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खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ईरान अलर्ट, अमेरिका-इजरायल को सख्त चेतावनी

तेहरान।

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार से पहले पूरे देश में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है। लाखों लोगों की संभावित मौजूदगी और दुनिया भर से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल को साफ संदेश दिया है कि यदि अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई हुई तो उसका जवाब बेहद कड़ा होगा।

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब पूरे मध्य पूर्व की नजर तेहरान पर टिकी हुई है। अंतिम संस्कार में भारत, पाकिस्तान, रूस, चीन और कई अन्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों के शामिल होने की उम्मीद है। ईरान का कहना है कि यह केवल एक राजकीय समारोह नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता का प्रदर्शन भी होगा।

ईरानी सेना के खातम अल अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के कमांडर अली अब्दुल्लाही ने कहा कि अमेरिका और इजरायल किसी भी तरह की गलतफहमी में न रहें। ईरानी सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी हमले या उकसावे का तत्काल तथा प्रभावी जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां हर संभावित खतरे पर लगातार नजर रख रही हैं।

ईरान में छह दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है। सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया के अनुसार देश की जमीनी सीमाओं, समुद्री क्षेत्रों और हवाई सुरक्षा तंत्र को अतिरिक्त बलों से मजबूत किया गया है। नौसेना और वायु रक्षा इकाइयों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।

सरकारी अनुमान के अनुसार अंतिम संस्कार में डेढ़ करोड़ से दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो यह ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार माना जाएगा। तेहरान, कोम और मशहद में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। राजमार्गों को अस्थायी पार्किंग में बदला जा रहा है जबकि मस्जिदों, स्कूलों, विश्वविद्यालयों और खेल परिसरों को श्रद्धांजलि देने आए लोगों के ठहरने के लिए तैयार किया गया है।

अंतिम संस्कार यात्रा चार जुलाई को तेहरान से शुरू होगी। इसके बाद यह कोम पहुंचेगी। फिर इराक के पवित्र शहर नजफ और करबला में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होंगे। नौ जुलाई को मशहद में खामेनेई को सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। इसी शहर को उनका पैतृक नगर माना जाता है।

इस पूरे कार्यक्रम के दौरान सबसे अधिक चर्चा वर्तमान सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने पिता के जनाजे की नमाज का नेतृत्व करने और सार्वजनिक रूप से लोगों के बीच आने की इच्छा जताई थी। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने इसे अत्यधिक जोखिम भरा बताते हुए उनकी अनुमति नहीं दी।

भारत में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि हकीम इलाही ने भारतीय मीडिया से बातचीत में बताया कि मोजतबा खामेनेई जनता के बीच आना चाहते थे। लेकिन सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें स्पष्ट रूप से सलाह दी कि वर्तमान हालात में ऐसा करना सुरक्षित नहीं होगा। उनका कहना था कि आधुनिक निगरानी तकनीक के कारण उनकी लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रहने की सलाह दी।

हकीम इलाही ने यह भी कहा कि यदि हालात सामान्य होते तो नए सर्वोच्च नेता स्वयं अंतिम संस्कार की नमाज अदा कराते। लेकिन मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों में यह संभव नहीं माना गया।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने खामेनेई की मृत्यु को देश के लिए एक कठिन क्षण बताते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय एकता और नए संकल्प का समय है। उन्होंने नागरिकों से शांति बनाए रखने और बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी गालिबाफ ने भी लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह समारोह केवल श्रद्धांजलि नहीं बल्कि इस्लामिक गणराज्य के प्रति जनता की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक होगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि जिन देशों ने हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल के हमलों का खुला समर्थन किया था, उन्हें अंतिम संस्कार में आमंत्रित नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत, पाकिस्तान, रूस, चीन, जॉर्जिया, क्यूबा सहित तीस से अधिक देशों के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल समारोह में भाग लेंगे। इसके अलावा करीब नब्बे देशों के धार्मिक नेता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। वहीं कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को पार्टी की ओर से अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए नामित किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने शोक संदेश में कहा कि यह यात्रा भारत और ईरान के लंबे और ऐतिहासिक संबंधों की प्रतीक है।

इस बीच ईरान ने अफगानिस्तान से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। डोगहारून सीमा चौकी के माध्यम से वैध वीजा रखने वाले अफगान नागरिकों को प्रवेश दिया जाएगा। प्रशासन ने लगभग ढाई हजार विशेष वीजा जारी किए हैं और अंतिम संस्कार के बाद उन्हें वापस सीमा तक पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है।

क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी ईरान का रुख पहले से अधिक सख्त दिखाई दे रहा है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को केवल निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन करने की चेतावनी दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का यह अंतिम संस्कार समारोह केवल एक धार्मिक और राजकीय आयोजन नहीं रह गया है। यह क्षेत्रीय राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होता है या फिर क्षेत्रीय तनाव किसी नए मोड़ पर पहुंचता है।

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