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क्या नॉर्वे में ईद की नमाज के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है ?

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, ओसलो

कहने को उत्तरी यूरोप के   स्कैंडिनेवियाई देश नॉर्वे मंे इस्लाम धार्मिक लिहाज से दूरा बड़ा मजहब है, पर ईद के रोज यहां मुस्लिम देशों की तरह बहुत ज्यादा गहमागमी नहीं होती. मुसलमान सीमित हैं.सेलिब्रेशन भी सीमित होता है.

नॉर्वे के मुसलमान ईद कैसे मनाते हैं और इस दिन क्या-क्या होता है, इस बारे में सोशल मीडिया पर अधिक जानकारी नहीं है. बावजूद इसके बहुत छानबीन के बाद और कई तरह के वीडियो देखकर यह पता चला कि नॉर्वे में अलग ही अंदाज में ईद मनाई जाती है. यहां की ईद पर पाकिस्तान का पूरा प्रभाव है.

एक रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्वे में अधिकांश मुसलमान दूसरे देश से जाकर बसें हैं. यानी नाॅर्वे के गिने-चुने ही मूल मुसलमान हैं, बाकी दूसरे देश से आकर यहां बस गए या पढ़ाई या किसी काम के सिलसिले में कई सालों से रह रहे हैं.

नाॅर्वे में बढ़ रहा इस्लाम का प्रभाव

साइंस नॉर्वे डाॅट नो ने एक सर्वे के हवाले से रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें कहा गया है-‘‘ नॉर्वे में खुद को मुसलमान बताने वाले ज्यादातर खुद को ईसाई बताने वालों की तुलना में अल्लाह में अधिक विश्वास रखते हैं.इंस्टीट्यूट फॉर चर्च, रिलिजन एंड वर्ल्डव्यू रिसर्च के अध्ययन में पाया गया कि इस देश में इस्लाम का विस्तार तेजी से हो रहा है.

अध्ययन के निष्कर्ष से पता चलता है कि नॉर्वे के 46 प्रतिशत मुसलमानों का मानना है कि वे दिन में कम से कम एक बार नमाज जरूर पढ़ते हैं.नॉर्वेजियन मुसलमान नॉर्वेजियन ईसाइयों की तुलना में औसतन अधिक धार्मिक हैं. इस अध्ययन में यह भी बताया गया कि यहां के मुसलमान कुछ हद तक अधिक रूढ़िवादी हैं.

इसकी वजह भी बताई गई है. अध्ययन के अनुसार, यहां के अधिकांश मुसलमानों का संबंध अफगानिस्तान, बोस्निया और हर्जेगोविना, इराक, ईरान, कोसोवो, मोरक्को, पाकिस्तान, सोमालिया और तुर्की से है. इस सर्वेक्षण के लिए 800 मुसलमानों के सैंपल सर्वे का सहारा लिया गया.

सोशल मीडिया पर मौजूद नाॅर्वे के मुसलमानों को लेकर बनाए गए अधिकांश वीडियो पाकिस्तानियों के हैं. इस क्रम में कुछ वीडियो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि नॉर्वे में मौजूद मुसलमानों में न केवल पाकिस्तानियों की संख्या ज्यादा है, अपनी संस्कृति और रस्म ओ रिवाज़ को बनाए रखने के लिए वे आज भी अपने लिए बहुत सारा सामान पाकिस्तान से मंगाते हैं. यहां तक कि खास तरह के सिले कपड़े और खाने का सामान भी.

नॉर्वे में पाकिस्तानी छात्र खासे संख्या में रहते हैं. उनका यहां के शिक्षण संस्थानों में दबदबा है. वे जब कोई सेलिब्रेशन आयोजित करते हैं तो तमाम पाकिस्तानी इकट्ठे होते हैं. यहां तक कि कई-कई छात्र फ्लैट लेकर इकट्ठे रहते हैं.वीडियो सर्च के दौरान कुछ पाकिस्तानी फैमली भी नजर आई. वो न केवल खुद रह रही है, अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को भी नॉर्वे में सेटल करा रही है. यहां तक कि ईद के सेलिब्रेशन में भी ज्यादातर पाकिस्तानियों की ही गैदरिंग होती है.

