ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की पहली चेतावनी: शहीदों के खून का बदला लेंगे, होर्मुज़ जलडमरूमध्य भी होगा हथियार
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली,तेहरान/दुबई:
ईरान-अमेरिका-इज़रायल युद्ध के बीच ईरान की सत्ता में बड़ा बदलाव सामने आया है। नए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने पद संभालने के बाद पहली बार राष्ट्र के नाम संदेश जारी किया है। इस संदेश में उन्होंने युद्ध में मारे गए लोगों का बदला लेने की कसम खाते हुए अमेरिका और उसके सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने का विकल्प ईरान के पास मौजूद है और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि इस संदेश से ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उनका संदेश ईरान के सरकारी टेलीविजन पर एक एंकर द्वारा पढ़कर सुनाया गया, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर युद्ध की रणनीति का वास्तविक नियंत्रण किसके हाथ में है।
बदले की कसम और अमेरिका को चेतावनी
अपने संदेश में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान अपने दुश्मनों से युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शहीदों के खून का बदला लेना ईरान की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा,
“मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि हम अपने शहीदों के खून का बदला लेने की कोशिश कभी नहीं छोड़ेंगे। दुश्मन से हम मुआवजा हासिल करेंगे। अगर वे मुआवजा देने से इनकार करते हैं तो हम उनकी संपत्तियों से उतना ही ले लेंगे या फिर उतनी ही तबाही मचाएंगे।”
खामेनेई का इशारा स्पष्ट रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल की ओर था, जिन पर ईरान ने युद्ध की शुरुआत करने का आरोप लगाया है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य को हथियार बनाने की बात
अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को होर्मुज़ जलडमरूमध्य को रणनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जिसके जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।
ईरान पहले ही इस जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सीमित कर चुका है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखी गई है और अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाकर अमेरिका और इज़रायल को अपने हमले रोकने के लिए मजबूर करना चाहता है।
पड़ोसी देशों से दोस्ती का दावा
मोजतबा खामेनेई ने अपने संदेश में यह भी कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ मित्रता चाहता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान केवल उन अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है जो क्षेत्र के विभिन्न देशों में मौजूद हैं।
हालांकि वास्तविकता इससे अलग दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में तेल अवसंरचना और नागरिक ठिकानों पर भी हमले हुए हैं, जिनके लिए ईरान समर्थित समूहों को जिम्मेदार माना जा रहा है।
परिवार के सदस्यों की मौत का जिक्र
अपने संदेश में मोजतबा खामेनेई ने भावुक लहजे में अपने परिवार के उन सदस्यों का जिक्र किया जो युद्ध में मारे गए। उन्होंने बताया कि उनके पिता के अलावा उनकी पत्नी, बहन और परिवार के अन्य सदस्य भी इस संघर्ष में मारे गए हैं।
उन्होंने कहा कि अपने पिता के पार्थिव शरीर को देखना उनके लिए एक सम्मान की बात थी। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपने पिता का शरीर देखा तो उनका हाथ अब भी मुट्ठी में बंद था, जो दृढ़ता और संघर्ष का प्रतीक था।
उन्होंने स्वीकार किया कि अपने पिता और ईरान के संस्थापक नेता आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी की विरासत को आगे बढ़ाना बेहद कठिन जिम्मेदारी है। लेकिन उन्होंने कहा कि जनता और ईश्वर की मदद से वह इस जिम्मेदारी को निभाने की कोशिश करेंगे।

सार्वजनिक रूप से सामने न आने से बढ़ी अटकलें
मोजतबा खामेनेई के संदेश से ज्यादा चर्चा उनके सार्वजनिक रूप से सामने न आने को लेकर हो रही है। रिपोर्टों के मुताबिक युद्ध के शुरुआती दिनों में हुए हमलों में वह घायल हो गए थे। हालांकि ईरानी सरकार ने उनकी चोटों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।
उनका संदेश पहले उनके कार्यालय द्वारा बनाए गए टेलीग्राम चैनल पर जारी किया गया और बाद में सरकारी टीवी पर पढ़कर सुनाया गया। संदेश में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि इसे कब रिकॉर्ड किया गया था या वह इस समय कहां मौजूद हैं।
इस असामान्य स्थिति ने विश्लेषकों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में ईरान की युद्ध रणनीति किसी और शक्ति केंद्र द्वारा नियंत्रित की जा रही है।
क्षेत्रीय युद्ध का विस्तार
इस बीच मध्य पूर्व में युद्ध लगातार फैलता जा रहा है। लेबनान से हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़रायल पर करीब 200 रॉकेट दागे। इसके जवाब में इज़रायल ने लेबनान और तेहरान में नए हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई।
ईरान समर्थित समूहों के अलावा यमन के हूती और इराक के कुछ सशस्त्र संगठन भी इस संघर्ष में सक्रिय हो गए हैं। ईरान ने अपने संदेश में इन सभी समूहों को “प्रतिरोध मोर्चे” का हिस्सा बताते हुए धन्यवाद दिया है।
मानवीय संकट गहराया
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार युद्ध के कारण ईरान में लगभग 32 लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। इनमें से ज्यादातर लोग तेहरान और अन्य बड़े शहरों से उत्तर की ओर या ग्रामीण इलाकों की तरफ पलायन कर रहे हैं।
लेबनान में भी करीब 7.5 लाख लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हो चुके हैं। लगातार हो रहे हमलों और मिसाइलों के कारण पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 1,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 10,000 से ज्यादा नागरिक घायल हुए हैं।
ईरान की शर्तें और अमेरिका की प्रतिक्रिया
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने संकेत दिया है कि युद्ध खत्म करने के लिए दुनिया को ईरान के “वैध अधिकारों” को मान्यता देनी होगी। साथ ही उन्होंने युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में किसी हमले की गारंटी की मांग भी की है।
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका “काम खत्म” करके रहेगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता लगभग पूरी तरह नष्ट कर दी गई है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो ईरान की बिजली व्यवस्था को एक घंटे के भीतर पूरी तरह ठप कर सकता है और उसे फिर से खड़ा करने में ईरान को 25 साल लग जाएंगे।
क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकी
ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका संघर्ष को और बढ़ाता है तो पूरे क्षेत्र की ऊर्जा और बिजली अवसंरचना को निशाना बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो आधे घंटे के भीतर पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब सकता है।
युद्ध का भविष्य अनिश्चित
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि ईरान की सत्ता संरचना में वास्तविक निर्णय कौन ले रहा है। नए सुप्रीम लीडर का सार्वजनिक रूप से सामने न आना और उनका संदेश अप्रत्यक्ष रूप से जारी होना इस अनिश्चितता को और बढ़ा रहा है।
हालांकि इतना स्पष्ट है कि ईरान की नीति में फिलहाल कोई नरमी दिखाई नहीं दे रही है। मोजतबा खामेनेई के संदेश से यह संकेत मिलता है कि ईरान अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखने के लिए तैयार है।
और इसी कारण मध्य पूर्व का यह युद्ध आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक तथा खतरनाक रूप ले सकता है।

