गौरव गोगोई पर पाकिस्तान कनेक्शन का आरोप,असम सीएम के आरोपों पर AIUDF का पलटवार
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, गुवाहाटी / नई दिल्ली
असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर लगाए गए “पाकिस्तान से कथित संबंधों” के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे चुनावी राजनीति से प्रेरित बताया है।
AIUDF के महासचिव रफीकुल इस्लाम ने रविवार को गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इनमें सच्चाई है तो सरकार ने कार्रवाई करने में दो साल की देरी क्यों की। उन्होंने कहा, “अगर गौरव गोगोई या उनकी पत्नी के पाकिस्तान से किसी तरह के संबंध हैं, तो कानून के तहत तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए थी। आखिर दो साल तक सरकार क्या कर रही थी?”
‘यह सिर्फ़ राजनीतिक बयानबाज़ी’
रफीकुल इस्लाम ने साफ़ शब्दों में कहा कि यह मामला तथ्यों से ज़्यादा राजनीति से जुड़ा हुआ लगता है। उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि अगर आरोप इतने गंभीर हैं, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों लगातार संसद में गौरव गोगोई के भाषण सुनते रहे।
“मुझे नहीं लगता कि यह इससे ज़्यादा कुछ है सिवाय सियासी बयानबाज़ी के,” उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री का आरोप और प्रेस कॉन्फ्रेंस
इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गौरव गोगोई पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद की पत्नी एलिज़ाबेथ कोलबर्न गोगोई का संबंध पाकिस्तानी नागरिक अली तौक़ीर शेख से रहा है और उन्होंने 2011–12 के दौरान पाकिस्तान में काम किया था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यह मामला केवल निजी संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
सरमा ने एक पुरानी तस्वीर का भी ज़िक्र किया, जिसमें गौरव गोगोई कथित तौर पर कुछ युवाओं के साथ पाकिस्तान दूतावास जाते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उस समय भारत–पाकिस्तान संबंध बेहद संवेदनशील थे और इस तरह की गतिविधियां “पाकिस्तान को वैध ठहराने” की कोशिश के रूप में देखी जा सकती हैं।
भावनात्मक संदर्भ और राष्ट्रवाद
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कारगिल युद्ध का भी उल्लेख किया और कहा कि असम के कैप्टन जितु गोगोई ने देश के लिए बलिदान दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे पृष्ठभूमि में एक सांसद द्वारा पाकिस्तान से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होना लोगों की भावनाओं को आहत कर सकता है।
उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरे देश ने प्रधानमंत्री के पीछे एकजुट होकर समर्थन दिया। ऐसे समय में इस तरह की तस्वीरें और गतिविधियां गंभीर सवाल खड़े करती हैं।”
जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का फैसला
मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी घोषणा की कि असम मंत्रिमंडल ने इस पूरे मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने का फैसला लिया है। उनके मुताबिक, राज्य सरकार केंद्र से औपचारिक सहमति मिलने के बाद यह मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप देगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच ज़रूरी है।
चुनावी माहौल में बढ़ता टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में चुनाव नज़दीक आने के साथ ही इस तरह के मुद्दे और तेज़ होंगे। एक ओर भाजपा राष्ट्रवाद और सुरक्षा जैसे विषयों को केंद्र में रख रही है, वहीं विपक्ष इसे ध्यान भटकाने और चुनावी लाभ के लिए उठाया गया मुद्दा बता रहा है।
AIUDF और कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि यदि आरोपों में दम होता, तो कार्रवाई पहले ही हो जानी चाहिए थी। वहीं, भाजपा का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में देर से ही सही, लेकिन सख़्ती ज़रूरी है।
आगे क्या?
फिलहाल यह विवाद सियासी बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपे जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोप कितने ठोस हैं और कितने चुनावी रणनीति का हिस्सा। लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा असम चुनाव के दौरान राजनीतिक बहस के केंद्र में रहने वाला है—जहां राष्ट्रवाद, सुरक्षा और राजनीति एक बार फिर आमने-सामने होंगे।

