दिल्ली पुलिस पर उठे सवाल: पत्रकारों से बदसलूकी और आरोपियों के बेखौफ बयानों से गरमाया माहौल
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी में कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालने वाली दिल्ली पुलिस की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल खड़े होने लगे हैं। हाल ही में सामने आई दो घटनाओं ने महकमे की साख पर गहरा असर डाला है। पहली घटना में दो महिला पत्रकारों ने पुलिस हिरासत में मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी घटना में जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान एक व्यक्ति पर हमले का मामला और आरोपी का सोशल मीडिया पर दिया गया बयान लगातार सुर्खियों में है। इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।
रात के तीन बजे तक दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन में लोग FIR दर्ज करने की मांग करते रहे, लेकिन पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ न तो FIR दर्ज हुई और न ही कोई कार्रवाई की गई।
— Shams Tabrez Qasmi (@ShamsTabrezQ) September 4, 2026
Huda Zariwala और दूसरे साथियों ने पूरी कोशिश की। लड़ाई अभी… pic.twitter.com/tRwdbk91nK
साकेत में महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार का मामला
साकेत इलाके में मैक्स अस्पताल के पास आयोजित एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान यह पूरा घटनाक्रम शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शामिल होने पहुंचे थे। स्वतंत्र रूप से काम करने वाली पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान वहां रिपोर्टिंग के लिए मौजूद थीं। पत्रकारों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल पूछना चाहती थीं, लेकिन उन्हें पुलिस ने रोक दिया और हिरासत में लेकर साकेत थाने ले गई।
4 PM की पत्रकार शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान पर हुई पुलिस बर्बरता पर प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने दिल्ली पुलिस से जाँच करवाने और दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की माँग की है। pic.twitter.com/x9k3knEPDK
— Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک (@Ashok_Kashmir) September 3, 2026
पत्रकारों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप
डिजिटल प्लेटफॉर्म 4PM न्यूज नेटवर्क से जुड़ी पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर आपबीती साझा की। शाहीन खान और नफीसा खान ने आरोप लगाया कि साकेत थाने के एक बंद कमरे में महिला पुलिसकर्मियों और अन्य अधिकारियों ने उनसे हाथापाई की और लाठियों से पीटा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहचान जानने के बाद उनके साथ धार्मिक आधार पर अभद्रता की गई और उन पर लाठियां चलाई गईं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पत्रकारों के शरीर पर चोटों और नीले निशानों को साफ देखा जा सकता है।
प्रेस संगठनों की सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना के सामने आने के बाद देश के प्रमुख पत्रकार संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वूमेंस प्रेस कॉर्प्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने एक संयुक्त बयान जारी किया। संगठनों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से साकेत थाने के एसएचओ और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की गई है।
जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान एक दलित युवती निशु के पिता पर कुछ लोगों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया था, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थीं।
— Millat Times (@Millat_Times) September 3, 2026
अब स्वतंत्र भारद्वाज नाम का यह व्यक्ति एक पॉडकास्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए कह रहा है कि, हमने निशु के बाप का सिर फाड़… pic.twitter.com/f6a30Cw2j9
दिल्ली पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पुलिस प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों महिलाओं ने वीवीआईपी रूट पर अपनी स्कूटी खड़ी कर रास्ते में बाधा उत्पन्न की थी। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उनसे बार-बार वाहन हटाने का अनुरोध किया गया, लेकिन मना करने पर उन्हें पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया था। पुलिस के मुताबिक थाने में मारपीट या सवाल पूछने के कारण कार्रवाई किए जाने के दावे मनगढ़ंत और गुमराह करने वाले हैं।
जंतर-मंतर आंदोलन और स्वतंत्र भारद्वाज का विवादित वीडियो
दूसरा मामला जंतर-मंतर पर आयोजित काकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़ा है। इस आंदोलन के दौरान दलित छात्रा व कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज नाम के एक युवक का पॉडकास्ट और वीडियो सामने आया। वीडियो में आरोपी यह दावा करता नजर आ रहा है कि उसने पीड़ित के सिर पर वार किया और इसके बावजूद पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकी।
स्वतन्त्र मिश्रा को अब डर लग रहा है. इसलिए वह असली बयान को "कटा हुआ" बता रहा है. पॉडकास्ट में ठीक से बात कर रहा था अब डर के मारे तोतला रहा है. कह रहा है कि लोग उसको मारना चाहते है, इसने क्या किया, क्या बोला- सुनिये
— Narendra Pratap (@hindipatrakar) September 4, 2026
"निशू के बाप का हम सर फाड़े है, बंदा मरने की स्थिति में… https://t.co/txhVihKb0h pic.twitter.com/ONaHhj3N9p
राजनीतिक संरक्षण के दावों से बढ़ा विवाद
सोशल मीडिया पर वायरल इस क्लिप में युवक राजनीतिक पहुंच और शीर्ष नेताओं के नाम का हवाला देकर पुलिस कार्रवाई से बचने की बात कहता दिख रहा है। इस वीडियो के सामने आते ही विपक्षी दलों ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्षी नेताओं का कहना है कि खुलेआम हिंसा का दावा करने वाले व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई न होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। इस मामले को लेकर काकरोच जनता पार्टी के सदस्यों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने की ओर मार्च कर एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग भी की है।
पुलिस ने दावों का किया खंडन
विवाद बढ़ता देख नई दिल्ली जिले के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस कार्यालय ने मामले में स्थिति साफ की। पुलिस ने बताया कि 23 जून को जंतर-मंतर पर हुई झड़प के दौरान संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। मेडिकल जांच के अनुसार यह चोट किसी कड़े से लगी थी और गंभीर श्रेणी में नहीं थी। पुलिस के अनुसार घटना के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए मामला दर्ज किया गया था और आरोपी को पूछताछ के लिए नोटिस दिया गया। पुलिस ने किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या ढिलाई के आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
Have you observed this disturbing pattern? The more you abuse Muslims, target Dalits, spew hatred make derogatory remarks about a community and sexualize women, the more access you seem to get to the top leaders of a particular ideology. Unfortunately, Such conduct is rewarded… https://t.co/TaCINb4Nlm pic.twitter.com/HxpCShegug
— Mohammed Zubair (@zoo_bear) September 3, 2026
प्रशासनिक साख पर सवाल
जंतर-मंतर आंदोलन में बच्चों पर कथित लाठीचार्ज, वाटर कैनन या पेलेट गन के इस्तेमाल की खबरों से लेकर इन नए मामलों तक, दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर लगातार चर्चाएं जारी हैं। एक तरफ जहां पुलिस बल इसे सुरक्षा मानकों और स्थापित प्रक्रियाओं का पालन बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ नागरिक समाज और विपक्षी दल निष्पक्षता की मांग पर अड़े हुए हैं। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इन दोनों मामलों में जांच की प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