नॉर्वे में मुसलमान कैसे मनाते हैं ईद

दुनिया के किसी भी खित्ते का मुसलमान हो, ईद का चांद नजर आने के दूसरे दिन इर्द की नमाज पढ़ने उसे मस्जिदों में जाना पड़ता है. इससे पहले रातभर तैयारियों चलती हैं.कुछ ऐसा ही नजारा नॉर्वे में मुस्लिम घरों का होता है. रातभर तैयारियां चलती हैं. सुबह सवेरे मर्द मस्जिदों में ईद की नमाज पढ़ने घरों से निकल जाते हैं. मगर रास्ते में ज्यादा गहमा, गहमी नहीं होती. इक्का-दुक्का ही मुसलमान रोड पर दिखते हैं.

प्रवासी मुसलमान झुंड में मस्जिद जाते हैं ईद की नमाज पढ़ने

ज्यादातर यहां के प्रवासी मुसलमान अपने देश के हिसाब से झुंड बनाकर नमाज पढ़ने मस्जिदों में जाते हैं. नॉर्वे के मुसलमानों में अधिकतर सुन्नी हैं. नमाज पढ़कर घर लौटने के बाद सब मिलकर एक साथ तरह-तरह के व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं. फिर सो जाते हैं.

शाम होने पर वे इकट्ठे निकलते हैं. किसी खास जगह एकत्र होकर खाना पीना होता है. चूंकि यहां ईद का कल्चर उस तरह नहीं है, जैसा कि मुस्लिम देशों में होता है, इसलिए ईद के रोज ज्यादातर मुसलमान बाहर से मंगाया खाना ही खाते हैं. एक-दो चीजें घर पर बन जाती हैं.

नॉर्वे के मुस्लिम परिवारों में यह चलन आम है कि नमाज के बाद उनकी घरों की छतों पर बारबेक्यू लगता है. चिकन के कुछ आइटम बनाकर मिलने-जुलने वालों को सर्वे किया जाता है. नॉर्वे के मुसलमान ईद के रोज शाम के समय सैर करने और फोटोग्राफी जरूर घरों से निकलते हैं.

क्या ईद की नमाज के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है ?

अबुजर गफ्फारी की यूट्यूब पर मौजूद ईद पर बनी वीडियो देखकर अंदाजा लगना मुश्किल नहीं है कि ईद की नमाज से पहले मस्जिदों में पंजीकरण कराना पड़ता है. यदि आपने पंजीकरण नहीं कराया है तो आप वहां ईद की नमाज नहीं पढ़ सकते.

अबुजर गफ्फारी छात्र हैं और अपने कई पाकिस्तानी छात्र दोस्तों के साथ एक ही फ्लैट में रहते हैं. उन्हांेने अपनी कमेंट्री में बताया कि आप बगैर रजिस्टेशन के मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सकते. चूंकि इनकी और इनके दोस्तांे की बातचीत से ऐसा लगा कि उनका वहां खासा प्रभाव है, इसलिए मस्जिद में इजाजत नहीं मिलने पर उन्होंने अपने शिक्षण संस्थान के हाॅल में न केवल ईद की नमाज पढ़ने की व्यवस्था की, साथियों के साथ वहीं नाश्ता भी किया. शाम को वे छात्रों की एक ईद गैदरिंग में शामिल हुए.

नाॅर्वे में हैं 8 प्रमुख मस्जिदें
  

धार्मिक जनसंख्या के हिसाब से नाॅर्वे में ईसाई धर्म का प्रभाव है, जबकि मुस्लिम यहां की दूसरी बड़ी आबादी है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 तक नॉर्वे में रहने वाले मुसलमानों की जनसंख्या कुल जनसंख्या 182,607 का 5 प्रतिशत थी.

नॉर्वे के अधिकांश मुसलमान सुन्नी हैं. ज्यादातर मुस्लिम ओस्लो और विकेन में रहते हैं. नॉर्वे में इस्लाम तेजी से विस्तार ले रहा है. हालांकि नॉर्वे में इस्लाम केवल कुछ दशक पुराना है. यहां की अधिकांश आबादी दक्षिण एशिया से आए मुसलमानों की है.

नॉर्वे में 9 प्रमुख मस्जिदें हैं, जो न केवल स्थानीय लोगों के बीच बल्कि दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों में भी बेहद लोकप्रिय हैं.नॉर्वे में मस्जिदें सिर्फ धर्म का ही नहीं प्रेम, मानवता, कला और वास्तुकला का भी प्रतीक हैं.

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