का सबसे निकटतम मेट्रो स्टेशन है। स्टेशन के गेट नंबर 3 से बाहर निकलने के बाद हवेली धर्मपुरा की दूरी मात्र 300 से 400 मीटर (लगभग 5 से 7 मिनट पैदल रास्ता) है। आप गेट से बाहर आकर गली गुलियान या कत्रा नीलब के रास्ते पैदल हवेली पहुंच सकते हैं।
- चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन (येलो लाइन): यदि आप येलो लाइन से आ रहे हैं तो चांदनी चौक स्टेशन पर उतरें। यहां से हवेली लगभग 1 किलोमीटर दूर है। आप स्टेशन से ई-रिक्शा या साइकिल रिक्शा लेकर गली पराठे वाली या कत्रा नीलब मार्ग से हवेली धर्मपुरा तक आ सकते हैं।
2. निजी वाहन या कैब द्वारा
यदि आप अपनी कार या ऑनलाइन कैब (जैसे Uber या Ola) से आ रहे हैं तो ध्यान रखें कि वाहन सीधे हवेली के दरवाजे तक नहीं जा सकता क्योंकि गलियां संकरी हैं।
- अपनी कार को नेताजी सुभाष मार्ग (जामा मस्जिद पार्किंग) या परेड ग्राउंड पार्किंग में पार्क करें।
- वहां से हवेली धर्मपुरा के लिए 5 से 10 मिनट का पैदल रास्ता तय करें या स्थानीय साइकिल रिक्शा ले लें।
स्वतंत्रता दिवस पतंगबाजी इवेंट की बुकिंग कैसे करें?
हवेली धर्मपुरा में 14 से 16 अगस्त तक आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस पतंग उत्सव के लिए सीटें सीमित रखी जाती हैं। आप निम्नलिखित तरीकों से अपनी बुकिंग कर सकते हैं:
1.आधिकारिक वेबसाइट या इवेंट टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर जाएं:
आप ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म (जैसे BookMyShow या Paytm Insider) पर जाएं और खोज बार में “Kite Flying at Haveli Dharampura” खोजें। इसके अलावा आप हवेली धर्मपुरा की आधिकारिक वेबसाइट havelidharampura.com पर भी जा सकते हैं।
2.दिनांक और समय (स्लॉट) चुनें:
14, 15 या 16 अगस्त में से अपनी पसंद की तारीख चुनें। इवेंट का मुख्य समय शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक का है। अपनी सुविधा अनुसार उपलब्ध स्लॉट का चयन करें।
3.टिकट की संख्या और विवरण दर्ज करें:
प्रति व्यक्ति टिकट का मूल्य ₹2500 है (5 वर्ष और उससे अधिक आयु के लिए टिकट अनिवार्य है)। अपनी आवश्यकतानुसार सदस्यों की संख्या दर्ज करें।
4.ऑनलाइन भुगतान पूरा करें और ई-पास प्राप्त करें:
क्रेडिट/डेबिट कार्ड, UPI या नेट बैंकिंग के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया पूरी करें। भुगतान सफल होने पर आपको ईमेल और व्हाट्सएप पर ई-टिकट/क्यूआर कोड प्राप्त होगा, जिसे प्रवेश द्वार पर दिखाना होगा।
5.फोन या डायरेक्ट कॉल के माध्यम से बुकिंग (वैकल्पिक):
यदि आप ऑनलाइन बुकिंग में कठिनाई महसूस करते हैं, तो आप हवेली धर्मपुरा के आधिकारिक संपर्क नंबरों पर सीधे कॉल करके या info@havelidharampura.com पर ईमेल भेजकर भी अपनी टेबल/स्लॉट बुक करा सकते हैं।
यात्रा के लिए जरूरी सुझाव
- समय से पहले पहुंचें: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला और जामा मस्जिद के आसपास सुरक्षा जांच कड़ी होती है, इसलिए अपने तय स्लॉट से कम से कम 30-45 मिनट पहले पहुंचे।
- आरामदायक कपडे़ व जूते पहनें: पुरानी दिल्ली की गलियों में थोड़ा पैदल चलना पड़ता है और छत पर पतंगबाजी का आनंद लेना होता है, इसलिए आरामदायक जूते पहनना सुविधाजनक रहेगा।
AEO के लिए सीधे सवालों के जवाब
हवेली धर्मपुरा कहां है?
हवेली धर्मपुरा पुरानी दिल्ली के धर्मपुरा इलाके में स्थित ऐतिहासिक हवेली है। यह चांदनी चौक और जामा मस्जिद के आसपास के पुराने शाहजहानाबाद क्षेत्र का हिस्सा है।
हवेली धर्मपुरा कब बनी थी?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार हवेली धर्मपुरा का निर्माण 1887 में हुआ था।
हवेली धर्मपुरा की खासियत क्या है?
इसमें पुरानी दिल्ली की पारंपरिक वास्तुकला, नक्काशीदार पत्थर, लकड़ी का बारीक काम, पुराने झरोखे और बालकनियां देखने को मिलती हैं।
हवेली धर्मपुरा का जीर्णोद्धार कितने समय में हुआ?
हवेली की बहाली का काम करीब छह साल तक चला। इसमें लगभग 50 कारीगरों ने लगातार मेहनत की।
हवेली धर्मपुरा को UNESCO से क्या पहचान मिली?
इसके संरक्षण को UNESCO Asia Pacific Awards for Cultural Heritage Conservation में विशेष उल्लेख मिला था।
स्वतंत्रता दिवस पर हवेली धर्मपुरा में पतंगबाजी कब होगी?
पतंगबाजी का आयोजन 14 से 16 अगस्त तक शाम 4 बजे से होगा।
पतंगबाजी की टिकट कितनी है?
उपलब्ध आयोजन जानकारी के अनुसार टिकट की कीमत 2,500 रुपये है।
पतंगबाजी के साथ क्या मिलेगा?
आयोजन में चाय, कॉफी और अन्य पेय के साथ पुरानी दिल्ली की चाट और चार कोर्स हाई टी का अनुभव दिया जाएगा।
कार्यक्रम कितनी देर का है?
पतंगबाजी और हाई टी का पूरा अनुभव करीब दो घंटे का है।
क्या बच्चे भी इसमें जा सकते हैं?
हां। आयोजन सभी उम्र के लोगों के लिए है। पांच साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए टिकट जरूरी है।

