यूएई में भारतीयों के लिए सस्ता हुआ सोना
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली, दुबई
अगर आप यूएई में रहते हैं और भारत आने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए राहत लेकर आई है। भारत सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद अब दुबई और दूसरे खाड़ी देशों में सोना खरीदना भारतीयों के लिए पहले से ज्यादा फायदे का सौदा बन गया है। खासकर उन प्रवासी भारतीयों के लिए, जो शादी, निवेश या गिफ्टिंग के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं।
भारत ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले के बाद भारत और यूएई के बाजार में सोने की कीमत का अंतर तेजी से बढ़ गया है। ज्वेलरी कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अब यूएई में सोना भारत के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत तक सस्ता पड़ सकता है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों पर दिखाई देगा। हर साल गर्मियों और शादी के मौसम में बड़ी संख्या में भारतीय परिवार यूएई से भारत लौटते हैं। ऐसे में कई लोग अब भारत पहुंचने से पहले दुबई या दूसरे खाड़ी बाजारों से सोना खरीदना ज्यादा बेहतर समझ सकते हैं।
मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के अंतरराष्ट्रीय परिचालन प्रमुख शमलाल अहमद का कहना है कि भारत में शुल्क बढ़ने के बाद यूएई में सोने की कीमत का अंतर और साफ दिखाई देगा। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पहले ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर चल रही है। ऐसे में खरीदारी पर बचत की रकम भी पहले से अधिक हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि भारत के नए सीमा शुल्क नियमों के अनुसार फरवरी 2026 से महिलाएं 40 ग्राम तक सोने के आभूषण बिना शुल्क भारत ले जा सकती हैं। पुरुषों के लिए यह सीमा 20 ग्राम तय की गई है।
इसका मतलब यह हुआ कि यदि चार सदस्यों का एक परिवार भारत लौटता है, तो वह सामूहिक रूप से 140 ग्राम तक सोने के आभूषण बिना अतिरिक्त शुल्क के साथ ले जा सकता है। ऐसे में यूएई में खरीदारी करने वाले परिवारों को बड़ी बचत का मौका मिल सकता है।
दुबई लंबे समय से सोने की खरीदारी के लिए दुनिया के सबसे लोकप्रिय बाजारों में गिना जाता है। यहां सोने की शुद्धता को लेकर सरकारी नियम काफी सख्त हैं। साथ ही ज्वेलरी की मेकिंग चार्ज भी कई देशों के मुकाबले कम रहती है। यही वजह है कि भारतीयों के बीच दुबई को लंबे समय से “गोल्ड शॉपिंग हब” माना जाता रहा है।
यूएई में एक और फायदा निवेश के लिहाज से भी है। यहां निवेश के लिए खरीदे जाने वाले गोल्ड बार पर वैट नहीं लगता। वहीं, पर्यटक ज्वेलरी खरीदने पर वैट रिफंड का लाभ भी उठा सकते हैं। इससे कुल खर्च और कम हो जाता है।
ज्वेलरी कारोबारी रमेश वोरा का कहना है कि भारत में शुल्क बढ़ने के बाद घरेलू कीमत और अंतरराष्ट्रीय कीमत के बीच का अंतर बढ़ गया है। इसका सीधा लाभ खाड़ी देशों के बाजार को मिलेगा। उनके मुताबिक इस गर्मी में भारतीय प्रवासियों और पर्यटकों की खरीदारी बढ़ सकती है। कई दुकानदारों को रिकॉर्ड बिक्री की उम्मीद है।
खाड़ी देशों के ज्वेलर्स भी इस बदलाव पर करीब से नजर रखे हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि जुलाई और अगस्त के दौरान भारतीय ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी। यह वही समय होता है, जब बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय छुट्टियों में घर लौटते हैं और शादी विवाह का मौसम भी शुरू होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई में सिर्फ कीमत ही आकर्षण नहीं है। यहां डिजाइन की विविधता भी एक बड़ी वजह है। दुबई और खाड़ी देशों के बाजारों में 20 से ज्यादा देशों से ज्वेलरी आती है। यहां लाखों डिजाइनों की उपलब्धता रहती है। जबकि भारत में आयात शुल्क बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय डिजाइनों की पहुंच महंगी हो सकती है।
सोने की बढ़ती मांग के पीछे केवल परंपरा नहीं, आर्थिक चिंता भी एक कारण बन रही है। आर्थिक मामलों के जानकार स्टीफन इनिस का मानना है कि भारत में लोग अब सिर्फ शादी या त्योहारों के लिए सोना नहीं खरीद रहे। महंगाई, रुपये की कमजोरी और वैश्विक तनाव के बीच लोग सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में भी देखने लगे हैं।
उनके मुताबिक 2026 की शुरुआत में भारत का औसत मासिक सोना आयात 83 टन तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 53 टन था। पहली तिमाही में सोने की मांग का मूल्य बढ़कर रिकॉर्ड 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
यह बढ़ती मांग भारत सरकार के लिए चिंता का विषय भी बन रही है। तेल की ऊंची कीमतें और सोने का भारी आयात विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ा सकता है। माना जा रहा है कि इसी आर्थिक दबाव को देखते हुए सरकार ने आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया।
हालांकि इसका दूसरा असर सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है। भारत में सोना अब महंगा हो सकता है। ऐसे में विदेशों में रहने वाले भारतीय खासकर यूएई में रहने वाले लोग खरीदारी की रणनीति बदल सकते हैं।
दुबई के सर्राफा बाजारों में पहले से ही भारतीय ग्राहकों की अच्छी मौजूदगी रहती है। अब शुल्क अंतर बढ़ने के बाद यह रुझान और मजबूत हो सकता है। कई लोग शादी के गहनों से लेकर निवेश के लिए सोना भारत की बजाय यूएई में खरीदना पसंद कर सकते हैं।
खास बात यह है कि सोना भारतीय समाज में केवल निवेश नहीं, भावनाओं से भी जुड़ा है। शादी, त्योहार और पारिवारिक अवसरों में इसकी खास जगह होती है। ऐसे में जहां कीमत कम और विकल्प ज्यादा मिलें, लोग उसी बाजार की ओर रुख करते हैं।
फिलहाल हालात यही संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में यूएई के ज्वेलरी बाजारों में भारतीय ग्राहकों की भीड़ बढ़ सकती है। वजह साफ है। भारत में बढ़ी ड्यूटी ने दुबई के सोने को अब पहले से ज्यादा आकर्षक बना दिया है।
न्यूज सोर्सः गल्फ न्यूज

