एएमयू सैटेलाइट मिशन: छात्रों की टीम पेलोड टेस्टिंग के लिए अहमदाबाद रवाना
अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के नाम एक और बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि जुड़ने जा रही है। यूनिवर्सिटी के छात्र शोधकर्ताओं की एक विशेष टीम अहमदाबाद स्थित इन-स्पेस टेक्निकल सेंटर (आईटीसी) के लिए रवाना हो गई है। यह टीम वहां यूनिवर्सिटी के पहले ऐतिहासिक सैटेलाइट मिशन ‘एसएस एएमयू सैट’ (SS AMU SAT) के पेलोड की क्वालिफिकेशन टेस्टिंग यानी योग्यता परीक्षण करेगी। इन परीक्षणों का सफलतापूर्वक पूरा होना इस सैटेलाइट के अंतरिक्ष में उड़ान भरने की तैयारी की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम साबित होगा। यह मिशन भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम में एएमयू के अभूतपूर्व योगदान को भी रेखांकित करता है।
यह पूरा सैटेलाइट मिशन पूरी तरह से छात्रों के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। यह मिशन छोटे सैटेलाइट इंजीनियरिंग और पृथ्वी अवलोकन अनुसंधान (अर्थ ऑब्जर्वेशन रिसर्च) के क्षेत्र में भारत की स्वदेशी क्षमताओं का एक बेहतरीन प्रदर्शन है। अंतरिक्ष में जाने के बाद यह सैटेलाइट मुख्य रूप से रात के समय पृथ्वी पर दिखने वाली रोशनी का अध्ययन करेगा। इस अध्ययन से देश में आर्थिक गतिविधियों और शहरी विकास के स्तर को समझने में शोधकर्ताओं को बड़ी मदद मिलेगी। इसके साथ ही यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में रहकर एक बेहद आधुनिक और अनोखी ऑनबोर्ड इमेज कम्प्रेशन तकनीक का भी लाइव प्रदर्शन करेगा।
सैटेलाइट में लगी है क्रेडिट कार्ड के आकार की जादुई चिप
इस सैटेलाइट के पेलोड में एक आधुनिक ऑनबोर्ड इमेजिंग सिस्टम, एक समर्पित पेलोड कंप्यूटर और एक पावर कंडीशनिंग यूनिट को आपस में जोड़ा गया है। इस पूरे सिस्टम के केंद्र में एक बेहद छोटा और अनोखा इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज है जिसका आकार महज एक क्रेडिट कार्ड जितना है। इस छोटे से पैकेज में एक नई और क्रांतिकारी इमेज कम्प्रेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक तस्वीर की गुणवत्ता और उसकी स्पष्टता (स्पेशियल रेजोल्यूशन) को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए इमेज डेटा के आकार को 80 गुना तक कम करने की क्षमता रखती है। इस बड़े आविष्कार की वजह से अंतरिक्ष यान के वजन में भारी कमी आई है जिससे सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने की लॉन्चिंग लागत भी बहुत कम हो जाएगी।
अहमदाबाद के इन-स्पेस सेंटर में होने वाले आगामी क्वालिफिकेशन टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन टेस्ट के दौरान यह जांचा जाएगा कि यह पेलोड भारत के प्रमुख लॉन्च वाहनों जैसे पीएसएलवी (PSLV) और एसएसएलवी (SSLV) के साथ यांत्रिक और विद्युत रूप से पूरी तरह मेल खाता है या नहीं। इन परीक्षणों के सफल होने के बाद ही सैटेलाइट को अंतरिक्ष उड़ान के लिए पूरी तरह से तैयार और सुरक्षित माना जाएगा।
पांच होनहार छात्रों की टीम संभाल रही है कमान
इस पूरे मिशन को धरातल पर उतारने में एएमयू के पांच होनहार छात्रों की टीम ने सबसे मुख्य भूमिका निभाई है। इस टीम में मुशर्रफ अब्दुल्ला, आसिफ अली, अब्दुल्ला अहमद सिद्दीकी, राज सिंह और मोहम्मद ओवैस शामिल हैं। इन छात्रों ने दिन-रात एक करके सैटेलाइट के विकास में अपना योगदान दिया है।
परियोजना के शैक्षणिक मार्गदर्शक प्रोफेसर सैयद फहद अनवर ने इस सफर के बारे में कुछ बेहद दिलचस्प जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस प्रोजेक्ट से जुड़े छात्रों ने सैटेलाइट के कई बेहद जटिल और महत्वपूर्ण सबसिस्टम पूरी तरह से यूनिवर्सिटी के भीतर ही तैयार किए हैं। इनमें इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम (EPS), एटीट्यूड डिटरमिनेशन एंड कंट्रोल सिस्टम (ADCS), पेलोड सिस्टम, ग्राउंड स्टेशन और अन्य

