ट्रंप की धमकी पर ईरान का बड़ा जवाब
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता दिख रहा है। युद्ध, बातचीत और धमकियों के बीच दोनों देशों के तेवर लगातार सख्त होते जा रहे हैं। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को “पूर्ण हमले” की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर युद्ध दोबारा शुरू हुआ, तो दुनिया को “कई नए सरप्राइज” देखने को मिलेंगे।
यह बयानबाजी ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का संघर्ष 82वें दिन में प्रवेश कर चुका है। युद्ध भले ही ठहरे हुए मोड़ पर दिख रहा हो, लेकिन राजनीतिक बयान संकेत दे रहे हैं कि हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अमेरिका को सीधा संदेश देते हुए दावा किया कि युद्ध के दौरान अमेरिकी पक्ष को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि महीनों की लड़ाई के बाद अमेरिकी कांग्रेस ने भी अरबों डॉलर के कई सैन्य विमानों के नुकसान को स्वीकार किया है।
अराघची ने एक बड़ा दावा करते हुए लिखा कि ईरानी सेना दुनिया की पहली ऐसी ताकत साबित हुई जिसने आधुनिक एफ 35 लड़ाकू विमान को मार गिराया। उन्होंने कहा, “हमने इस युद्ध से बहुत कुछ सीखा है। जो अनुभव और जानकारी मिली है, उसके बाद यदि युद्ध फिर शुरू हुआ तो दुनिया को कई हैरान करने वाले नतीजे देखने को मिलेंगे।”
ईरान का यह बयान केवल जवाबी प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा। इसे भविष्य की चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है। खासकर तब, जब अमेरिका लगातार परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बना रहा है।
उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने रुख को और आक्रामक बना दिया है। ट्रंप ने कहा कि वह कुछ दिन पहले ईरान पर हमले का आदेश देने से “सिर्फ एक घंटे दूर” थे। लेकिन उन्होंने अंतिम समय में फैसला टाल दिया ताकि बातचीत की गुंजाइश बनी रहे।
ट्रंप के अनुसार, ईरान समझौते के लिए “बेचैन” है और बातचीत चाहता है। हालांकि उन्होंने साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं किया, तो अमेरिका “पूर्ण सैन्य कार्रवाई” के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, “हम ईरान को नया परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते। समय बहुत सीमित है। दो या तीन दिन, शायद इस हफ्ते के अंत तक या अगले सप्ताह की शुरुआत तक फैसला हो सकता है।”
ट्रंप के इस बयान ने पश्चिम एशिया में नई बेचैनी पैदा कर दी है। क्योंकि हाल के महीनों में उन्होंने कई बार कड़े बयान दिए हैं। लेकिन अब तक सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं हुई। इससे कई विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष दबाव की राजनीति खेल रहे हैं, जबकि जमीनी स्थिति एक तरह के गतिरोध में फंसी हुई है।
इसी बीच ईरान में भी माहौल बदलता दिख रहा है। युद्ध के लंबे दौर ने वहां सैन्य तैयारी और सुरक्षा रणनीति को नया रूप दिया है। ईरानी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि अगर अगला चरण शुरू हुआ, तो प्रतिक्रिया पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी।
अराघची के बयान में “सरप्राइज” शब्द ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। कई विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इसका मतलब नए सैन्य हथियार, साइबर क्षमताएं या क्षेत्रीय सहयोगी समूहों की भूमिका हो सकती है। हालांकि ईरान ने इस बारे में कोई खुला संकेत नहीं दिया है।
अमेरिका और इजरायल की ओर से भी ईरान पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। वॉशिंगटन का कहना है कि उसका मुख्य लक्ष्य ईरान की परमाणु क्षमता को रोकना है। वहीं तेहरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
हाल के महीनों में बातचीत की कई कोशिशें हुईं। लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। यूरोपीय देशों ने भी मध्यस्थता की कोशिश की, मगर अविश्वास की खाई लगातार गहरी होती गई।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर तनाव अचानक बढ़ा, तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। पूरा पश्चिम एशिया इसकी चपेट में आ सकता है। तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ सकता है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने अपने दावों और चेतावनियों के साथ खड़े हैं। अमेरिका दबाव बढ़ा रहा है। ईरान जवाबी ताकत दिखाने की बात कर रहा है। कूटनीति की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीन पर भरोसा कम दिखाई देता है।
अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले कुछ दिन बातचीत की तरफ ले जाएंगे या फिर हालात एक नए टकराव की ओर बढ़ेंगे। क्योंकि शब्दों की यह जंग अगर हकीकत में बदली, तो उसका असर सीमाओं से बहुत दूर तक महसूस किया जाएगा।

